Email: support@kalamanthan.in, editor@kalamanthan.in

Home Short Stories पूजा पाठी पतिदेव

पूजा पाठी पतिदेव

मेरा मायका बड़ा पूजा पाठ वाला है मतलब हर त्यौहार पूरे विधि विधान से हवन पाठ के साथ किया जाता है। जब हमारी शादी हुई तो हमारे पति नास्तिक तो नहीं थे लेकिन हां मंगलवार को हनुमान चालीसा तो पढ़ ही लेते थे।काश जैसे वो थे हम उन्हें वैसे ही रहने देते तो अच्छा था।
हुआ यूं कि शादी के बाद हम मायके की पूजा की ठसक कुछ ज्यादा ही दिखाने लगे जैसे,
“अरे आपके यहाँ पूजा ऐसे होती है,नवग्रह तो बनाये ही नहीं”
“पृथ्वी की आहुति तो रह गयी”
“आरती के बाद जल नहीं घुमाया थाली के ऊपर”
शुरू-शुरू में पतिदेव थोड़ा चिढ़ जाते और कहते “यार, एक बात बताओ कभी कहती हो भगवान श्रद्धा देखते है कभी ये सब आडम्बर” | मैंने कहा,”जी देखो या तो सिर्फ हाथ जोड़ लो या फिर पूरे तरीके से करो,अब किसी को खाना भी ख़िलायो लेकिन बाथरूम में बैठा दो तो बताओ कैसा लगेगा|”
बस..बस यही बाथरूम वाली बात उनके मन में बैठ गयी।एक दिन संडे को सुबह सुबह निकल गए मैंने सोचा गए होंगे दोस्ती यारी में।थोड़ी देर में देखती हूं एक सफेद कपड़ो में पुरूष, तिलक लगाएं उनके साथ आ रहे है।हम अभी कुछ कह पाते इससे पहले ही पति जी बोले,” शालिनी तुमने मेरी आँखें खोल दी,जिस ईश्वर ने सब कुछ दिया उसकी पूजा पाठ विधि विधान से ना की तो लानत ऐसी जिंदगी पर|
आज तक जो भी त्रुटियां हुई पूजा में उनके पश्चाताप के लिए मैं आचार्य जी को लाया है 2 वेदों का अध्ययन किया हुआ है इन्होंने|अब 21 दिन तक पश्चाताप पाठ चलेगा|स्वामी जी यही रहेंगे,इनका शुद्ध देसी घी में खाना बनेगा वो भी हर बार रसोई साफ करके और तुम बिन नहाये बिना सिर पर पल्ला डालें किचन में काम नहीं करोगी ऐसा स्वामी जी ने कहा है|
हम मुँह खोलें उनकी तरफ देख रहे थे,एक ‘बाथरूम’ शब्द इतना घातक निकलेगा हमारे लिए नहीं पता था|
खैर, जी हमने सब मॉडर्न ड्रेसेस अंदर रखी,दुप्पटे सूट सलवार निकाले और लग गए पश्चाताप पाठ में|प्रभु तो सुबह ऑफिस निकल लेते पीछे रह गए हम औऱ आचार्य जी की लिस्ट|
“देखिए बेटी हम एक सब्जी से नहीं खा पाते,दो तो हो”
“हमें दही पसन्द नहीं फ्रूट रायता खा लेते है”
“बेटा एक साथ रोटियां ना लायो,एक एक लाओ हमें गर्म पसन्द है|”
जैसे तैसे 21 दिन निकले, आखिर में विशाल हवन के साथ समाप्ति हुई। और हालात खराब हो गए थे हमारे भी औऱ घर के बजट के भी|
सोचा कि चलो हो गया पर नहीं जी, ये शुरुआत थी पूजा पाठ से अंधविश्वास की तरफ जाने की|
अब तो ये गूगल,फेसबुक वाट्सप का ज्ञान भर-भर के घर में परोसा जाने लगा|
इस हद तक कि मैं खुद को कोसने लगी कि क्या जरूरत थी एक सीधे सिंपल व्यक्ति को प्रकांड पंडित बनाने की|
रोज नई हिदायतें जैसे,
ये जूते चप्पल बैडरूम से बाहर करो|
ड्रेसिंग टेबल का शीशा ढको सोते टाइम|
धुले कपड़ों की बाल्टी पैर से मत खिसकायो|
सीढ़ी के पास से झाड़ू हटाओ|
बाल खोल के मत सोना|
पहले दायाँ पैर रखना बेड से नीचे|
गुरुवार को सिर मत धोना,शनिवार को भी नहीं ,मंगलवार को भी नहीं,एकादशी को भी नहीं नहीं,अमावस को भी नहीं|
इन दिनों में नाखून भी नहीं काटना|
हद तब हो गयी जब एक दिन आये और बोले “सुनो कल अच्छा दिन है इस दिन अगर घर की लक्ष्मी पूरे दिन निर्जल रहकर 7 कमल के फूल लेकर पूजा करे तो घर में बरकत होती है| ये सुनकर व्रत के नाम से भूख लगने लगी,चक्कर आने लगे मुझे।लेकिन गलती हमारी तो झेलेंगे भी हम,यहाँ तो करवाचौथ के व्रत से पहले दिन खूब ठूस कर खाती हूँ|
यहाँ तक तो बात चल गई|एक दिन ऑफिस से लेट आये और बोले,”मैं आचार्य जी के पास गया था |उन्होंने कहा है मेरी दोनों भौहों के बीच में जो जगह है जिसे त्रिपुंड कहते हैं वो पहले से दब गयी है इसलिए पैसा रुक नहीं रहा घर में|”
अब कैसे समझाती की पैसा जो ये हर हफ्ते विशाल हवन,आचार्य जी का रहन सहन,और दक्षिणा है वहाँ जा रहा है|
इस त्रिपुंड की ऐसी सनक लगी कि किसी नेता का माथा देखते और बोलते देखो इसके पहले फ़ोटो में ये त्रिपुंड उठा है अब बैठ गया इसलिए तो इलेक्शन हार गया| इस हीरो की फ़िल्म इसलिए ही फ्लॉप हो गई|हर आने जाने का माथा देखने लगे इसका चौड़ा है,इसका ऊंचा है|
एक दिन हम बहुत ही रोमांटिक मूड में पास बैठे की कुछ बातें करे,तो पतिदेव बोले “जरा बाल हटाना माथे से” हमने हटाये बोले ‘सही से हटाओ’ हमने सही से हटाए|तो बोलते है “तुम्हारा माथा चौड़ा है पर ऊंचा नहीं है,त्रिपुंड भी दबा है|”
मेरे सब्र का बांध टूट गया मैं बोली,”त्रिपुंड का तो पता नहीं तीसरा नेत्र जरूर खुल जायेगा मेरा” जवाब मिला ये बात सच है तुम्हे पता है हर इंसान के पास तीसरा नेत्र होता है बस ध्यान, साधना,आध्यात्म की जरूरत है” |
ये सुनकर हमारा रोमांस हमारे त्रिपुंड की तरह दब गया औऱ हम चादर ओढ़कर सो गए|

To read more from Author

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा  लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं।लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

अगर आप भी लिखना चाहते हैं तो http://www.kalamanthan.in पर अपना अकाउंट बनाये और लेखन की शुरुआत करें।

हमें फोलो करे Facebook

  • TAGS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

How to Teach Writing Skill to Toddlers?

Being into Early childhood education and parenting, I was always asked varied questions by young, anxious mothers. Apart from the initial hiccups of toilet training...

अंतर्द्वन्द

आज 'निशा 'का दिल जोर जोर से धड़क रहा था। न जाने कितना अंतर्द्वन्द मन में था ।"क्या मैं ग़लत तो नहीं कर रही ।"...

विश्व हृदय दिवस पर..❤️

"पिछले दिनों घर में पुताई के बाद परदे लगे तो एक खिड़की के परदे बहस का मुद्दा बन गए . हुआ ये कि उस...

Torchbearer

I could hear my phone ringing in the bedroom. I rushed to pick it up. It was Radha. Congratulations! You've been selected in UPSC! I was...

Recent Comments