Email: support@kalamanthan.in, editor@kalamanthan.in

Home Short Stories दीदी भी माँ के समान होती है

दीदी भी माँ के समान होती है

 

एक लड़की के लिए माता-पिता की क्या एहमियत है ये कोई नहीं समझ सकता है। माता-पिता जब तक होते है वो हमेशा ही अपनी बेटी को सम्हालते हैं। पर कभी ये सोचा है कि जब वो दुनिया से चले जाते है तो क्या होता है?
ये कहानी है नुपूर की।
नुपूर के दो भाई और एक बहन थे। नुपूर सबसे छोटी थी। सबकी लाडली। माता-पिता, भाई, बहन सबको उसी का खयाल होता। नुपूर के माता-पिता अपने जीते जी सबकी शादी कर दिए। सब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने लगे। पर किसी को क्या पता था कि वो सब छोड़ कर चले जायेंगे।
नुपूर की शादी के दो साल ही हुए थे कि अचानक नुपूर के पापा को ब्रेन हेमरेज हो गया और वो चल बसे। अचानक से सब बिखर सा गया। पर उसी समय नुपूर की माँ ने अपने दुःख को छुपाते हुए बोला,” मत परेशान हो तुम सब। तुम्हारी माँ तो जिन्दा है। क्या हुआ जो पापा चले गए।मै तुम सबको छोड़ कर नहीं जाउंगी”।
उन्होंने अपने आप को सम्भाला और बच्चों को भी। पर किसी को क्या पता था कि जो माँ सबको साहस दे रही थी वो कहीं न कहीं अपने दुःख को छुपा रही थी। इसी दुःख ने उनको भी जीने नहीं दिया और पापा के जाने के छः महीने बाद ही वो भी दुनिया से चल बसी।
नुपूर के माता-पिता दोनो इस दुनिया से दूर जा चुके थे। नुपूर की माँ जब बीमार थी तभी नुपूर माँ बनने वाली थी। पर ये उसे उनके जाने के बाद पता चला । सबको बहुत खुशी हुई कि उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ है नुपूर को। पर नुपूर हमेशा ही उदास रहती। डाक्टर ने बोला कि उसे अपना ध्यान देना होगा।
पर ख़ून के रिश्तों की सच्चाई तो अब सामने आने वाली थी। इधर नुपूर के परिवार वाले और उसका पति उसे खुश रखने की कोशिश में थे कि दूसरी तरफ एक दिन उसके भाई ने जायजात के कागज़ उसे भेज दिए। कयोंकि उनको वो अपने नाम करानी थी। उन्होंने नुपूर और उसकी दीदी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। नुपूर को अच्छे से पता था कि जो घर उसके माँ-पिता के मेहनत की कमाई है वो उसे बेचना चाहते हैं।
उसके भाईयों ने उससे रिश्ता तोड़ देने तक की बात बोल दी। नुपूर को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। वो माँ बनने वाली है इसकी उसके भाईयों को कोई खुशी नहीं थी। उनको तो बस पैसा चाहिए। और माँ-बाप के जाने के बाद अगर लड़की के मायके में ऐसा कुछ भी हो तो ससुराल वालों को भी मौका मिल जाता है।
नुपूर की इस परेशानी में नुपूर का पति और उसकी दीदी ने उसका साथ दिया। दीदी ने बोला, “तू चिंता ना कर मै तेरी बड़ी बहन हूँ। बड़ी बहन भी माँ के समान होती हैं। मै पूरी कोशिश करूंगी नुपूर तू बिल्कुल भी घबराना नहीं”।
दीदी ने नुपूर को माता-पिता की कमी नहीं होने दी। भाइयों ने दबाव को भी नुपूर से दूर रखा। दीदी और पति के साथ और प्यार के सहारे उसने अपने दुःख को खुद से दूर कर दिया।
उसके भाईयों को भी एहसास हुआ कि उन्होंने गलत किया। पर नुपूर की दीदी ने ,दीदी के साथ-साथ माँ होने का भी फर्ज निभाया।

 

 

 

Pic Credit Super Sisiters

 

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा  लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं।अगर आप भी लिखने या पढ़ने के शौकीन हैं तो हमारे मंच का हिस्सा बनिये Log in to http://www.kalamanthan.in
लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

हमें फोलो करे Facebook

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

How to Teach Writing Skill to Toddlers?

Being into Early childhood education and parenting, I was always asked varied questions by young, anxious mothers. Apart from the initial hiccups of toilet training...

अंतर्द्वन्द

आज 'निशा 'का दिल जोर जोर से धड़क रहा था। न जाने कितना अंतर्द्वन्द मन में था ।"क्या मैं ग़लत तो नहीं कर रही ।"...

विश्व हृदय दिवस पर..❤️

"पिछले दिनों घर में पुताई के बाद परदे लगे तो एक खिड़की के परदे बहस का मुद्दा बन गए . हुआ ये कि उस...

Torchbearer

I could hear my phone ringing in the bedroom. I rushed to pick it up. It was Radha. Congratulations! You've been selected in UPSC! I was...

Recent Comments