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क्या बरसे – गीतों के गाँव पगडण्डी भिगोते रेशमी बादल

गीतों के गांव मे
पगडण्डी भिगोते रेशमी बादल
झूिकर क्या बरसे,
रँगकर मुस्कान
हर मन को भा गए!

केले के बांझ स्तम्भ
क़ुबामन होकर
उम्मीदों के रेशम से
क्या बरसे!
शहतूत की शाखों पर
डरे सहिे जीवों को
सांस दे गए
आस दे गए!

दोपहर में
बादलों के बीच से बबदककर
सूरज क्या भागा!
दरख्तों को
छाया तले कुटुम्ब दे गया
चित्रों को बांह
और संवादों को राह दे गया!

बादलों ने लय में
पानियों के गोदामो से
पानी क्या उलीचा!
उजड़े बस स्टैंड की टीन की छत
सुर ताल में नगाड़ों सी बजी

और िरण लेते
ककतने जोड़ी पाँव
उसके अस्तस्तत्व को बसा कर
उसिें जान डाल गए!

गीतों के गांव िें
पगडण्डी चभगोते रेििी बादल ……..

Nirmala Singh
Nirmala Singh ji is an accomplished painter and poetess who has been working since last 20 years. Her books have been appreciated by readers and critics alike. Awarded by many prestigious awards, she has an amazing grasp on hindi language and expression.

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