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दीदी भी माँ के समान होती है

 

एक लड़की के लिए माता-पिता की क्या एहमियत है ये कोई नहीं समझ सकता है। माता-पिता जब तक होते है वो हमेशा ही अपनी बेटी को सम्हालते हैं। पर कभी ये सोचा है कि जब वो दुनिया से चले जाते है तो क्या होता है?
ये कहानी है नुपूर की।
नुपूर के दो भाई और एक बहन थे। नुपूर सबसे छोटी थी। सबकी लाडली। माता-पिता, भाई, बहन सबको उसी का खयाल होता। नुपूर के माता-पिता अपने जीते जी सबकी शादी कर दिए। सब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने लगे। पर किसी को क्या पता था कि वो सब छोड़ कर चले जायेंगे।
नुपूर की शादी के दो साल ही हुए थे कि अचानक नुपूर के पापा को ब्रेन हेमरेज हो गया और वो चल बसे। अचानक से सब बिखर सा गया। पर उसी समय नुपूर की माँ ने अपने दुःख को छुपाते हुए बोला,” मत परेशान हो तुम सब। तुम्हारी माँ तो जिन्दा है। क्या हुआ जो पापा चले गए।मै तुम सबको छोड़ कर नहीं जाउंगी”।
उन्होंने अपने आप को सम्भाला और बच्चों को भी। पर किसी को क्या पता था कि जो माँ सबको साहस दे रही थी वो कहीं न कहीं अपने दुःख को छुपा रही थी। इसी दुःख ने उनको भी जीने नहीं दिया और पापा के जाने के छः महीने बाद ही वो भी दुनिया से चल बसी।
नुपूर के माता-पिता दोनो इस दुनिया से दूर जा चुके थे। नुपूर की माँ जब बीमार थी तभी नुपूर माँ बनने वाली थी। पर ये उसे उनके जाने के बाद पता चला । सबको बहुत खुशी हुई कि उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ है नुपूर को। पर नुपूर हमेशा ही उदास रहती। डाक्टर ने बोला कि उसे अपना ध्यान देना होगा।
पर ख़ून के रिश्तों की सच्चाई तो अब सामने आने वाली थी। इधर नुपूर के परिवार वाले और उसका पति उसे खुश रखने की कोशिश में थे कि दूसरी तरफ एक दिन उसके भाई ने जायजात के कागज़ उसे भेज दिए। कयोंकि उनको वो अपने नाम करानी थी। उन्होंने नुपूर और उसकी दीदी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। नुपूर को अच्छे से पता था कि जो घर उसके माँ-पिता के मेहनत की कमाई है वो उसे बेचना चाहते हैं।
उसके भाईयों ने उससे रिश्ता तोड़ देने तक की बात बोल दी। नुपूर को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। वो माँ बनने वाली है इसकी उसके भाईयों को कोई खुशी नहीं थी। उनको तो बस पैसा चाहिए। और माँ-बाप के जाने के बाद अगर लड़की के मायके में ऐसा कुछ भी हो तो ससुराल वालों को भी मौका मिल जाता है।
नुपूर की इस परेशानी में नुपूर का पति और उसकी दीदी ने उसका साथ दिया। दीदी ने बोला, “तू चिंता ना कर मै तेरी बड़ी बहन हूँ। बड़ी बहन भी माँ के समान होती हैं। मै पूरी कोशिश करूंगी नुपूर तू बिल्कुल भी घबराना नहीं”।
दीदी ने नुपूर को माता-पिता की कमी नहीं होने दी। भाइयों ने दबाव को भी नुपूर से दूर रखा। दीदी और पति के साथ और प्यार के सहारे उसने अपने दुःख को खुद से दूर कर दिया।
उसके भाईयों को भी एहसास हुआ कि उन्होंने गलत किया। पर नुपूर की दीदी ने ,दीदी के साथ-साथ माँ होने का भी फर्ज निभाया।

 

 

 

Pic Credit Super Sisiters

 

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