Email: support@kalamanthan.in, editor@kalamanthan.in

Home Writing Contest यकीन

यकीन

मौसम अपने पूरे शबाब पर था..कोयलों की कूक, ठंडी मदमस्त हवा, आसमान में बादलों की बदलती आकृतियां, हर तरफ़ हरियाली…

मोहिनी और आकाश पूरे ढाई साल बाद एक दूसरे मिले थे। मोहिनी को फिर से अपने पास देख आकाश की खुशी का ठिकाना ही नहीं था। और एक के बाद एक शायरी अपनी मोहिनी के लिए गाता जा रहा था –

” अब तो बहारों ने भी रंग बिखेरा है
ऐ मेरे महबूब तुझसे ही मेरी शाम और सवेरा है।”
………………………………………………………………

तालाब के किनारे बैठे बैठे कब शाम ढलने लगी पता ही नहीं चला…
मोहिनी – आकाश, आज तुम्हारी बात मैंने मान ली है पर आगे कभी मुझसे मिलने की ज़िद मत करना। मुझे डर है कोई हमें इस तरह न देख ले!
आकाश – देख ले तो देख लेने दो, मुझे किसी का डर नहीं, बहुत मोहब्बत करता हूं तुमसे…
मोहिनी – जनाब, ये तो मैं तब भी सुनती थी जब हम साथ में कॉलेज में पढ़ते थे। फिर क्यों चले गए थे विदेश बिना बताए?
आकाश – मोहिनी मुझे माफ़ कर दो! मैं तुम्हारा गुनहगार हूं, जो भी सजा दोगी मुझे मंजूर है। मां बाप ने आनन फानन में मुझे विदेश में उच्च शिक्षा दिलाने का फैसला लिया और सब  कुछ इतनी जल्दी में हुआ कि मैं तुम्हें कुछ भी बता ही नहीं पाया। पर अब तो मैं वापस आ गया हूं अब भी तुम मुझसे नाराज़ हो?
मोहिनी – बात नाराज़ होने की नहीं है। तब वक़्त कुछ और था, पर अब सब कुछ अलग है। मैं, अब किसी की ब्याता हूं, मुझ पर जिम्मेदारियां हैं। राणा की पत्नी होने के साथ मैं इस गांव की सरपंच भी हूं।
आकाश – अच्छा! तो सरपंच मोहतरमा क्या सोचा है आपने हमारे बारे में? कल ही पंचायत बुला लेता हूं, पूरे गांव के सामने अपने प्यार का इज़हार कर देता हूं… तुम सरपंच हो फैसला तो हमारे ही हक में होगा ना?!!!
मोहिनी – बहुत देर हो गई है हमें अब लौटना चाहिए और हां! अब हम नहीं मिलेंगे, कहकर मोहिनी घर की तरफ मुड़ जाती है।
वैसे मोहिनी गांव के मुआयने के लिए घर से निकलती रहती थी पर इस बार मुआयने के लिए नहीं बल्कि अपने पुराने प्यार से मिलने के लिए अाई थी।
मोहिनी मध्य प्रदेश के भोपाल शहर की रहने वाली, अपने मां बाप की इकलौती संतान थी।
बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में होशियार मोहिनी ने कॉलेज में अपना सिक्का जमा रखा था। आकाश भी उसी कॉलेज में पढ़ने आया।
आकाश की एक छोटी बहन( रिंकू) भी थी और वह भी उसी कॉलेज में थी। स्वभाव से तेज़ रिंकू का पढ़ाई लिखाई से दूर दूर तक पर कोई वास्ता नहीं था।
रिंकू ने कॉलेज में दाखिला लेते ही काफी सारे दोस्त बना लिए थे और जब तब क्लासेज बंक करके कभी कैंटीन में तो कभी कॉलेज के बाहर लड़के लड़कियों के साथ  गुल छर्रे उड़ाती फिरती थी।
आकाश और मोहिनी एक बार कॉलेज फेस्ट में एक दूसरे से मिले और धीरे धीरे दोनों की दोस्ती गहराती गई।
मोहिनी, रिंकू से भी मिली पर वो रिंकू को और उसके गैंग को पहले ही से जानती थी। पर चूंकि वो आकाश की बहन थी मोहिनी आकाश से रिंकू के में बारे ज्यादा कुछ नहीं बोली।
एक दिन कॉलेज की लैब में पढ़ते वक्त मोहिनी ने रिंकू को एक लड़के के साथ संदिग्ध हालत में देखा और ये बात आकाश को बताई जिससे रिंकू के मन में मोहिनी के लिए नफरत पैदा होने लगी और उसने मोहिनी और आकाश के बारे में  घरवालों के कान भरने शुरू कर दिए।
एक ही बेटा, कहीं हाथ से न निकल जाए मां बाप ने उसे बाकी की पढ़ाई करने के लिए विदेश भेज दिया।
आकाश के अचानक कॉलेज में न दिखने से मोहिनी परेशान हो गई थी उसने जाकर जब रिंकू से पूछा तो रिंकू ने उसका सबके सामने बहुत मजाक उड़ाया और बोली कि ..” अरे! भैया ने नहीं बताया कि वो आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाएंगे? पर हम सबको तो पहले से ही पता था।”
हाहाहाहहा!!!!!!!!!
रिंकू और उसका गैंग जोर जोर से हंसकर मोहिनी का परिहास उड़ा रहा था..
रिंकू से जब आकाश के विदेश चले जाने के बारे में सुना तो मोहिनी को यकीन ही नहीं हुआ कि आकाश ऐसे उसे बिना बताए ही विदेश चला जाएगा।
मन ही मन खुद से बुदबुदाती मोहिनी…..!!!!!!!
मैं तुम्हें फिर जरूर मिलूंगी आकाश कब और कहां मैं भी नहीं जानती…. पर इतना जरूर जानती हूं कि तब तक बहुत देर हो चुकी होगी….!!!!!!!
पढ़ाई पूरी होने के बाद मां बाप ने भोपाल के पास रीवा गांव के जमींदार के बेटे से मोहिनी की शादी कर दी। अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी से मोहिनी बहुत खुश थी और पति राणा उसे बहुत प्यार भी करते थे।
धीरे धीरे मोहिनी अपनी प्रतिभा से गांव की सरपंच भी बन गई थी।
एक दिन अचानक उसे एक अपरिचित नंबर से फोन आया…..!!!! पहली बार में ही वो आकाश की आवाज़ को पहचान गई।
पर उसने आकाश से ज्यादा परिचय बढ़ाना ठीक नहीं समझा और हर बार अपनी व्यस्तता का बहाना देकर फोन रख देती थी।
एक दिन आकाश ने उसे कैसे भी करके मिलने के लिए मना ही लिया।
घर पहुंचने में देर हो गई तो पति राणा के पूछने पर बताया कि वो मुआयने के लिए तालाब तक निकल गई थी।
इधर आकाश मोहिनी को भुलाने की बहुत कोशिश कर रहा था पर हर बार मोहिनी की यादें उस पर हावी हो रही थीं। मां बाप ने कई रिश्ते आकाश को बताए पर उसे कुछ समझ नहीं आता था। बहन रिंकू ने भी मोहिनी को भुलाने के लिए कई बार आकाश को बोला, पर उसने उसकी भी नहीं सुनी….
कुछ जुनून सा आकाश पर सवार हो गया था। जब से उसने मोहिनी के पति राणा को देखा था तब से उसमें कुछ ईर्ष्या की भावना विकसित हो गई थी।
उसने मोहिनी को मेसेज भेजना भी शुरू कर दिया था मोहिनी के मना करने के बावजूद।
एक दिन आकाश खुद को मोहिनी का रिश्तेदार बताकर उसके ससुराल पहुंच जाता है वहां राणा उसका खूब आदर सत्कार करता है और अपने कमरे में ले आता है।
दरवाजा बंद करके, राणा उसे आकाश कहकर बुलाता है.. मोहिनी और आकाश सकपका जाते हैं।
फिर राणा मोहिनी की तरफ देखकर उसे बोलता है कि वो उन दोनों के बारे में उस ही दिन जान गया था जब मोहिनी मुआयने के लिए कहकर बाहर गई थी और राणा को कुछ जरूरी कागज़ात पर उसके हस्ताक्षर चाहिए थे, उसे ढूंढ़ते हुए वो तालाब पहुँचा और वहां उसने इन दोनों को साथ देख लिया था।
पर उसके और गांव के प्रति मोहिनी की ईमानदारी ने उसे यकीन दिला दिया था कि ये लव स्टोरी अब एक तरफा रह गई थी।
  • राणा की बातें सुनकर मोहिनी निश्चिंत हुई और आकाश शर्म और ग्लानि से पानी पानी हो गया…
    मोहिनी और राणा से माफ़ी मांगकर और भविष्य में दोबारा उनकी ज़िंदगी में दखल न करने का वादा करके आकाश वहां से निकल जाता है।

Pic Credit Movie – Kabhi Alvida Na Kehna

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

अत्याचार के ख़िलाफ़ कदम

सीमा एक बहुत ही सीधी,प्रतिभाशाली और सुंदर लड़की थी।उसके पिता जी रमेश शहर के किसी ऑफ़िस में गार्ड की नौकरी करते थे।सीमा तीन भाई...

मेरा अपना खुद का घर

मैं....मैं हूँ, यह मेरा वजूद है!किसने दिया तुमको यह हक, कि तुम खुद को मेरा भगवान समझ बैठे। रिश्ते में बंधी थी जीवनसंगिनी थी, बराबर का...

औरत के सपने

एक औरत के सपने जो औरत ने कभी देखे ही नहीं अपने लिए, विरासत में मिले सपने मुझे मां से मां को अपनी मां से बचपन से बताया...

ममता की आस

  चंदा है तू , मेरा सूरज है तू बंगले के बगल के मोड़पर पान की दुकान पर रेडियों पर गाना बज रहा था।यूँ तो श्यामा...

Recent Comments