Phone No.: +917905624735,+919794717099

Email: support@kalamanthan.in

Home Blogs सशक्तिकरण की पहचान - जबना चौहान

सशक्तिकरण की पहचान – जबना चौहान

जबना चौहान – एक सादा सा  नाम और सादी सी शख़्सियत।

जिसको देख कर उसके मज़बूत इरादों का अंदाज़ा भले न लगे लेकिन उसकी ज़िन्दगी की उपलब्धियां और सोच की मज़बूती आपको हैरानी में डाल देगी।

हिमाचल के मंडी जिले के थरजन गांव की जबना चौहान भारत की सबसे कम उम्र की सरपंच हैं।

जी हाँ, 22 साल की उम्र में जबना थरजन गांव की सरपंच बनी।

जबना के बारे में पढ़ कर कहीं न कहीं इनसे मिलने और बात करने की इच्छा हुई । समझना चाहती थी की क्या ये हमारी कल की नेता है ? या किसी की सरपरस्ती में आगे बढ़ती हुई आज के ज़माने की लड़की। मेरे ज़हन में सवाल थे और इन सवालों के जवाब के लिए बात ज़रूरी थी।

फोन के उस तरफ जो आवाज़ थी उसमे मिट्टी की खुशबु थी।

पता नहीं क्या था की बात चीत के पहले ५ मिनट में ही सारे संशय दूर हो गए। ऐसा लगा की एक उम्मीद और सुकून है की भारत के छोटे से गांव में एक सशक्त नारी है जो सब कुछ समेट कर देश को आगे बढ़ाने का सपना देख रही है और उसके लिए मेहनत भी कर रही है।

जबना की ज़ुबानी उसकी कहानी, हिमाचल की आबो हवा के जैसे ही साफ़ और निश्छल थे।

“मेरे पिता किसान है और हमारे गांव में भी लड़कियों को आगे पढ़ने की और बढ़ने की इजाज़त नहीं थी, लेकिन कहीं न कहीं मैं पढ़ना चाहती थी, और मेरी ज़िद के आगे पिताजी मजबूर हुए। मुझे आगे पढ़ने की इजाज़त मिल गयी। मुझे शुरू से ही लोगो की मदद और समाज के लिए कुछ करने में रुची थी। गांव में जब किसी को कोई समस्या आती तो सरकार और महकमे तक बात पहुंचाने के लिए मैं  पत्र लिखती और कार्य करवाती। मैं 22 वर्ष की ही थी जब संदीप कदम जो की मेरे गाँव में नियुक्त आई.ए.एस थे उन्होंने मुझे गाँव के सरपंच का चुनाव लड़ने को प्रेरित किया। पहले तो मुझे लगा की यह मुझे नहीं करना। मैं यूँ ही लोगो की मदद करूँ किन्तु सिस्टम को ठीक करने के लिए सिस्टम में रहना ज़रूरी है। मैंने चुनाव लड़ा और जीत गयी। तब से आज तक का मेरा सारा वक़्त मेरे मेरे गाँव की बेहतरी के लिए ही जाता है।”

 

जबना जबसे अपने गाँव की सरपंच बनी हैं तबसे गाँव उत्थान के लिए के लिए काम कर रही हैं। जबना ने अपने गाँव में शराबबंदी पर काम किया। ये करना आसान नहीं था। इस फैसले पर काम करते हुए जबना को आपने गाँव के पुरुषों की तरफ से खिलाफत मिली। उनके अनुसार “उस वक़्त गांव के पुरुष उनके घर के आगे आ कर शोर भी मचाते थे किन्तु मैं अपने इरादे पर अडिग रही और गाँव वालों को इसके बुरे नतीजों के बारे में बताया। धीरे धीरे गांव के लोगो ने बात समझी और आज चार साल से मंडी व उसके आस पास के गाँव में शराब पर रोक है।”

 

इस समस्या को खत्म करने के बाद गाँव की स्वच्छता, जबना के कामो की फेहरिस्त में सबसे ऊपर थी। स्वच्छता एक स्वस्थ समाज की नींव है यह मानते हुए प्र्धानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को अपनाते हुए जबना ने अपने गांव में कार्य किया और अपने थर्जन गांव को स्वच्छता में पहला स्थान दिलाया। जबना को इसके लिए न सिर्फ मुख्यमंत्री और गवर्नर से प्रशंसा मिली बल्कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रधानमंत्री जी द्वारा पुरस्कृत भी किया गया।

 

लड़की है कब तक साथ देगी।

“शुरू में लोगो का यही कहना था की लड़की है पराये घर जाएगी लेकिन मुझे नहीं समझ आता लड़की के सपने, उसके कुछ करने की चाह को वो तवज्जो क्यों नहीं मिलती! शादी कर के घर बसना ही तो ध्येय नहीं। लेकिन मेरे प्रयासों को देख कर अब धीरे धीरे लोगो ने अपना लिया और अब उन्हें बेहद गर्व भी है।”

जबना की आवाज़ में मुस्कराहट सुनाई दे रही थी जो की उनके सालों की मेहनत और अब लोगों के विश्वास की झलक दे रहा था।

जबना की कोशिशें हर क्षेत्र में सराहनीय हैं। समाज को विकसित करने में सबकी भागीदारी होनी चाहिए ,यही सोच कर जबना ने एक एनजीओ की स्थापना भी की जो विशेषकर महिलाओं की शिक्षा स्वास्थ्य व पर्यावरण की ओर काम करती हैं। नारी और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा और उनके तरफ हर जन की ज़िम्मेदारी है इसका एहसास करने के लिए जबना ने अनोखी पहल की। थरजन गाँव में लड़की के पैदा होने पर 11 पौधे लगाए जाते हैं जिन्हे बड़े प्यार से सींचा जाता है। महिलाओं की शिक्षा के लिए जबना का कहना है की “लड़कियां शिक्षित होंगी तो पूरा समाज शिक्षित होगा।”

“अगर नारी एक देश की आधी आबादी है तो कानून और सरकार में उसकी आधी भागीदारी भी होनी चाहिए। नारी की सुरक्षा उसे घर में बंद करने से नहीं आएगी बल्कि हर गली और हर सड़क पर नारी का उतना ही हक हो जितना पुरुष का है।”

समाज में नारी सशक्तिकरण – ये सवाल ज़रूरी था। सशक्त नारी की पहचान जबना के सशक्तिकरण क्या है ?

“नारी सशक्तिकरण की आज कितनी आवश्यकता है ये समाज में होने वाले जुर्म और 21वीं सदी में भी नारी के शोषण की तमाम खबरों से अंदाज़ा लगाया जा सकता है। नारी को समान अधिकार मिलने चाहिए और हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका भी। मेरे लिए ज़रूरी है की जहां हमारे लिए कानून बनते हैं वहाँ नारी की समान भागीदारी हो। अगर नारी एक देश के आधी आबादी है तो कानून और सरकार में उसकी आधी भागीदारी भी होनी चाहिए। नारी की सुरक्षा उसे घर में बंद करने से नहीं आएगी बल्कि हर गली और हर सड़क पर नारी का उतना ही हक हो जितना पुरुष का है।”

स्वावलंबन नारी को एक अलग ताक़त देता है और उसे सशक्त करता है। नारी को सशक्त करना और उनकी समस्याओं को खत्म करने के उद्देश्य से ही आगे बढ़ रही हूँ।

 

निकट भविष्य के बारे में जबना का कहना है की “अभी राह चुनी है सफर बाकी है। मैं अब पूरे प्रदेश में महिलाओं के लिए ही काम करना चाहती हूँ।पीरियड्स पर काफी खुल कर चर्चा ज़रुर हो रही है किन्तु अब उस पर दुगनी तेज़ी से काम करने की आवश्यकता है और मेरा एन जी ओ इसी क्षेत्र में काम कर रहा है। साथ ही मेरा मानना है की नारी को स्वावलम्बी होना ज़रूरी है। स्वावलंबन नारी को एक अलग ताक़त देता है और उसे सशक्त करता है। नारी को सशक्त करना और उनकी समस्याओं को खत्म करने के उद्देश्य से ही आगे बढ़ रही हूँ।”

जबना चौहान नए भारत की वो तस्वीर बनती हैं जिसे देख कर यकीन होता है की देश का भविष्य उज्ज्वल है। इनके जज़्बे को दिल से सलाम और ढेरों दुआएं।

nirjhra
Leading the editorial team with a vision of bringing quality content and varied thoughts on different aspects of society, art , life in general.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

आंखो की नमी से बहता काजल

आंखो की नमी से, बहता काजल देखा है कभी ,दर्द का बादल !! काजल के बहने से, होती वो हल चल सासो के सिसकियां में , बदल...

चिड़िया

  मत कैद करों चिड़ियों को जाने दो जहाँ जाना है ! उड़ने दो इस आसमान मे उनको भी पंख पसारना है!!१!! उनको इस आसमान में अपनी पहचान बनाना है...

इंग्लिश वाली पर्ची

"अरे सुधा कहाँ हो ,जरा एक कप चाय पिला दो" राकेश जी ने अपनी पत्नी को आवाज दी..सुधा जी उम्र करीब 45 साल,केवल 8वीं तक...

राधे तेरी बन्सी और बृज की छाँव

राधे ,कहाँ गयी तेरी बन्सी और बृज की वो छाँव न रहा वो मिट्टी का अपनापन और गऊओं से लगाव अब नहीं आऊगा तेरे  गॉंव वो पुष्पों...

Recent Comments