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आंखो की नमी से बहता काजल

आंखो की नमी से, बहता काजल
देखा है कभी ,दर्द का बादल !!
काजल के बहने से, होती वो हल चल
सासो के सिसकियां में , बदल जाने का वो पल
देखा है कभी , दर्द से भीगा आचल!!१!!
आंखो की नमी से, बहता काजल !!
आंखो में सागर सी , होती वो हल-चल
हल्के से उन लहरों के ,निकल जाने का वो पल
क्या देखा है कभी, दर्द का छलकता हुआ गागर !!२!!
आंखो की नमी से, बहता काजल !!
अपनों को समझ ,ना पाने का वो पल
उनके जाने पर ,यू मन भर जाने का डर
धड़कन के , सहम जाने का वो पल
देखा है कभी, दर्द का सागर !!३!!
आंखो की नमी से, बहता काजल
देखा है कभी ,दर्द का बादल !!

 

 

 

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा  लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं।लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

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