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वो बारिश।

       

इवनिंग शिफ्ट होने की वजह से डॉक्टर अजय दोपहर में अपने अस्पताल के लिए निकले थे।शहर की लाइब्रेरी की लाला बत्ती के पास गाड़ी रुकी और तभी उसने सिर उठा कर देखा। लाइब्रेरी की सीढ़ियों से उतरती हुई चली आ रही थी सफेद दुपट्टा लहराती एक परी। उसे भ्रम हुआ कि वह लाइब्रेरी से ही आ रही है या अभी-अभी आसमान से उतरी है। कोई इतना भी सुंदर होता है क्या!

         बेदाग चेहरे पर वो भीगी उलझी हुई लटें
          जैसे उजली सी चादर पर पड़ती सलवटें।

अभय के होंठों से बेखास्ता ये शेर निकल गया। बेमौसम की बारिश अचानक अच्छी लगने लगी। और ये क्या वो लड़की लिफ्ट के लिए इशारा कर रही थी । अभय ने ज्यों ही शीशा नीचे किया वो बोल पड़ी  “प्लीज़ मेडिकल कॉलेज के चौराहे तक छोड़ देंगे।”
अभय कुछ बोल पाता उससे पहले वो गाड़ी में बैठ गई थी। अभय ने हल्के से मुस्कुरा कर उसे देखा लेकिन ये क्या वो जल्दी जल्दी अपने आंसू पोंछने लगी और बोली
 “सोॅरी इमरजेंसी है, मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाना है।”
अभय चुप रहा और गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ा। आखिर उसकी मंजिल भी वहीं थी। वो रास्ता अचानक कुछ खूबसूरत लगने लगा।काश रास्ता कुछ लम्बा हो जाता।
अभय कनखियों से रह रह कर उसे देख रहा था लेकिन कुछ बोल नहीं पाया। इन चंद लम्हों में कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था वो लेकिन इससे पहले कुछ बोल पाता गाड़ी मेडिकल कॉलेज के गेट पर खड़ी थी।
                 
 “आपका बहुत बहुत धन्यवाद।”
वो बोली और जल्दी से नीचे उतर गई। अभय जब तक कुछ बोलता वो भीड़ में ओझल हो गई। ये क्या मैंने तो उसका नाम तलक नहीं पूछा।
थोड़े मायूस मन से उसने गाड़ी पार्किंग में खड़ी कर दी।अपना डाक्टर साहब वाला कोट बेमन से उठाया और अपने केबिन की दिशा में चलने लगा। वहां पहुंच कुर्सी पर बैठ अभी अभी गुजरे पलों के बारे में सोच बरबस मुस्करा दिया। तभी टेबल पर रखा फोन बजा। दूसरी ओर सीनियर नर्स शोभा थीं।
                     
“डा.अभय इमरजेंसी है । अगर आप अस्पताल पहुंच गए हों तो तुरंत ओप्रेशन थियेटर पहुंचिए।”
रिसीवर रख अभय लम्बे लम्बे डग भरते ओप्रेशन थियेटर की ओर बढ़ा।ओप्रेशन थियेटर के बाहर एक संभ्रांत महिला बेहद परेशान सी बैठी थी। अरे ।
“आप घबराए नहीं सब ठीक हो जाएगा।”
बस इतना बोल कर अभय ओप्रेशन थियेटर में घुस गया। अंदर ओप्रेशन शुरू हो गया था। लगभग तीन घंटे बाद वो बाहर आया तो देखा वो महिला वैसे ही परेशान सी बैठी थी। अभय मुस्कुरा कर बोला
“एवरीथिंग इज फाइन”।आप परेशान न हों पेशेंट ठीक-ठाक है।”
उस महिला के चेहरे पर राहत दिखाई दी। अभय वापस अपने केबिन की ओर चल दिया।
सुबह की सारी घटना अभय लगभग भूल चुका था। बाकी का दिन वार्ड में बाकी पेशेंट को देखने बाकी दूसरे कामों में निकल गया।घर जाने के पहले अपने पेशेंट को देखने चल दिया। तभी सीनियर नर्स शोभा आती दिखाई दीं। अभय सर
“नाइट शिफ्ट के डाक्टर अचानक इमरजेंसी में शहर के बाहर गए हैं इसलिए नाइट शिफ्ट आपको करनी पड़ेगी।”
बेहद थके होने के बावजूद अभय ने सर हिला कर अपनी सहमति जताई और पेशेंट को चैक करने लगा और फिर नर्स को ज़रुरी हिदायत दे आई सी यू के पास वाले केबिन में आकर बैठ गया।

दिन भर काफी व्यस्त  था | इंटरकॉम से केन्टीन में फोन लगाया और एक काफी और सैन्डविच का आर्डर दिया।धीरे धीरे अस्पताल में सन्नाटा बढ़ रहा था।

अभय ने नर्स को फोन कर पेशेंट की ताज़ा जानकारी ली।सब कुछ ठीक ठाक है ये जानकर वो निश्चिंत हो गया।तब तक केन्टींन  से उसका खाना आ चुका था।गरमागरम काफ़ी और सैन्डविच ने उसे अहसास कराया  की उसे बहुत भूख लगी थी। अभय काफी खत्म कर पास पड़े छोटे से सोफे पर पैर फैलाकर बैठ गया।
दिन भर में कुछ ज्यादा ही थकान हो गई थी। अभय को झपकी लग गई।अचानक अभय को लगा कोई उसे आवाज़ दे रहा है। उसकी आंखें ज्यों खुली वो हड़बड़ा कर उठ खड़ा हुआ। वो सिग्नल किनारे मिली लड़की उसके सामने खड़ी थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था तभी वो लड़की बोली
       
“सर , पापा को ज्यादा दर्द हो रहा है। प्लीज़ चलकर देख लीजिए।”
अभय कुछ सोच पाता इससे पहले वो दोबारा बोली सर । जी हां। चलिए।अभय तुरंत आई सी यू वार्ड में पहुंचा। मरीज़ को देखकर नर्स को जरुरी हिदायत दी।आधे घंटे तक अभय मरीज़ के पास बैठा रहा।वो लड़की इस बीच कभी केबिन के अंदर आती कभी धीरे से बाहर चली जाती। मरीज को आराम मिल चुका था और वो गहरी नींद में सो गया था।
  ज्यों अभय बाहर आया देखा वो लड़की सुबह वाली महिला के साथ खड़ी थी। अभय को देखते ही वो महिला बोली 
“धन्यवाद डाक्टर ,  “अब कैसे हैं मेरे पति?”
“जी बिल्कुल ठीक हैं।” अभय मुस्कुरा दिया।
उस महिला ने थोड़ा निश्चिंत होकर कहा “मेरा बेटा भी डाक्टर है लेकिन दिल्ली में रहता है ,सुबह तक आ जाएगा और  ये मेरी बेटी है  रश्मी, इसी शहर के दूसरे कालेज में मेडिकल के दूसरे वर्ष की छात्रा है।“अभय ने रश्मी को ध्यान से देखा और मुस्कुरा कर वापस चल दिया। रश्मि उसे जाते देख बोली
“एक बार और आपका धन्यवाद। मां, जब मैं आ रही थी मेरी स्कूटी रास्ते में खराब हो गई थी ।उस बारिश में इन्ही से लिफ्ट लेकर अस्पताल पहुंची थी।
अगले दिन सुबह अभय अपने घर लौट कर आया। कुछ देर आराम करने के बाद तैयार हो अस्पताल के लिए निकलने वाला था की उसकी मां पूछ बैठी।”अरे रात की शिफ्ट के बाद आज छुट्टी नहीं है , आज शाम लड़की से मिलना था। तेरी शादी की बात चलाई है। अभय ने इंकार कर दिया बोला  मां आज नहीं।”
अभय वापस अस्पताल पहुंच गया।आई सी यू वार्ड में पहुंचा तो देखा मरीज़ पूरी तरह होश में थे। रश्मि की मां ने उसका परिचय करवाया। सब कुछ ठीक था लेकिन अभय की नज़रें रश्मी को ढूंढ रहीं थीं, पता चला वो  किसी काम से बाहर गयी है।अभय मायूस सा वापस निकला तभी उसका क्लासमेट रोहन आता दिखाई दिया।रोहन ने बताया उसके पिताजी वहीं अस्पताल में हैं |अभय को तभी पता लगा कि उसके मरीज रोहन के पिताजी हैं। रोहन ने उसे धन्यवाद कहा तो अभय बोला , “ये मेरा फर्ज है”।
                 
 अभय खुशी-खुशी घर लौटा तो देखा उसकी मां थोड़ी परेशान सी बैठी थी। अभय ने जानना चाहा तो वो बोलीं जिस लड़की से मिलना था अचानक उसके पिताजी की तबीयत खराब हो गई है। अभय ने कहा कोई बात नहीं फिर कभी। उसकी मां ने कहा
“तेरी टेबल पर तस्वीर रखी है एक नज़र देख ले। किसी और दिन मिलने चलेंगे।तुझे तो कोई खुद पसंद आएगी नहीं , मैं ही ढूंढ कर लाऊंगी अपनी बहू।”
अभय मन ही मन मुस्कुराता अपने कमरे में पहुंचा। ये क्या टेबल पर रश्मि की तस्वीर रखी थी।अभय की खुशी का ठिकाना न रहा। मां के पास पहुंच कर उसने कल से हो रही सारी बातें अपनी मां को बताई।
 मां समझ गई अभय को रश्मी बेहद पसंद है , वो तुरंत तैयार हो अभय के साथ अस्पताल पहुंच गई। रश्मि के पिता को प्राइवेट रुम में भेज दिया था।अभय अपनी मां के साथ पहुंचा तब तक रश्मी रोहन उनकी मां सब इकठ्ठा कमरे में आ गये।अभय की मां रश्मि को देख बेहद खुश हुईं।
उन्होंने सारी घटनाएं सिलसिले में बताईं कैसे वो लोग आज आपस में शादी की बात चलाने के लिए मिलने वाले थे। तभी रश्मि की मां ने फोन कर अपने पति के बीमार होने की जानकारी दी। लेकिन आज ईश्वर अभय और रश्मी को मिलाना चाहता था लेकिन दूसरे तरीके से।
रश्मि अभय को देख रही थी तभी अभय की मां बोलीं “हम अपनी बहू दो साल के बाद ले जाएंगे जब रश्मि की मेडिकल की पढ़ाई पूरी हो जाएगी।अभय की एम डी की पढ़ाई भी तब तक पूरी हो जाएगी।”
                   
पलक झपकते दो साल बीत गए इस बीच अभय और रश्मी को एक दूसरे को जानने का मौका मिल गया था। अभय ने अपने प्रिय दोस्त रोहन की बहन रश्मि से विवाह कर लिया।जब कभी अभय और रश्मी बरसात में उस लाल सिग्नल पर पहुंचते हैं जहां उनकी पहली मुलाकात हुई थी। बरबस मुस्कुरा देते हैं आखिर वो खूबसूरत वाकया कैसे भूल सकते हैं जिसने उन्हें हमेशा के लिए एक कर दिया था।

 

 

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Kiran Shukla
मैं किरण शुक्ला एक गृहणी हूं। मैं नवाबों के शहर लखनऊ की रहनेवाली हूं। थोड़ा बहुत लिखने का शौक पहले से था लेकिन जिंदगी की व्यस्तताओं मे ये शौक ज़रा पीछे छूट सा गया था। कला मंथन मंच की आभारी हूं जिसकी वजह से मैंने नए सिरे से अपने शौक को वक्त देना शुरू किया है। सही मायने मे नवलेखिका हूँ जो शायद आजकल की पीढ़ी के लिए लिखने का प्रयास कर रही हूं। उम्मीद करती पढ़ने वालों की अपेक्षा पर खरी उतरूं।

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