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अंतर्द्वन्द

आज ‘निशा ‘का दिल जोर जोर से धड़क रहा था।
न जाने कितना अंतर्द्वन्द मन में था ।”क्या मैं ग़लत तो नहीं कर रही ।” कितने ही सवाल मन में थे ।आज वह मिलने जा रही थी , अकेले ।

वरूण से उसकी दोस्ती अभी कुछ दिन पहले ही हुई थी। परन्तु निशा को उसका साथ बहुत अच्छा लगने लगा था ।वह निशा को महत्व देता था ।उसकी बातें सुनता था । ऐसे दोस्त की निशा को बहुत जरूरत थी । निशा का अकेलापन कुछ दूर होने लगा था। धीरे धीरे वरूण और निशा और करीब आ गए ।

निशा ने वरूण को सब बता दिया । निशा का विवाह ‘अविनाश”से बारह वर्ष पहले हुआ था । अविनाश का अपना व्यवसाय था। शुरू शुरू में तो सब कुछ बहुत ठीक चलता रहा ।दोनों बड़े प्यार से रहते थे। उनके दो बच्चे भी थे ।एक बेटा और एक बेटी। निशा अपने परिवार को संभालने में व्यस्त हो गई।

अविनाश का व्यवसाय की वजह से बाहर आता-जाता था ।एक दिन अचानक निशा को पता चला कि अविनाश किसी लड़की के साथ बहुत घूमता फिरता हैं। उसने खुलकर अविनाश से बात की अविनाश ने कहा मैं उसे बहुत प्यार करता हूं, मैं उसे नहीं छोड़ सकता और ना ही मैं अपने बच्चों को छोड़ सकता हूं, तुम्हें इसी तरह रहना पड़ेगा।निशा मान गई क्योंकि वह बच्चों के कैरियर से खिलवाड़ नहीं कर सकती थी ।

परिवार टूटने का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर ही पड़ता है इसलिए वह साथ रहने को तैयार हो गई। पर वह अंदर ही अंदर उसका दम घुटने लगा था। उसने नौकरी ज्वाइन कर ली‌। उसी नौकरी पर उसकी वरुण से मुलाकात हुई थी।
वह अभी तक समझ नहीं पाई थी कि वह इस प्रकार क्यों रह रही है जिस रिश्ते में विश्वास ही नहीं है।वह वरुण की तरफ खींचती जा रही थी। उसने यह बात वरुण को बताई कि वह उसे बहुत प्यार करने लगी है ।

वरुण को भी निशा बहुत पसंद थी। वरुण ने बताया कि उसकी पत्नी का स्वर्गवास हो चुका हैं। उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया था । तब से वह अकेला रहता हैं। निशा से मिलकर वरूण को भी बहुत अच्छा लगने लगा हैं। धीरे धीरे घनिष्ठता और बढ़ाने लगी।

दोनों ने एक होटल के कमरे में मिलना तय किया। निशा बहुत घबराई हुई थी कि पता नहीं वह सही कर रही हैं या गलत। परंतु अविनाश के बारे में सोच कर उसका मन गुस्से से भर जाता था । उसने होटल जाने का फैसला किया।
वरुण जब होटल पर पहुँचा तो ,वहां पर निशा नहीं थी। उसे बिस्तर पर रखा हुआ,एक खत मिला। जिसमें लिखा था

“प्रिय वरुण,
मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकती ,क्योंकि अभी मैं अपने पति के साथ रह रही हूं। मैं वह नहीं कर सकती जो अविनाश ने मेरे साथ किया। अगर मैं उसे छोड़ती हूँ तो मेरा परिवार टूट जायेगा ।जिसका असर बच्चों पर बहुत गहरा आएगा। बच्चों को अपने पिता की सख्त जरूरत है। मैं बच्चों को इन सब से दूर रखना चाहती हूं ।इसलिए मैं तुम्हें हमेशा के लिए छोड़ जा रही हूँ ।मैं तुम्हें बहुत ज्यादा बहुत प्यार करती हूँ, पर हम इस जन्म में तो कभी नहीं मिल सकते। पर मैं वादा करती हूँ “मैं तुम्हें फिर मिलूंगी, कहाँ और कैसे मैं नहीं जानती”।
तुम्हारी निशा

 

 

 

Pic Credit :Canva

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