Email: support@kalamanthan.in, editor@kalamanthan.in

Home Blogs नवंबर कहानी लेखन

नवंबर कहानी लेखन

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ?
क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ?

अगर हाँ तो हम आपके लिए शुरू कर रहें हैं हर माह की लेखन प्रतियोगिता।
नई बदलती दुनिया को अपनी निगाह से देखें और शब्दों में ढालें।
हम आपके लिए लेकर आए हैं नवंबर माह की कहानी लेखन प्रतियोगिता । प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु नियम इस प्रकार हैँ :
1. यहाँ हम आपको एक पंक्ति दे रहें हैं , आपकी कहानी में इस पंक्ति का प्रयुक्त होना अनिवार्य है अर्थात् आपकी कहानी में यह पंक्ति होनी ही चाहिए|
2. आपकी कहानी मौलिक, अप्रकाशित व अप्रसारित होनी चाहिए ।
3. कहानी निम्नतम 500 तथा अधिकतम 2500 शब्दों की होनी चाहिए अर्थात् आपकी कहानी (500-2500) शब्दों की हो ।
4. कहानियाँ भेजने की अंतिम तिथि 25 /11 /2020 (25 नवंबर 2020) है
5. कहानियाँ किसी भी विषय पर हो सकती हैं (प्रेम, काल्पनिक,हॉरर,वात्सल्य,रहस्य, रोमांच, हास्य इत्यादि)
6. आप अधिकतम दो कहानियाँ भेज सकते हैं ।
7. पुरस्कृत रचना को समूह की ओर से अमेज़न गिफ़्ट वाउचर प्रदान किये जायेंगे।
8. एडिटिंग टीम कहानी के नाम व कुछ महीन त्रुटियां ठीक करने या बदलने का अधिकार रखती है।

नवंबर महीने की कहानी के लिए दी गयी पंक्तियां हैं

“सुनिए ये एड्रेस बता सकेंगी। एक अजनबी की आवाज़ आयी और गेट खोलते हुए ही उसने पीछे मुड़ कर देखा।”

इस पंक्तियों को अपनी कहानी में अपने तरीके से प्रयोग करें।

कहानी को कलामंथन की वेबसाइट पर डालें और #नवंबर_लेखन_प्रतियोगिता डालना न भूले।

आखिरी तारीख है कहानियाँ भेजने की अंतिम तिथि 25 /11 /2020 (25 नवंबर 2020) है

अत: आप सभी से अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में प्रतियोगिता में भाग लेकर इसे सफल बनाएँ

साथ ही अपने परिचित रचनाकारों भी इस आयोजन से जोड़ें ।

अपने लेखन को दीजिये कल्पना की उड़ान

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं। लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।
हमें फोलो करे Facebook

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

सुजीत सरकार की नायिकाएं

सुजीत सरकार की फ़िल्में कई मायनों में एक ताजगी लिए होती हैं| उनकी फिल्मों की पटकथाओं के साथ ही, उनके किरदार भी लम्बे समय...

यह कैसी सज़ा ?

"आह! पानी...पानी...कोई पानी पिला दो।" कराहते हुए दीपू ने अपनी अधमुँदी आँखें खोलकर इधर- उधर देखा। पपड़ाए सूजे हुए होठों पर ,जीभ फिराकर उन्हें गीला...

ये मोह मोह के धागे

"अरे! बेटा रूही इतना घबराओ मत, कल तुम्हें हमारे घर बहू बन कर आना है कोई गुलाम बन कर नहीं"। यह बोल कर सुमन...

फैमिली ट्रिप

  बाण गंगा को पीछे छोड़े अभी आधा घण्टा ही हुआ था कि माताजी ने ऐलान किया कि भईया उनसे न हो पाएगा। बहुत विचार...

Recent Comments