Email: support@kalamanthan.in, editor@kalamanthan.in

Home Social issues लाक डाउन में सकारात्मक अनुभव भी

लाक डाउन में सकारात्मक अनुभव भी

यह लोकडाउन बहुत कुछ नया लेकर आया है।
कोई डांस सीख रहा है, कोई गाना ,कोई कुकिंग कर रहा है, कोई लूडो खेलना है।
कुछ लोग ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स भी कर रहे हैं। स्कूल भी ऑनलाइन चल रहे हैं ।
सब अपने परिवार के साथ समय व्यतीत कर रहे हैं। इतना समय शायद हमें पहली बार मिला है , शायद आगे इतना समय कभी ना मिले।इन सब चीजों के बीच मेरे अंदर भी बहुत कुछ बदला है ।तरह-तरह की भावनाओं ने जन्म लिया है और कुछ भावनाएं खत्म भी हुई हैं, पर यह सब मुझे बहुत कुछ सिखा गया हैं ।
सबसे पहले मैंने सीखा धैर्य रखना।
वह पहले भी था परंतु यह कुछ अलग तरह का अनुभव हुआ है। बिना हाउसहोल्ड हेल्प के हम इतने दिन निकाल रहे हैं ।ऐसा पहले कभी नहीं हुआ ।यह एक अच्छा अनुभव है। हम धैर्य पूर्वक अपने रोजमर्रा के घरेलू काम खुद कर रहे हैं ।अब हम चेहरे पर मुस्कान लिए सब काम कर रहे है।
दूसरी चीज मैंने सीखी वह है परिस्थिति को स्वीकार करना।
जो कुछ भी दुनिया में घट रहा है ,मतलब कोरोना , इसके आगे हमारा बस नहीं चला । हमने स्वीकार कर लिया घर रहना।खुशी-खुशी घर में लाक डाउन हो गये , ताकि हम और हमारे अपने घर में सुरक्षित रहें।
आजकल सामान की सप्लाई बहुत कम है जो मिल रहा है उसीमें ही गुजारा करना पड़ रहा है ।तो मैंने सीखा कि ना हमें brand चाहिए ना ,हमें मंहगी चीज चाहिए, सिर्फ कुछ सामान में गुजारा हो सकता है।
मैंने कम सामान में गुजारा करना सीख लिया है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
इस वक्त सिर्फ हमें अपनों की फिक्र है ।देश की चिंता है कि सब पहले जैसा हो जाएं और सब सुरक्षित रहें । परिस्थिति को स्वीकार कर लिया है।
लाक डाउन के बीच मैंने जानवरों का प्यार, अनुराग भी देखा ।
मेरे घर के बाहर एक छोटा सा कुत्ता हमेशा बैठा रहता था। ना वह मुझे पसंद करता था ,ना मैं उसे पसंद करती थी ।एक दिन लॉक डाउन में मैंने देखा कि वह बहुत कमजोर दिख रहा है ,मैंने उसे रोज खाना देना शुरू कर दिया ।बदले में उसने मुझे बेहद प्यार दिया। अब वह एक घर के बच्चे की तरह है। मैंने उसका अनुराग देखा ।
इससे मुझे एक नई तरीके कीआत्म संतुष्टि मिली जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की ।

एक चीज समझ आई कि हमारे ही अंदर सब कुछ करने की शक्ति है। परिस्थिति को स्वीकार करके अगर हम शांति के साथ अपना काम करेंगे तो सब काम आसानी से हो जाता है।

पहले सुबह की भाग दौड़ से शुरू होती थी ।अब सुबह होती है आराम से चाय के कप के साथ,ॐ के उच्चारण के साथ, कुछ मेडिटेशन के साथ ,जो कहीं ना कहीं बहुत शांति और खुशी देता है।
यह मेरे लिए लाकडाउन में मिला नया अनुभव है।

 

 

 

To read more from Author

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा  लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं।अगर आप भी लिखने या पढ़ने के शौकीन हैं तो हमारे मंच का हिस्सा बनिये Log in to http://www.kalamanthan.in
लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

हमें फोलो करे Facebook

Previous articleघूंघट
Next articleसोलमेट

2 COMMENTS

  1. बहुत बढ़िया , सकारात्मक रहने की प्रेरणा देता लेख. बढ़िया लेखन

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

How to Teach Writing Skill to Toddlers?

Being into Early childhood education and parenting, I was always asked varied questions by young, anxious mothers. Apart from the initial hiccups of toilet training...

अंतर्द्वन्द

आज 'निशा 'का दिल जोर जोर से धड़क रहा था। न जाने कितना अंतर्द्वन्द मन में था ।"क्या मैं ग़लत तो नहीं कर रही ।"...

विश्व हृदय दिवस पर..❤️

"पिछले दिनों घर में पुताई के बाद परदे लगे तो एक खिड़की के परदे बहस का मुद्दा बन गए . हुआ ये कि उस...

Torchbearer

I could hear my phone ringing in the bedroom. I rushed to pick it up. It was Radha. Congratulations! You've been selected in UPSC! I was...

Recent Comments