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अत्याचार के ख़िलाफ़ कदम

सीमा एक बहुत ही सीधी,प्रतिभाशाली और सुंदर लड़की थी।उसके पिता जी रमेश शहर के किसी ऑफ़िस में गार्ड की नौकरी करते थे।सीमा तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी थी।माँ का देहांत हो चुका था।सीमा बारहवीं पास थीं।उससे छोटा भाई जो स्नातक कर रहा था औरसबसे छोटी बहन अभी बारवीं में आयी थी।
सीमा मजबूरी के कारण आगे नहीं पढ़ पाई,लेकिन अपने भाई बहन के सपने नहीं टूटने देना चाहती थी।रमेश जी सीमा की शादी के लियेलड़का देख रहे थे पर सीमा ने कुछ समय के लिए मना कर दिया था शादी के लिए।वो पिता जी का साथ देने के लिए कमाना चाहती थी।उसने अपने पिता जी को अपनी इच्छा बतायी पर रमेश जी इस बात के लिए तैयार नहीं हुए उन्हें समाज में हो रहे अपराधों से डर था कहींकोई ऊँच नीच ना हो जाये।पर अख़बार में रमेश जी के ऑफ़िस से थोड़ी दूर एक ऑफ़िस में जॉब निकली।सीमा ने पिता जी से अनुमतिली और साक्षात्कार के लिए निकली पर रास्ते में ऑटो ख़राब होने के कारण उसे विलम्ब हो गया।
सीमा हड़बड़ाती ऑफ़िस में पहुँची और रिसेप्शन पर कोई पुरूष बैठा था उसके बराबर में बैठी कोई उम्रदराज महिला जिसका नाम रानी था को अपने डॉक्युमेंट देकर आगे बढ़ाने के लिए कहते हुए बताया कि वह साक्षात्कार के लिए आयी है.तो रानी ने बताया साक्षात्कार मेंफ़ाइल सबमिट का समय समाप्त हो गया है
    रानी से सीमा ने थोडी विनती की कि उसे एक बार बॉस से मिलने दीजिए ये जॉब उसके लिए बहुत ज़रूरी है।पर रानी ने उसे कहा अब साहब लंच के समय ही मिल पाएँगे और उसे जाने का इशारा किया।
सीमा ने दुबारा विनती की परउसने इस बार ऊपर से नीचे तक घूरा और कहा एक बार में समझ में क्यू नहीं आता?बताया नाअभी और इंतेज़ार करना पड़ेगा साहब बिज़ी है बहुत जल्दी में हो तो जाओ।कल आना रिसेप्शन पर बैठी उस बूढ़ी खड़ूस औरतने इस बार सचमुच बेज्जती की थी।
     सीमा रुआँसी हो गई तो रानी ने उसे बैठने को कहा और पानी पीने को कहा।सीमा रोते रोते रानी से कहने लगी मेरी माँ नहीं हैं भाईबहन छोटे हैं कहकर अपनी सारी बात रानी को बतायी।रानी ने सीमा के दर्द को समझा और बताया कि वो यहाँ से चली जाये माँ के समान दर्जे से तुम्हें कह रही हूँ।
      सीमा ने उस से पूछा ऐसा क्यूँ कह रही हैं तो रानी ने कोई जवाब ना दिया पर सीमा ज़िद्द पर अड़ी थी तो रानी ने भी उसे बैठे रहने की इजाज़त दे दी।पर कुछ समय बाद जब अपनी हमउम्र लड़की जो कि लग भी निम्नतम परिवार की रही थी को बाहर आँखों में आँसू लिए आते देखा तो सीमा को समझ नहीं आया उसने बूढ़ी औरत से पूछा तो रानी ने सीमा को वाशरूम में ले जाकर बताया कि नया मैनेजरअंदर साक्षात्कार के नाम पर शोषण करता है जिसे कोई नहीं रोक पा रहा और ऐसे ही मजबूर लड़कियों को झाँसा दिया जाता है पर ये बात किसी को बताये की मैंने इस मैनेजर के बारे में तुम्हें कुछ बताया है क्यूँकि मेरी नौकरी ही मेरा सहारा है और कोई नहीं है मेरा इस दुनिया में।सीमा मन ही मन उस बूढ़ी औरत रानी को धन्यवाद देती हुई वहाँ से चली गयी।
  पर सीमा ने ठान लिया था उस ऑफ़िस में होने वाले कारनामे को दुनिया के सामने उजागर करने का वरना कल को उसकी बहन या कोईअन्य लड़की की ज़िंदगी बर्बाद होती रहेगी।कुछ समय बाद फिर उसने अख़बार में उसी जॉब का विज्ञापन देखा और उसे रणनीति बनाते देर ना लगी।
वह फिर साक्षात्कार के लिए गयी और बूढ़ी औरत को बहुत आश्चर्य हुआ इतना कहने के बाद भी सीमा वापस आयी है।पर इस बार सीमा अंदर कमरे तक पहुँची और कुछ ही समय में पुलिस भी वहाँ पहुँच गयी और सीमा के साथ कुछ भी होने से पहले मैनेजरको दबोच लिया और वहाँ रखे फ़ोन को ज़ब्त कर लिया जिसमें लड़कियों के अश्लील चित्र चलचित्र थे।पुलिस मैनेजर को अपने साथले गई।
सीमा को कमरे से बाहर आने के बाद सभी उसे गर्व की निगाहों से देख रहे थे और रानी पीछे खड़ी एक माँ की तरह आशीर्वाद देरही थी।
सीमा ने भी उस ममता रूपी बूढ़ी औरत को माँ के समान समझ उसकी ख़ुशी में खुश होते हुए वहाँ से विदा ली और होने वाले अत्याचार को समाप्त करने में कदम बढ़ाया।
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