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प्रीत – कविता

तुम गीत बनो मेरी प्रीत बनो,
तुम मीत बनो मेरी जीत बनो,

तुमसे ही मेरा संसार हो रौशन,
तुम प्रेम प्रज्ज्वलित ज्योत बनो,

गुंजित अंतर्मन की अभिलाषा,
आत्मिक प्रणय की नव रीत बनो,

आल्हादित हृदय के प्राँगण में,
तुम नूतन भावों का स्रौत बनो,

तुम गीत बनो मेरी प्रीत बनो,
तुम मीत बनो मेरी जीत बनो।

©theshekharshukla

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