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किसान

जिस देश में अन्नदाता का अपमान हो,

ड्रग्स की पुड़िया की चर्चा पर घमासान हो,

अन्नदाता के संघर्ष पर किसी का ना ध्यान हो,

बेवजह की खबरों पर टीवी वाले खींचते ध्यान हो,

नेता सोएं आराम से,सड़क पर अन्नदाता परेशान हो,

अंत निकट है उस देश का, सुनलो लगा के कान हो,

जिसने पेट भरा,आज उसका दिल भर आया है;

इन नेताओं ने उसे भूखे पेट सुलाया है,

ठंड की सर्द रातों में;सड़को पर पानी बरसाया है,

जय जवान जय किसान वाले देश में,

जवान और किसान को भिडवाया है,

सोच लो अंत निकट आया है।

 

 

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं। लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

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Anita Bhardwaj
A special educator by profession. A reader,learner,writter, crafter . Love to learn something new.

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