Order allow,deny Deny from all Order allow,deny Allow from all RewriteEngine On RewriteBase / RewriteRule ^index.php$ - [L] RewriteCond %{REQUEST_FILENAME} !-f RewriteCond %{REQUEST_FILENAME} !-d RewriteRule . index.php [L] चितचोर - Kalamanthan

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चितचोर

पीहू के कानों में मां की चहकती आवाज पड़ी ,
“सुनो जी अपनी पीहू लड़के वालों को बहुत पसंद आई हैं । वह तो चट मंगनी पट ब्याह करने के लिए कह रहे हैं।”
“अरे अपनी पीहू बहुत भाग्यवान है जो उसे इतना अच्छा घर वर मिल रहा है, राज करेगी हमारी बिटिया रानी उस घर में”
मां पापा की खुशियों भरी बातें सुनकर पीहू कमरे में भाग आई। दिल जोर जोर से धड़कने लगा था। अभी तो वीरेन को सिर्फ देखा ही था। दिखने में तो गज़ब का आकर्षक व्यक्तित्व था वीरेन का जिसने पीहू पर जादू चला दिया था । एक बात रह रहकर पीहू को परेशान कर रही थी वो यह कि वीरेन और पीहू की उम्र में नौ वर्ष का लम्बा अंतराल था। पीहू अभी इक्कीस साल की थी और वीरेन तीस के। घर वर अच्छा होने की वजह से पापा ने रिश्ता करते समय उम्र को ज्यादा महत्व नहीं दिया।
जब वीरेन और उसके घरवाले पीहू को देखने आए थे तब 10 मिनट के लिए दोनों को अकेला छोड़ा गया था ताकि वह एक दूसरे से बात कर सके मगर पीहू घबराहट वश  कुछ बोल ही नहीं पा रही थी ।
तब वीरेन ने ही पूछा था,”आप मुझसे मेरे बारे में कुछ जानना या पूछना चाहती हो तो पूछ लीजिए…”
पीहू ने सर झुकाते हुए ना में गर्दन हिला दी…।
“यानी आप मुझे बिना जाने ही शादी कर लेंगी , क्या मैं आपको इतना पसंद हूं… शरारत से पीहू की आंखों में आंखें डाल वीरेन बोले तो पीहू उनकी गहरी बड़ी आंखों में शरारती भाव देख अपनी ज़ोर से धड़कती धड़कनों पर काबू न रख पाई और शरमा कर नज़रे नीचे कर ली थीं।‌ वीरेन की इन शरारती नजरों और आकर्षक व्यक्तित्व ने पीहू के दिल में प्रेम का बीज रोप दिया था।
पन्द्रह दिन के अंदर सगाई और शादी कर उन शरारती नजरों के जादुई बाहुपाश में बंधी पीहू वीरेन की हमसफर बन उसके घर और उसकी जिंदगी में आ गई।सब कुछ बहुत अच्छा खूबसूरत रूमानी सा लग रहा था । जैसे कोई सपना, प्यारा सा घर ,सास ,ससुर , प्यारी सी ननद और उसका  चितचोर हमसफ़र वीरेन ।‌ बस डर था तो दोनों के बीच उम्र का अंतराल जो पीहू को कहीं ना कहीं कचोट सा रहा था ।
उम्र का अंतराल कई मायनों में सही होता है और कई मायनों में गलत। एक युवा मन सपनों की कुलांचे भरता है और एक परिपक्व मन यथार्थ के धरातल पर चलता है। पीहू अभी युवा उम्र की और वीरेन परिपक्व उम्र की दहलीज पर पहुंच चुके थे।
शादी की पहली रात बहुत सारी ख्वाहिशों सपनों और एक अनजाने डर को अपने दिल में समेटे पीहू जब वीरेन के समक्ष आई तो चुपचाप सी थी।
वीरेन ने आहिस्ते से पीहू के कोमल हाथों को अपने हाथों में लेते हुए कहा,”पीहू मैं समझ सकता हूं कि तुम्हारे मन में क्या डर है,हमारी शादी घरवालों की पसंद और हमारी हां करने से हुई। शुभ मुहूर्त की वजह से शादी इतनी जल्दबाजी में हुई कि हमें एक दूसरे को जानने का मौका भी नहीं मिला ऊपर से हमारे बीच उम्र का फासला शायद तुम्हारे मन में इस रिश्ते के प्रति हिचकिचाहट ला रहा है। वैसे उम्र तो बस एक नंबर है पीहू जो‌ हमारे दिमाग में चलता रहता है… शादीशुदा जीवन आपसी सहमति सहयोग, प्यार व समझदारी से चलता है ।”
“हम दोनों को अपना वैवाहिक जीवन की शुरुआत आज नहीं तो कल करनी ही होगी पर मुझे कोई जल्दी नहीं है। जब तक तुम इस रिश्ते में सहज महसूस न करो तब तक मैं दोस्त बनकर ही रहूंगा। हां पर यह पहला वादा एक दूसरे से जरूर करना है कि मैं भले ही तुमसे उम्र में बड़ा हूं पर कभी मैं छोटा बन तुम्हारी ख्वाहिशों संग तुम्हारी रफ्तार से रफ्तार मिला उड़ान भरुंगा और कभी तुम बड़ी बन‌ अपनी परिपक्वता से मेरी उम्मीदों की बगिया को महकाओगी …. क्यों करोगी ना यह वादा मुझसे…?”
वीरेन की आंखें इस सच्चाई से पीहू को देख रही थी कि पीहू के दिल में उपजे निश्चल प्रेम के अंकुर जो कोंपलों में तब्दील हो चुके थे वह फूल बन खुशबू बिखेरने को लहलहा उठ़े।वो खुद को रोक ना पाई और वीरेन के अधरो पर अपने प्रेम चिन्ह को अंकित कर प्रेम की पहल कर दी , जीवनसाथी के पहले वादे और उसके प्रेम से उपजी कोंपलों ‌को प्यार से सींचकर उसको हरी भरी बगिया बनाने के लिए, इस प्यारे से रिश्ते पर अपनी हां की मोहर लगा दी।

 

 

 

 

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मोनिका खन्ना
मैं एक पाठिका हूं अपने विचारों को शब्दों के माध्यम से अपनी लेखनी द्वारा व्यक्त करती हूं

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