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चााँद अब दूर नहीं – चाँद को आगोश में न ले पाए, तो क्या?

चाँद को आगोश में न ले पाए, तो क्या?
फख् उन नजदीकियों का करें ।
सम्पर्क टूट गया, तो क्या
हौसलों की उड़ान फिर से भरें ।
आज हिस्से में नाकामी आई तो क्या
संकल्प और समर्पण फिर से गढ़े ।
चाँद अभी मुठी में न सही तो क्या
मन की इच्छा शक्ति को हो दृढ पढ़े
आज हम हताश और निरास तो क्या
इक बानगी आशा के समुन्द्र मै तरे।
देख लेना दुनिया वालों दिखा देंगे तुम्हें
चाँद पर होगा परचम, यह भरोसा है हमें।
हमारे शौर्य के आगे ठेगनी रुकावटें हैं क्या
समूह भारत की दआुओं ले में साथ चला।

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