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जरूरत

 

ये मेरी कलम जरूरत के हिसाब से हर बात लिखती है,

जज्बातों में डूबे खूबसूरत अल्फाज लिखती है

कभी इकरार ,तो कभी इन्कार, कभी फरियाद लिखती है,

जिंदगी से जुड़े किस्से भी तमाम लिखती है

देश की रक्षा के लिए तत्पर हमेशा रहते

जांबाज वीरों के लिए आभार लिखती है

नहीं करते जो काम अपना ईमानदारी से

समाज के ऐसे ठेकेदारों पर कटाक्ष लिखती है

ईश्वर की भक्ति रस में डूबे भक्तों को

महसूस जो होती वह मिठास लिखती है

ना समझ सकोगे कब,क्यों,क्या और कैसे सब लिखती है

मेरी कलम जरूरत के हिसाब से हर बात लिखती है।

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