Email: support@kalamanthan.in, editor@kalamanthan.in

Home Poetries किताबों की दुनियाँ

किताबों की दुनियाँ

किताबों की दुनियाँ बड़ी विचित्र है
इन्होंने रचे जाने कितने चरित्र हैं
कही अनकही सारी कहानी है इनमें
कुछ बच्चों की ज़ुबानी है इनमें
कई भाषा कई वर्णन में दिखती हैं
कई भाव में बिकती हैं…..
कुछ में इतिहास लिखा है
कुछ में इतिहास लिखा है
तो कुछ में दिखता भविष्य है……
कितने ही लोगों ने
कितनी ज़बानों में
अपने दिल का हाल लिखा है….
कुछ परियों की कहानी लिए
सपनों में दिखती हैं
तो कुछ हकीकत के धरातल पर
हर रोज़ सिकती हैं……
धर्म जाति वर्ण सबके बारे में
बताती हैं हमें
तो कुछ सितारे दिखाती हैं हमें…..
नगर गाँव ज़िन्दगी हर चीज़
इनका हिस्सा हैं
इनमें लिखा हर एक किस्सा है…..
ये किताबों की दुनियाँ बड़ी विचित्र है
इन्होंने रचे जाने कितने चरित्र हैं….
Previous articleFraming Life Through Lenses
Next articleअंकुश
Manisha Yadava
Dr.Manisha Yadava is an Author/poet/reiki healer/Dowser/angels card reader/Motivational speaker/Meditater/Art of living volunteer and Member of Indian Literature society. She has done Phd in economics.She has been writing poetry since class 9th. As an Author she has written two poetry books “Mere Khayal and “Driya-E-Ehsaas” and CO-Author of four anthologies. This year she is releasing her third book in five different languages She was on 9th May 1973 in Meerut (up) in a well educated family.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

अम्मा का इंतकाल

बालपन में घटित एक दुःखद घटनकाल की सुखद अनुभूतियाँ, ये मेरे बालपन का संस्मरण है,जब मासूमियत दिल पे हावी होती है और ज़ुबाँ पे...

अनुराधा

रात का अंधेरा और गहरा होता जा रहा था साथ ही मेरे भीतर की जदोजहद भी गहरी होती जा रही थी | बीते कुछ...

आज़ादी की क़ीमत

  रानी के पड़ोसी दूसरे शहर शिफ्ट हो रहे थे, जाते हुए उन्होंने अपना तोता रानी को दे दिया। पहले रानी को यह ज़िम्मेदारी कुछ...

मेरा अपना भी अस्तित्व हैं

“सुबह पांच बजे के करीब नींद खुली, फ़िल्टर कॉफ़ी माइक्रो कर जब बालकनी में आई, अद्भुत नज़ारा था..सामने वाले पार्क से आता कलरव आस...

Recent Comments

Manimala Chatterjee on गुलाब
Manisha on गुलाब
Rajesh Kumar on गुलाब