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बदला

 

रेवा आज कई सालों बाद अपने ननिहाल आई है, दरअसल उसके मामा की बेटी की शादी है..वैसे तो वो सालो से कनाडा में रहती है पर इस बार नानी के बनाए अचार की महक उसे खींच ही लाई..

दूर से आना था तो वो शादी से करीब 10 दिन पहले ही आ गई है..ये एक कस्बा है जो शहर से कम और गांव से ज्यादा विकासशील है।
वैसे तो सभी सुविधाएं है पर पानी सरकारी टँकीयो से से समय पर आता है..खाना गैस पर ही बनता है पर नहाने का पानी चूल्हे पर गर्म होता है..मामा ने दो गाय और एक भैंस रखी है..ये बात अलग है कि उन्हें सम्भालने के लिए नौकर चाकर है।

रेवा की शादी को करीब 7 साल हो चुके है पर अभी औलाद सुख से वंचित है।

गाड़ी अब ननिहाल की गलियों में चल रही है। माँ नानी और बाकी सब से मिलने की बात सोचकर धड़कने बेकाबू हो रही है..
ये रही वो पत्तियां जो खाने में खट्टी लगती थी जाने क्या नाम है इनका।वो रहे मामा के खेत! कभी खरबूजे, टमाटर, और खीरे की फसल की जगह अब गन्ने खड़े थे।

दरअसल उनकी देखरेख करना बड़ा ही झंझट भरा काम था..तो मामा भी कच्ची खेती से पक्की खेती की तरफ आ गए थे।

गाड़ी घर से कुछ दूर पहुँची ही थी कि सामने लोगों हुजूम खड़ा था..रेवा मुस्कुराई पक्का सब लोग छत पर ही होंगे गाड़ी देखकर भाग आए पहले ही।

रेवा को याद है कैसे मामा के घर की छत से कस्बे के बाहर की सड़क दिखती थी..वहां से गुजरने वाली बसों को देख वो ‘टा टा’ किया करते।

सड़क के दोनों तरफ थे लहलहाते खेत..वो दौड़कर माँ के गले लग गई।
माँ दो दिन पहले ही शहर से आई थी। सब लोगो ने भर भर आशीष दिये।
नानी तो गले से लगी तो मामा को खींचकर छुटाना पड़ा।

वो सबके साथ घर की तरफ चल दी। घर की तरफ जाते हुए उसने देखा एक करीब 3 साल का बच्चा पड़ोस के बने घर से झांक रहा था। उसने मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा तो वो झट से हंसकर छुप गया।

घर पहुँचकर मामी ने सामने पकवानों का ढेर लगा दिया। हमेशा डाइट पर रहने वाली रेवा ने भरपूर खाया। आज लगा पेट के साथ आत्मतृप्ति भी हो गई।
रेवा ने मामा से कहा कि वो नानी के साथ आंगन में सोना चाहती है, खुले आसमान के नीचे।
नानी के घर मे शुरू से ही सब लोग 7 बजे खाना खाकर साढ़े 8 या 9 बजे तक सो जाते थे।

रात को खाट पर लेटी रेवा आसमान में टिमटिमाते तारो से जैसे शिकायत कर रही थी। एक अदद बच्चे की चाह भी ईश्वर पूरी नहीं कर रहा।
अचानक किसी बच्चे के रोने की आवाज़ आई, ऐसा लगा मानो खाट के सिरहाने ही बैठा कोई बच्चा रो रहा हो।

वो फुर्ती से उठ खड़ी हुई, मोबाइल में समय देखा 11 बजे थे..रेवा के हिसाब से ये बहुत ज्यादा समय नहीं था।आवाज का पीछा करती हुई उसी घर के करीब पहुंच गई जहां रेवा ने वो छोटा बच्चा देखा था।

उसने घर मे झांककर देखा एक औरत बच्चे को जबरदस्ती सुलाने की कोशिश कर रही थी।

“ये इतना क्यों रो रहा है”? रेवा ने बच्चे की तरफ देखते हुए उस औरत से पूछा

“ये भूखा है दीदी, दूध उतरता नही है और मेरे पास कुछ खाने को नही है”

“क्यों ऐसा क्यों?

“इसके जन्म लेते ही इसके पिता को खेती में लाखों का नुकसान हुआ, घर के जानवर मरने लगे तो इसे अपशकुनी मान हम दोनों को घर के इस पिछले उजाड़ हिस्से में भेज दिया है…कल से कुछ खाने को भी नही दिया ”

“ये कैसे जल्लाद लोग है, मैं सुबह ही बात करती हूं..तुम मेरे मामा से मदद मांग सकती थी”

“क्या फायदा दीदी जो ,मेरे बच्चे को अपशकुनी माने उनसे दया नहीं चाहिए मुझे.. आपके मामा से क्या मदद मांगती, उन्होंने कई बार समझाया मेरे ससुराल वालों को..पर कोई फायदा नही..मेरी सास को तो उसकी करनी का फल मिल गया पिछले हफ्ते रसोई में जल कर मर गई वो…”

“ओह्ह, रुको तो मैं कुछ लाती हूं खाने के लिए”

इतना कह रेवा तेजी से घर की तरफ गई, वो इतनी रात में किसी को परेशान नही करना चाहती थी..उसके बैग में जो भी बिस्किट नमकीन और अन्य सामान था वो लेकर गई और उस औरत को देते हुए बोली “ये लो, मैं अब जा रही हूं तुम्हे कुछ भी जरूरत हो तो मुझे जरूर बताना।”

“ठीक है दीदी”

रेवा को वापस आकर बड़ा सुकून मिला और वो गहरी नींद में सो गई।

सुबह उठते ही उसने नानी से बात छेड़ते हुए कहा “नानी ये जो पड़ोस का घर है, वहां वो औरत..”

नानी एकदम से बात काटकर बोली”नाम भी मत लेना उस घर का..जो वहां रहती है वो इंसान के रूप में डायन है डायन”

“लेकिन नानी मुझे तो वो बड़ी दुखी लगी..और वो बच्च…”

“वो जैसी दिखती है, वैसी नही है..अपने मामा के सामने जिक्र भी ना करना उसका.. घर मे क्लेश हो जाएगा”

रेवा उलझ गई थी, एक माँ अपने 3 साल के भूख से बिलखते बच्चे को लेकर बैठी थी..उसने किसी का क्या बिगाड़ा था।

वो पूरे दिन टकटकी लगा उधर देखती रही..पूरे दिन में सिर्फ दो बार वो औरत बच्चे को लेकर छत पर टहलती दिखी।

दोपहर को मामी की छोड़कर सब लोग शॉपिंग करने निकल गए, मामी सब काम निपटा कर लेट गई थी..रेवा ने चुपचाप कुछ खाने का सामान लिया और पड़ोस के उस घर मे पहुँच गई।

उसने दो बार आवाज़ दी पर कोई भी जवाब ना पाकर वो सामान रखकर लौट आई।
रेवा को अजीब सी बैचैनी हो रही थी..वो उस बच्चे को देखने के लिए व्याकुल थी..कुछ सोचकर रेवा घर के अगले हिस्से की तरफ बढ़ चली..हो सकता है वो पति के पास चली गई हो।

रेवा घर के सामने से इस तरह निकली जैसे वो ऐसे ही टहलने निकली हो..उसने देखा घर के दरवाजे पर एक अजीबोगरीब हंडिया जैसी लटकी हुई थी।
रेवा हैरान सी देख ही रही थी कि अचानक एक औरत के साये को उसने खिड़की से झांकते हुए देखा, उसके देखते ही वो साया छुप गया।
रेवा का शरीर पसीने पसीने हो गया था..कुछ था जो उसके दिमाग मे खटक गया था..वो लगभग भागते हुए घर की तरफ मुड़ गई..
घर से पहले ही उसे वो औरत और बच्चा आंगन में बैठे दिखे, कुछ सोचकर वो घर जाने की बजाय उनकी तरफ बढ़ चली

“सुनो तुमने कहा था तुम्हारी सास जलकर मर गई”?

“जी दीदी”

“पर मैंने आज एक बूढ़ी औरत को खिड़की से झांकते देखा था”

“जरूर देखा होगा, कई लोगो ने देखा है”

“मतलब”

“मेरी सास की रूह है वो, मुक्ति नही मिली उन्हें, आत्महत्या करने वाले को मुक्ति नहीं देता भगवान”

“मतलब..मतलब.. व.. वो..आत्मा”

“जी, दरअसल उनके बेटे यानी मेरे पति ने पूरे घर को बिंधवा दिया है..वो चाहते है माँ उनके ही पास रहे चाहे आत्मा बन कर रहे।

“ये तो बहुत ही अजीब बात है’

“हाँ दीदी पर सच है क्या कर सकते है, आप चाहे तो मदद कर सकती है”

“क.. क्या, क्यों मतलब कैसे”?

“दीदी, मेरी सास ने मुझे बहुत कष्ट दिए भूखे प्यासे रखा, मेरे नन्हे से बच्चे को अपशकुनी कहकर पीटा.. लेकिन मैं चाहती हूं उन्हें अब मुक्ति मिल जाए”

“क्यों, उन्होंने इतना बुरा किया तुम्हारे साथ फिर भी”?

“मेरा ही लालच है इसमें भी, जब तक वो वहां है मैं उस घर में नही जा सकती..अगर उन्हें मुक्ति मिल जाए तो शायद मैं और मेरे पति फिर एक हो जाए… नही तो जीवन भर वो इसी मोह में पड़े रहेंगे”

“ह्म्म्म क्या कर सकती हूं मैं”?

“बस आप उस हंडिया पर इस रोली से क्रॉस बना दो, उसका असर खत्म हो जाएगा”

“तुमने मुझे इतना हिम्मती समझा है क्या?तुम खुद क्यों नहीं करती।”

“हिम्मती नही हमदर्द..आप मेरा दर्द समझते हो..मैं कर देती पर इस छोटे से बच्चे के साथ कैसे?”

रेवा ने रोली ले तो ली पर डर से हालत खराब थी, पूरी रात जागते निकाली. सुबह 4 बजे अंधेरे में वो रोली को मुट्ठी में दबा घर से निकल गई।

घर के सामने पहुँचने पर उसकी हिम्मत जवाब देने लगी..उसने खिड़की की तरफ बिना नजर उठाए जल्दबाज़ी में हंडिया पर क्रोस बनाया और भाग खड़ी हुई।

घर आकर उसे गहरी नींद आ गई थी… ठीक 8 बजे भयंकर शोर के साथ उसकी आंख खुली

पड़ोस के घर से आग की लपटें उठ रही थी.. वो दौड़ती हुई भीड़ का हिस्सा बन गई।

“म..मामा.. न..नानी ये सब ये सब कैसे”?

“सब कर्मो का फल है जैसा किया था वैसा भुगता”

“किसने क्या किया नानी..वो औरत?

“डायन थी वो औरत अपनी फूल सी बहू और पोते को जिंदा रसोई में जला दिया था उसने |सबूत न मिले तो छूट गई ! हमारी नहीं सुनी पुलिस वालों ने…सबूत जो नहीं थे हमारे पास|”

“आप क्या बोले जा रहे हो”?

“ये जो आज जलकर मरी है..इसने अपने बहू पोते को मार दिया था..बहू की आत्मा ने जीना हराम किया था इसका.. बदला लेना चाहती थी वो..पर बेटे ने माँ के लिए घर बिंधवा दिया..कल किसी ने उसका असर काट दिया और बस..उस अबला ने अपने और अपने बच्चे की मौत का बदला ले लिया.. मर गए दोनों माँ बेटा जलकर..”

रेवा का शरीर कांपने लगा, पूरा शरीर पसीने से नहा उठा..वो बेहोश हो गई।

होश आया तो पूरा परिवार उसे घेरे बैठा था।

“मामा मुझे आज ही निकलना है”

“क्यों बेटा..?माना अब पड़ोस में मौत होने के कारण धूमधाम नही होगी पर शादी तो करनी ही है।”

“इस घटना के बाद मैं नही रुक पाऊंगी प्लीज”

“रेवा की हालत देखते हुए उसे शाम को ही गाड़ी से स्टेशन भेजने की तैयारी कर दी गई।

रास्ते के धुंधलके में रेवा ने अपना सर गाड़ी से टिका लिया..तभी बच्चे के रोने की आवाज से वो डर गई।

उसने गाड़ी से झांका… सड़क के दूसरी छोर पर वो खड़ी थी..उसका आँचल पकड़े वो बालक मुस्कुरा रहा था…उसने दोनों हाथ अभिवादन के लिए जोड़े।

और गायब हो गई।

रेवा को अब हल्का महसूस हो रहा था।

 

 

 

 

 

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