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दीद जगमगाई है रोशनी तुम्हारी है

दीद जगमगाई है रोशनी तुम्हारी है
चांद और सितारों की ज़िदगी तुम्हारी है

रंग से भरी दुनिया रूप से भरी दुनिया
कल भी ये तुम्हारी थी आज भी तुम्हारी है

छा रहे घने बादल गा रहे परिंदे भी
तुम भी अब चले आते बस कमी तुम्हारी है

देख लें तो खिलते है फुल पत्थरों में भी
इस क़दर दुआ जैसी सादगी तुम्हारी है

दर्द  ए दिल बताऊं क्या जख्म ए ग़म दीखाऊं क्या
जो कभी हमारी थी वह अभी तुम्हारी है

दोस्तों जहां रहना याद मुझको रखना तुम
मेरे दील में ताबिंदा दोस्ती तुम्हारी है

यह बुझे भी क्यों सबक़त दरिया ओ समंदर से
बुझ रहा मैं इससे यह तिश्रगी तुम्हारी है

 

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