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रूह को छुए वही प्यार है

सुबह जैसे ही मेहुल की नींद खुली देखा घड़ी में दस बज गये।उसे आश्चर्य हुआ आज मम्मी ने उसे कैसे इतनी देर तक सोने दिया। माहौल इतना शांत कैसे?….अपने मन-विचारों में उलझी हुई वह रसोई घर में जा पहुँची। पर ये क्या?….रसोई में से भीनी-भीनी खुशबू आ रही थी।
“क्या बात है मम्मी आज घर में कोई पार्टी है क्या?… उसकी आवाज सुन शालिनी जी बोली- “उठ गई लाड़ो!..हाँ…आज लंच पर तेरे पापा की जिगरी दोस्त अतुल जी सपरिवार आ रहे है तुझे देखने!”
अंतिम शब्द कानों में पड़ते ही मेहुल को दिन में तारे नजर आने लगे।
खुद को संभालते हुए बोली-“अरे मम्मी एकदम से,आपने मुझे पहले बताया क्यों नही!..तभी पापा नीलेश ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा-” मेहुल हम खुद अचंभित है। कल रात उनका फोन आया,दो साल के लिए “आभास” लंदन जा रहा है।वे चाहते है कि कल मिलकर शादी के बारे में चर्चा कर ली जाये।”
मेहुल- “पर पापा!”..उसकी बात बीच में ही काटते हुए नीलेश जी बोले-“पर वर कुछ नही…वैसे भी तुम दोनों का रिश्ता तो बचपन में ही तुम दोनों के दादाजी ने तय कर दिया था। वे चाहते थे कि ये दोस्ती रिश्तेदारी में बदल जाये।अब वे नही रहे तो मेरा फर्ज बनता है कि उनकीबात का मान रखूं…और तुमसे भी यही उम्मीद है।”
यह कह अपना कॉफी मग ले वे बाहर हॉल में चले गये।
मेहुल की समझ नही आ रहा था वह क्या करे?..वह तो यश से प्यार करती है। बस बचपन के 5-6 साल ही तो साथ बिताये थे उसने आभास के साथ।बाद में दादाजी की मृत्यु के बाद पापा गाँव की सारी संपत्ति बेच शहर आ गए थे।अतुल अंकल भी बच्चों की पढ़ाई के खातिर अपने रिश्तेदारों के पास चंडीगढ़ चले गए थे।उसके बाद उसका और आभास का कभी मिलना नही हुआ।हाँ पापा और अंकल का एक दूसरे से मिलना हो जाया करता था। बिजनेस मिटिंग्स के सिल-सिले में!..
मेहुल ने अभी चुप रहने में ही भलाई समझी उसने सोचा वह मौका देख आभास से ही बात करेगी।
पूरा दिन हँसी-मजाक मस्ती और शादी की बातों में चला गया।आभास थोड़ी देर लंच तक ही रुका, ऑफिस का कुछ जरूरी काम आ जाने के कारण उसे अचानक से जाना पड़ा। इस कारण मेहुल अपने मन की बात आभास से नही कह पाई।

शादी का मुहूर्त अगले शुक्रवार का निकला।एक हफ्ते में सब तैयारियां पूरी करनी थी। काम ज्यादा वक्त कम सब व्यस्त हो गये। यश भी कैनेडा गया हुआ था दोस्त की शादी में।अब क्या करे मेहुल?…

तभी मेहुल ने सोचा परसों शॉपिंग के लिए आभास के साथ जाना है। तभी वह अपने मन की बात आभास से कह देगी।आभास उसके बचपन का दोस्त और एक बेहद समझदार और सुलझा हुआ लड़का है। उसकी जरूर मदद करेगा।पर कहते है न हम सोचते कुछ और है और होता कुछ और है।
दूसरे दिन ऑफिस में पापा के बिजनेस पार्टनर से कुछ मसलों पर जम कर विवाद हो गया।वो उन्हें धोखा दे रहा था।बहस ज्यादा बढ़ गई।और तनाव के चलते पापा को दिल का दौरा पड़ गया।उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।मेहुल की शादी के एक दिन पहले उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली। पापा की ऐसी हालात नही थी कि वह और कोई सदमा बर्दाश्त कर सके।परिस्थिति से समझौता करना ही एकमात्र उपाय था मेहुल के लिए।
जल्द ही मेहुल,आभास की अर्धाग्नि बन उसके घर और जीवन का अहम हिस्सा बन गई। विदाई के समय पापा ने उसे गले लगाकर बस इतना ही कहा था-” बेटा दोनों घरों की इज्ज़त अब तेरे हाथ में है। अपने व्यवहार से ससुराल में भी सबके दिल पर राज करेगी मेरी रानी बेटी मुझे विश्वास है।”
सुहागरात वाले दिन आभास ने मेहुल का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा-” मेहुल मैं तुम्हारी मनःस्थिति समझ सकता हूँ।जब तक तुम नही चाहोगी हम एक-दूसरे के नजदीक नही आयेगे।मैं समझ सकता हूँ पापा की हालत के कारण तुम अभी पूरी तरह तन-मन से इस रिश्ते को दिल से स्वीकार नही कर पाओगी।तुम मानसिक रूप से जब पूर्ण रूप से तैयार हो जाओगी तब हम साथ-साथ नया जीवन प्रारंभ करेगे। मैं तुम्हारा इंतजार करूँगा। तब तक के लिए हम बचपन के वही पुराने दोस्त”!…और वह सोने के लिए सोफे पर चला गया।
मेहुल ने चैन की सांस ली..उसके दिलो दिमाग में तो बस यश ही बसा हुआ था।दो दिन बाद दोनों लंदन के लिए रवाना हो गये।आभास को लगा कि मेहुल अपने पापा की तबीयत के कारण इतना चुपचाप है।
वह उसका पूरा ख्याल रखता।उसको घूमने ले जाता।उसके साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताता।मेहुल को बात-बात पर हँसाता।

धीरे-धीरे बचपन की उनकी दोस्ती फिर से एक बार फिर गहरा गई।

मेहुल भी आभास का पूरा ध्यान रखती एक अच्छे दोस्त की तरह। एक दिन मौका देख उसने आभास से कहा-“आभास आज मैं तुम्हें अपनी जिंदगी की सबसे खास बताना चाहती हूँ।मैं यश से प्यार करती हूँ। तुम्हारे साथ शादी, पापा की तबियत खराब होना,। सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि मैं तुम्हें कुछ न बता पाई।आभास, मेहुल की बात सुन एकदम से चकरा गया।
फिर खुद को संभालते हुए बोला-“ओहो तो ये बात थी, मैं तो समझ रहा था कि?”….बात को अधूरा छोड़ फिर बोला-” इसका भी उपाय है मेरे पास मुझे यश का नम्बर दो। मैं तुमसे तलाक के लूँगा, और फिर तुम यश से शादी कर लेना। तुमको कोई कुछ नही कहेगा।शादी टूटने का सारा दोष मैं अपने सर ले लूँगा।”
मेहुल-“क्या सच में आभास ऐसा हो सकता है?…तुम बहुत ही अच्छे दोस्त हो आभास।”इतना कह वह उसके गले लग गई।
दूसरे दिन शाम को होटल लेकर गया आभास मेहुल को।वहाँ यश को देख चौक गई मेहुल।आभास बोला जो मैंने किया कर दिखाया।चलो लवबर्ड्स आज की शाम आप दोनों के नाम। यश मेहुल को रात घर छोड़ देना ये अभी भी मेरी अमानत है।”
यश ने मुस्कुराते हुए कहा-“यस बॉस।”
पर आभास के जाने के बाद मेहुल को यश के साथ बात करना,उसके साथ रहना अच्छा नही लग रहा था।उसका सिगरेट पर सिगरेट पीना। जोर से वेटर को चिल्लाना।उसका हाथ पकड़ना,उसे किस करने की कोशिश करना। उसके मन को बिल्कुल भी नही भा रहा था। इस यश को तो वो जानती ही नही थी।
जिस यश को जानती थी वह यह नही था अचानक उसने यश से कहा- “यश हम कल मिले। अचानक से मेरे सर में बहुत तेज दर्द हो रहा है घर चले।किंतु यश ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। उसको दर्द हो रहा उसे, इस बात से कोई मतलब नही। वह बोला- “यार इतने दिन बाद मिले उसके बाद भी तुम्हारे ये नाटक।”तब कोई उपाय न देख उसने चुपके से आभास को फोन लगा दिया कि वह आकर उसे ले जाये। आभास तुरंत आ गया उसे लेने।साथ सरदर्द की गोली भी लेकर आया।
यश ने कहा-“गोली खा लो ठीक हो जाओगी अभी दो घन्टे भी नही हुए हमें मिले। तब आभास ने कहा-“यश कल नये साल की पार्टी है। परसों तक हमारे तलाक के पेपर तैयार हो जायेगे।मैंने हमारे वकील से बात कर की है, फिर मेहुल हमेशा के लिए तुम्हारी।तुम दोनों स्वतंत्र होंगे अपनी नई जिंदगी शुरू करने के लिए। तब तक धैर्य रखो दोस्त!.. और मुस्कुराते हुए मेहुल को ले घर आ गया।
नये साल की पार्टी शुरू हो चुकी थी। यश और सभी दोस्त आ चुके थे।आभास उसे जल्दी से तैयार हो बाहर आने के लिए कह चला गया।

इधर बाहर नये साल का जश्न पूरे शबाब पर था और भीतर…. भीतर मन में तूफान आया हुआ था मेहुल के!… उसे आभास में अच्छाई ही अच्छाई नजर आ रही थी और यश में बुराई ही बुराई।

आभास ने इन आठ महीनों में उसका कितना ख्याल रखा। कभी मम्मी-पापा की याद नही आने दी।
वह सोच रही थी कि वह कितनी खुशकिस्मत है जो उसे पति के रूप में एक बहुत अच्छा दोस्त मिला। जो उसकी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता है।
उसे महसूस हुआ कि आभास उसकी रूह से प्यार करता है, शरीर से नही। वह मन ही मन निर्णय ले चुकी थी। उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक आ गई थी।उसके भीतर का तूफान अब थम चुका था।
लाल रंग के गाउन में वह कितनी सुंदर लग रही थी। जैसे ही वह नये साल की पार्टी में पहुँची सब की नजर उस पर जाकर थम गई थी।और!..और मेहुल की नजर बस आभास पर!..वह आभास के पास गई…और बड़े ही रोमांटिक अंदाज में आभास के सामने घुटने के बल बैठ,लाल गुलाब देते हुए बोली-“आभास क्या एकबार फिर मुझसे शादी करोगे।” आभास और यश अचानक हुई इस अप्रत्याशित घटना से चौक गये।
आभास ने भी उसी तरह रोमांटिक अंदाज में उसे गोद में उठाते हुए कहा-“हाँ प्रिये नेकी और पूछ-पूछ चलो सातों जन्म के फेरे आज ही ले लेते है। तालियों की गड़गड़ाहट और हँसी के फव्वारे से गूँज उठा हॉल। यश को कुछ समझ नही आ रहा था अचानक से यह सब क्या हो गया।उसने मेहुल को एकांत में ले जाकर जानना चाहा। तब मेहुल ने उसे कहा – “मैं माफी चाहूँगी यश…मैं भूल गई थी की मैं शादी शुदा भारतीय नारी हूँ!..उसका पति ही उसका प्यार होता है। तुम मुझे भूल जाओ और कोई अच्छी लड़की देख शादी कर लो!…मैं अपने पति के साथ बहुत खुश हूँ। और बिना यश के प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा किये बिना वो आभास और चल दी उसकी बाहों में हमेशा के लिए सामने के लिए।
इधर आभास भी उसमें अचानक से आये परिवर्तन के बारे में जानना चाहता था। उसकी बाँहों में नृत्य करते हुए मेहुल बोली-“आभास, मुझे आज महसूस हुआ कि यश के साथ मेरा प्यार महज एक आकर्षण था……अचानक से हुआ क्षणिक लगाव था वो…….जो क्षण भर में खत्म हो गया। पर तुमसे मुझे धीरे-धीरे और सात जन्मों वाला बेपनाह प्यार हुआ है।तुम्हारे प्यार ने मेरी रूह को स्पर्श किया है। आज मैं सारी फिक्र-चिंता छोड़ तुम्हारे इस प्यार भरे आलिंगन में खो, अपने रोम-रोम में उमड़े तुम्हारे प्यार को आज, जी भरकर महसूस करना चाहती हूँ!”…
मेहुल की बात सुन आभास ने भी अपनी बाहों की गिरफ्त को मजबूत कर लिया था।अब
बाहर नये साल का जश्न पूरे शबाब पर था और भीतर ……भीतर भी अब दोनों के,नये साल का जश्न पूरे शबाब पर था!…

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