Email: support@kalamanthan.in, editor@kalamanthan.in

Home Ghazals ख़ामोशी अच्छी नहीं

ख़ामोशी अच्छी नहीं

गर शोर है दिल में भरा, तो ख़ामोशी अच्छी नहीं
जो ग़ैर हाथों में फँसी वो ज़िंदगी अच्छी नहीं

इक बार की ही हार है, इस को न दिल से तू लगा
यूँ ज़िंदगी से हार कर, फिर ख़ुदकुशी अच्छी नहीं

जो दोस्त बिन सज जाए वो, महफ़िल नहीं महफ़िल कोई
या’नी अकेले जश्न की, कोई ख़ुशी अच्छी नहीं

गर जिस्म की ही चाह है, उस को मुहब्बत क्यों कहें
नोचे हवस में जो बदन, वो तिश्नगी अच्छी नहीं

महबूब की आँखें अगर, करती नहीं मदहोश तो
फिर छोड़ दो ये मय-कशी, ये मय-कशी अच्छी नहीं

जो हाथ थामा है मिरा, तो बा-वफ़ा रहना सदा
जो बे-वफ़ा हो जाओ तो, फिर तुम सखी अच्छी नहीं

कैसे ख़ुशी उस को कहूँ, जो चश्म तेरी नम करे
औरों के ग़म का हो सबब, वो सरख़ुशी अच्छी नहीं

“साहेब” कुछ भी तुम करो, तो फ़क़्र के क़ाबिल करो
दुनिया के आगे बाप की नज़रें झुकी अच्छी नहीं

Previous articleNUMB
Next articleएक वायरस

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...

Recent Comments

Manisha on गुलाब
Rajesh Kumar on गुलाब