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अस्तित्व पर थप्पड़

 

राम,
मुझसे अब नहीं होगा। थक गयी हूँ मैं रोज़ खुद को साबित करते करते। आज जब मैं खुद से पूछती हूँ कि,”कौन हूँ मैं ?” तो सिर्फ़ तुम्हारी बीवी ही सामने खड़ी होती है। मै कब रश्मि से राम की बीवी बन कर रह गयी पता ही नहीं चला। रश्मि तो गायब ही हो गयी। अपना घर, अपने माता पिता, अपना करियर सब छोड़ दिया।
रोज़ यही सोचती हूँ कि आज जो हुआ वो कल नहीं होगा। पर सोची हुई चीज़ कभी नहीं होती। सर्वगुण संपन्न बनने की कोशिश ने मुझे मेरे अस्तित्व से ही दूर कर दिया। परफेक्ट बहू, परफेक्ट बीवी, परफेक्ट गृहणी के जाल में फस के रह गयी हूँ। कभी सोचा ही नहीं कि मैं भी तो एक परफेक्ट पति, एक परफेक्ट ससुराल के लायक हूँ।
अकेले ही भाग रही हूँ। अब और बर्दाश्त नहीं कर पाउगी। एक उम्मीद होती थी रोज़ तुमसे, सबके सामने ना सही शायद बन्द कमरे में तुम मुझे समझोगे। मेरे साथ रहोगे, पर वहाँ भी मेरे अरमान तुम्हारे साथ ही बिस्तर पर रौंद दिये गये। गलती पर भी सुनना और गलती ना कि तो भी सुनना। पर अब बात मेरे चरित्र की है। तुमसे प्यार करती हूँ पर इसका ये मतलब नहीं कि तुम्हारे घर वालों को कुछ भी बोलने का हक मैंने दिया है।
आज माँ जी ने मेरे चरित्र को निशाना बनाया है और ये मुझे बर्दाश्त नहीं। और उस जगह पर तुम्हारी चुप्पी। और अगर मैंने अपने लिए आवाज़ उठाई तो क्या गलत किया जो तुमने मुझे थप्पड़ मार दिया। ये थप्पड़ मेरी सच्चाई और अस्तित्व पे लगा है राम। और इसके साथ मै जी नहीं पाउगी।
तुम बस खुश रहना। मै तो नहीं रह पायी।
और हाँ, एक बात और अपनी दूसरी शादी टूटने मत देना। मै तो तुम्हारी बीवी और तुम्हारे बच्चे की माँ हीं बन पायी पर शायद दूसरी बीवी से तुम्हारे अरमान पूरे हो पाये।
तुम्हारी रश्मि ।
रात के झगड़े के बाद राम दूसरे कमरे में सो गया था। उसे बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि उसी घर के दूसरे कमरे में उसकी पत्नी क्या कर रही है। सुबह हुई और राम जब कमरे में गया तो रश्मि इस दुनिया से दूर जा चुकी थी।
बिस्तर पर पड़ी हुई उसकी लाश मानों राम से ये पूछ रही थी कि क्या जो हुआ वो सही था। जो शादी के वक़्त कसमे खाई थी क्या निभाये तुमने। रश्मि के साथ रश्मि के सवाल भी चले गए। रह गया तो रश्मि का आखिरी लेटर।
ये कहानी थी रश्मि की जो हार चुकी थी।
पर उसने जो किया क्या वो सही था?
भारत में ऐसी बहुत सी औरतें हैं जो दिन रात अपनी शादी बचाने के लिए संघर्ष कर रही है और कयी ऐसी है जो रश्मि की तरह हार मन कर दुनिया को अलविदा कह चुकी है।

 

 

 

 

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