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आज की इतवार की सुबह बाकि इतवारों से कुछ अलग है।

इतवार है तो सुबह कुछ सुकून वाली है।

इतवार है तो सड़कें कुछ खाली भी हैं।

इतवार है तो लोग कुछ देर से उठे होंगे।

हवा भी कुछ साफ़ और ठंडी है।

आज का इतवार शायद पिछले इतवार से अलग है। आज सुकून की शांति से ज़्यादा डर की शांती है।
आज सड़कें खाली इसलिए नहीं की लोग देर तक सोना चाहते हैं बल्कि इसलिए है की आज घर से निकलने में डर लग रहा है।
एक ऐसा डर जिसने पूरी इंसानी प्रजाति को एक बार रुक कर खुद की ज़िंदगी को बाहर से खड़े हो कर निहारने पर मजबूर कर दिया है। प्रकृति ने वक़्त के मुहाने पर ला कर खड़ा किया है , जहां एक तरफ दर्द है, घुटन है, बेबसी है और दूसरी तरफ प्रकति का जादू है।

नवंबर २०१९ से आये एक छोटे से विषाणु ने सबसे पहले चीन के निवासियों को ज़िंदगी की दौड़ पर रोक लगाने पर मजबूर किया। साइंस की ताकत से लैस चीन अपने हज़ारों नागरिकों की मौत रोक नहीं पाया और ६ महीने से  इस महामारी से लड़ रहा है। धीरे धीरे चुप चाप ये विषानु बाकि दुनिया में अपनी पहचान “COVID 19 ” के रूप में ले कर पहुंचा और बड़े से बड़े देश को अपनी तेज़ी और न रुकने वाली प्रगति की गति को थामने को मजबूर कर दिया।

प्रगति के नाम पर मनुष्यों ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया वो न तो छुपा है और न ही उस पर किसी जानकारी की आवश्यकता है। बदलता मौसम चक्र ,विलुप्त होते जीव जंतु ,पेड़ों के संख्या में कमी, प्रदूषण का बढ़ता स्तर ,पानी की कमी , और पिघलते ग्लेशियर ये कुछ ऐसी चीज़े जो हम सब को रटी हुई है किन्तु इसके अलावा हमारी प्रगति की गति ने प्रकति के साथ मनुष्य का तार तम्य बिगाड़ा है।

मनुष्य प्रकृति की पैदाइश है और सभी जीव जंतु ,पेड़ पौधों के साथ इसका भी हिस्सा है धरती में ,किन्तु हमारे लालच और प्रभुत्व दिखाने की सोच ने हमे और प्रकृति को एक दूसरे के आमने सामने ला खड़ा किया।
समय समय पर भूस्खलन ,तूफ़ान, सुनामी ऐसा बहुत कुछ किया प्रकृति ने हमे चेताने के लिए किन्तु शायद हम अपने स्वार्थ में इतने अंधे थे की किसी और देश की समस्या को अपना समझ उस पर कार्य करना हमारे अहंकार को मंज़ूर नहीं था। लोगो की चीखें , उनका दर्द, उनके टूटे घर सब टी. वी की न्यूज़ की भाँती देखना और फिर अपने काम पर लग जाना।

और फिर – आज का दिन।

अपने चारो तरफ पसरी शान्ति को सुनियेगा। शायद चिड़ियों की चहचहाहट शहर के घरों में सुनी नहीं होगी। इस भयावह बीमारी ने हमे थमने पर मजबूर किया है तो इस वक़्त को आत्मवलोकन के लिए इस्तेमाल करें।
सोचिये हमने किसका किसका हिस्सा छीना है।

शायद प्रकृति ने अपनी जगह वापस छीन लेने की ठानी है !

“इटली के कैनाल में डॉलफिन और मछलियों का दिखना किसी सुखद आश्चर्य सा है। मोटर से चलने वाली नौकाओं ने पानी को इस हद तक मटमैला कर दिया था की हमे पानी के निचे की जादूगरी नज़र भी नहीं आती।”

“नासा से आने वाले चित्रों के अनुसार चीन का प्रदूषण स्तर में आश्चर्यजनक गिरावट आयी है ,क्योंकि इस वाइरस के चलते लोग घरों से बाहर न निकलने पर मजबूर है। “

ये कुछ ऐसी खबरें है जो शायद आज के “quarantine ” के हालत के लिए हमे ज़िम्मेदारी उठाने पर मजबूर करेंगी। आज पूरा विश्व ,पूरी मनुष्य प्रजाति एक ही समस्या से जूझ रही है और कहीं न कहीं समझ भी रहे है की इसके ज़िम्मेदार हम खुद हैं। प्रकृति की दी हुई सम्पदा का मान रखना हमारी ज़िम्मेदारी है और आज की ज़रूरत भी।

आज अपने-अपने रूटीन को समझिये और देखिये की ऐसा क्या है जो आप प्रकृति को वापस दे सकते हैं।
आस पास जाने के लिए पैदल जाये गाड़ी न निकालें। दूर के सफर के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट या पूल करें। गाड़ियों का धुंआ प्रकृति के नुक्सान के साथ हमारी भी साँस रोकता है। घर के कूड़े को “biodegradable ” और “non -biodegradable ” में बाँट ले , AC का इस्तेमाल सीमित करें। गर्मी के मौसम में गर्मी लगने दें या पेपर का इस्तेमाल कम करें!
ऐसा बहुत कुछ है जो हम कर सकते हैं , ऐसा बहुत कुछ है जिसे हम कर मिल सही कर सकते है और ऐसा बहुत कुछ है जिसे हम दूर रह कर भी रोक सकते है। आज के इतवार का दिन #jantacurfew के नाम करें। एक दूसरे से दूर रहना आज की ज़रूरत है।

लिखें , पढ़े, बागवानी करें, घर की अलमारी साफ़ कर डालें ,पुरानी तस्वीरें देखें , कुछ नया बनाएं , परिवार के साथ वक़्त बिताएं , किसी पुराने दोस्त को फोन घुमा लें , या खुद के साथ कुछ वक़्त बिता लें।

आज का इतवार सब के नाम करें और घर में रह कर इस मुश्किल समय में एक दूसरे का साथ दें। सिर्फ आज नहीं अले दस दिन देश पर भारी हैं हम सब की कोशिश ही इससे बचा सकती है।

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