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अब बस

 

रूपा सुबह सुबह हाँथ में चाय का कप लिए हॉल में बैठकर टीवी देखते हुए चाय पी रही थी कि तभी उसको डोरबेल की आवाज सुनाई दी……

दरवाजा खोला, देखा तो काम वाली महरी कमला थी|
“अरे कमला तू आज क्यों आयी? तुझे मना किया था ना मैंने आज आने के लिए? आज तेरी बेटी का जन्मदिन है ना, तो तू क्यों आयी? मैं कर लेती आज सारा काम खुद ही।”
“हाँ, भाभी लेकिन साहब को पूछा तो उन्होंने छुट्टी लेने से मना कर दिया था और अगर आज मैं नहीं आती तो साहब का गुस्सा हम दोनों पर बरसता| तो सोचा सुबह जल्दी जाकर सारा काम जल्दी से निपटा कर बाजार चली जाऊंगी| बेटी के लिए तोहफा भी लाना है| इसलिए मैं आज आ गई| ऐसा  बोलकर कमला काम में लग गई| कमला को दो साल पहले ही रूपा के पति ने घर के काम करने के लिए रखा था कमला बातूनी थी रूपा उससे बात करके अपना गम भूल जाती। आज कमला के चेहरे की चमक बता रही थी कि वह कितनी खुश है|
“कितने साल की हो गई तेरी बेटी?” रूपा ने पूछा
“पूरे 10 वर्ष की हो जाएगी, भाभी| उसके लिए नई फैंसी ड्रेस खरीदनी है। मोबाइल पर फ़ोटो देखी तो उसको भी वैसी ही चाहिए। तो सोचा दिला दूँ। आखिर उसके लिए ही तो कमाती हूं। भाभी आज खाने में कढ़ी चावल,कलौंजी बना दूं ?””कमला ने कहा
“हां! बना दे, वैसे भी बस मुझे ही खाना है आज सब बाहर ही खाने वाले है।और सुन,  जाते वक्त मुझसे कुछ पैसे ले जाना। मेरी तरफ से भी अपनी बेटी के लिए कुछ ले लेना। साहब का रूम अच्छे से साफ करना | तुझे तो पता  ही है कि थोड़ी भी गंदगी दिखी तो गुस्सा सातवें आसमान पर होगा|” रूपा ने कहा
“जी भाभी सब अच्छे से साफ कर दूंगी, आप चिंता मत करो।”””’
“कमला  ने काम करते करते बातें शुरू कर दी।भाभी  एक बात पूछूं आपसे ? आपकी शादी को कितने साल हो गए ? “”’
” पूरे तीन साल हो जाएंगे|  “””’रूपा ने कहा
” अच्छा भाभी नए साल की पार्टी का जश्न इस बार कहाँ मनाया जाएगा है।””कमला ने कहा
रूपा ने टीवी देखते हुए पता नही में सिर हिला दिया|
भाभी पिछली बार याद है नए साल पर खूब जश्न हुआ था, है ना भाभी ?
“हाँ ! लेकिन  इस बार मैं नए साल के जश्न में नहीं जाऊंगी””‘रूपा ने कहा
“ऐसा क्यों ? पिछली बार तो आप गयी थी, भाभी,आप तो नसीब वाली हो जो इतना अमीर और नामी ससुराल मिला आपको, साहब की इतनी अच्छी कमाई है, फिर भी आप जश्न नहीं करोगी, ऐसा क्यों ? “””’कमला ने कहा
“अरे तू यहां मुझसे बातें ही करती रहेगी या घर जाकर अपनी बेटी की जन्मदिन की तैयारी भी करेगी।””‘रूपा ने बात को टालते हुए कहा
“अरे हां ! मैं भी ना कितनी पागल हूं , बातों में लग जाती हूं , इतना कहकर कमला काम निपटाकर चली गई| “””
तभी मोबाइल की घंटी बजी, रूपा ने देखा तो उसकी सास शांति जी का फोन था|
शांति जी जो कि एक समाजसेविका थी जो महिलाओं के खिलाफ होने वाले घरेलू हिंसा और अत्याचारों के खिलाफ समाज मे जागरूकता का फैलाने का काम करती थी वो समाजसेवा के काम से कुछ दिनों के लिये बाहर गयी थी।
रूपा ने फोन उठाकर हेल्लो कहा””‘ तो वो कहने लगी  ! रूपा इस बार नए साल  के जश्न के लिए मैंने  फाइव स्टार होटल बुक कर दिया है। इस बार घर पर जश्न नहीं होगा”””शांति जी ने कहा
“लेकिन मांजी मुझे कोई पार्टी वार्टी नहीं करनी है| “
“” सुन लिया अमर'””- शांति जी ने कहा
रूपा को समझ में आ गया | कि माँजी ने कॉन्फ्रेंस कॉल कर के अमर(रूपा का पति) को भड़काने का काम किया है। इतना सुनते रूपा के हाँथ पाव ठंडे हो गए।… वो मैं ये कहना चाह रही थी कि मुझे पार्टी नहीं करनी ना ही किसी पार्टी में जाना है, रूपा ने लड़खड़ाती जुबान में डरते हुए अपनी मन की बात कही।
“”तुमसे कोई सलाह नहीं मांग रहा,जितना बोला जाए उतना किया करो, ज्यादा जुबान चली तो पता है ना,चुपचाप पार्टी के लिए चली आना समझी।””इतना कहकर फोन काट दिया।
रूपा वही सोफे पर धम्म से बैठ गयी और अपनी पुरानी यादों में चली गयी ,उसे पुरानी भूली बातें और पुराने जख्म जैसे सब ताजा हो गए| वो सोचने लगी कैसे भूल जाऊं जो पिछले साल अमर ने मेरे साथ किया था। वैसे तो हर रोज ही होता है लेकिन उसदिन सब मेहमानों के सामने पार्टी में अमर ने रूपा पर हाथ उठाया था। कितना रोई थी तब रूपा, सब वहीं थे उस वक्त लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा।
सासुमां ने सबके जाने के बाद कहा “””पति पत्नी में छोटे-मोटे झगड़े तो होते रहते हैं।””‘
चाचा चाची भी समाज की दुहाई देकर रूपा को रोता हुआ छोड़ कर चले गए|  रूपा के माता पिता का स्वर्गवास बचपन मे ही कार एक्सीडेंट में हो गया था पांच साल की थी रूपा उस वक़्त। बड़े होने पर अमर से उसकी शादी चाचा चाची ने  पैसों के लालच में कर दी। और अपना पीछा छुड़ा लिया। किसके पास जाए अपना दुःख कहने। तलाक ले कर अकेली रहने में भी डरती की दुनिया क्या कहेगी? कोई सहारा देने वाला भी नहीं था।
अमर और शांति जी उसे बात बात पर धमकी देते| की अगर हमसे बैर लिया तो फिर “””ना घर की बचोगी ना घाट की| “””
“”अभी जो रोटी कपड़ा मिल रहा है वो भी बंद हो जाएगा। बदनामी होगी सो अलग। मतलब इसमे कुलमिलाकर सिर्फ तुम्हारा घाटा ही है”” रूपा डर के मारे उनके मारपीट और घरेलू अत्याचार हर रोज सहती रहती। और अंदर ही अंदर घुटती रहती।
बस यही कारण था।  कि अमर की हिम्मत और बढ़ गई थी। शराब पीकर मारपीट करना, गाली गलौज करना|   अब तो यह आम बात हो गई थी| यह सब सोचते सोचते रूपा का सिर दर्द करने लगा था|
तभी डोर बेल बजी| दरवाज़ा खोला तो अमर सामने खड़े थे| इतना भी पूछने की हिम्मत नहीं हुई कि आज इतनी जल्दी कैसे आये। तभी अमर ने कहा””जाकर खाना लगाओ।”अमर के लिए रूपा खाना लगाने लगी,
अमर  खाना खा रहा था रूपा वही पास में खड़ी थी ,
कि तभी एक जोरदार थप्पड़ रूपा के गालों पर अमर ने दे मारा।ये कहते हुए की स्टैंडर्ड खाना बनाने नहीं आता कम से कम बनवाना तो सीख लेती। और खाने की थाली छोड़ कर उठ कमरे की तरफ जाते हुए कहा-
“”सुनो ! कल पार्टी है,  कोई नाटक मत करना, पिछली बार की तरह| और किसी अच्छे पार्लर से तैयार होकर आना| “”समझी..
रूपा गाल पर हाँथ रखे वही जमीन पर बैठ कर रोते रोते सोचने लगी। कि उसे पता होता कि अमर घर पर ही खाएंगे तो उनकी पसंद का ही खाना बनवाती| रोते रोते कब आंख लगी पता ही नहीं चला..सुबह अमर ने पैर से रूपा को मार कर जगाया तो रूपा सोचने लगी “कि क्या सच मे यही उसका नसीब है?”
खाना पीना पैसा शोहरत ऐसो आराम सबकुछ था उस घर मे रूपा के लिए सिवाय उसके आत्मसम्मान और प्यार के।
दुःखी मन से रूपा ने अमर के लिये नाश्ता बनाया  और नाश्ता करके अमर ऑफिस चले गए।  तभी  कमला आ गयी।
आज बातूनी कमला भी चुपचाप अपना काम कर रही थी।
रूपा ने उसे चुपचाप देखकर अपने साथ रात को हुए मारपीट को भूलते हुए पूछा”” बड़ी शांत है आज बताया नहीं कैसा रहा बेटी के जन्मदिन की पार्टी।
कि तभी रूपा की नजर कमला पर गयी….””” तुझको यह चोट कैसे लगी ? कहीं गिर गई थी क्या तु ?”” इसलिए तू आज इतना शांत है। बता तो सही क्या हुआ??
इतना सुनते कमला की आंखों में आंसू आ गए| भाभी क्या बताऊं ? कल रात मेरे मर्द ने शराब पीकर मुझे बहुत मारा और सारे पैसे  भी छीन लिए। बेटी का जन्मदिन भी खराब कर दिया मरे ने….
“””क्या””? रूपा ने आश्चर्य से पूछा
हाँ भाभी ? कमला ने सिसकते हुए पूछा
“” फिर क्या हुआ ?””
“क्या होगा भाभी, हम औरतों के नसीब में मर्दों के हाँथ मार खाना ही लिखा हुआ है,आप पढ़ी लिखी होकर भी आज तक साहब से मार खाती हो तो मैं तो अनपढ़ ठहरी। बुरा तो तब लगता है जब बेटी ये सब देखकर रोती है,आप को तो अभी बच्चे नहीं इसलिए आप अकेली ही सब दुःख सहती है मुझे तो बेटी को देखकर रोना भी आता है और चिंता भी की कही आगे चलकर इसके साथ भी ये सब हुआ तो”?
“पता है भाभी शादी से पहले जब अपनी माँ को मार खाते देखती थी तब माँ को कहती थी कि हिम्मत क्यों नहीं करती?मैं तो शादी के बाद अपने पति से अपना हिसाब साफ रखूंगी, इज्जत के बदले इज्जत प्यार के बदले प्यार और मार के बदले मार। कब तक बर्दाश्त करूँगी??तब माँ कहती थी चुपकर पगली ऐसा नहीं होता।”

शादी के बाद पता चला वो वाकई ऐसा नही होता, वो सिर्फ मेरा बचपना था बड़े होने के बाद पता चला कि हकीकत तो शादीशुदा औरतों यही है कि उनको अत्याचार बर्दाश्त करने ही होते है।

“जैसे आप छिपा रही हो, अपने थप्पड़ के दाग मेकअप से| भाभी मेकअप से दाग छिप सकता है, मिट नहीं सकता। भाभी ऐसे मत देखो मुझे।मुझे सब कुछ पता है। मुझे क्या पूरी सोसायटी को पता है। बस कोई सामने से बोलता नही”।
रूपा आश्चर्य से कमला को देखते रह गयी आज उसको कमला की बातें चुभ गयी। कमला अपना काम निपटा कर चली गई|  लेकिन रूपा सोचने लगी।
तभी अमर का फोन आया”””रूपा सुनो  मैं ऑफिस से सीधा होटल आ जाऊंगा|   तुम ड्राइवर के साथ चली आना !””’
रूपा ने मन मार के हम्म कह के जवाब दिया और शाम को तय समय पर रूपा  होटल पहुंच गई|
पार्टी शुरू होने वाली थी|   सभी मेहमान आ चुके थे  तभी रूपा भी वहां आ गयी ,अमीरों की महफ़िल में मेकअप से लीपे- पुते चेहरे,  जाम से जाम टकरा रहे थे अमर की नजर जैसे ही रूपा पर गयी वो उसका हांथ घसीटते हुए होटल के एक कमरे में लेकर आया।
“”आउच…मेरा हाँथ छोड़ो मुझे दर्द हो रहा है..बोलिए क्या हुआ अमर?मुझे कहां ले जा रहे हैं?कुछ बोलिये तो सही..””रूपा ने कहा
इतने में अमर ने रूपा को गुस्से में  घूरते हुए बोला ! बेवकूफ गंवार औरत तुम्हे मैंने बोला था कि अच्छे से पार्लर में जाकर मेकअप कराना और कपड़े पहनना और तुमने क्या पहन लिया कैसा मेकअप किया है?
रूपा ने कहा ! लेकिन मैं तो तुम्हारे पसन्द की पार्लर में ही जाकर तैयार हुई।
“दो कौड़ी की औरत तू मुझसे जुबान लड़ाएगी| अभी बताता हूं तुम्हें।”
बाहर नए साल का जश्न शबाब पर था और भीतर कमरे में अमर ने रूपा का हाथ पकड़कर उसके बालो को पकड़ते हुए जैसे ही अपना हाथ उठाया रूपा के गाल पर थप्पड़ मारने के लिए  कि तभी रूपा में आज ना जाने कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई, की उसने अमर का हाथ पकड़कर झटक दिया और अपने दूसरे हाथ से उसने उसको आज एक के बाद एक लगातार कई तमाचे मारे| अमर अपने दोनों गालों पर हाँथ रखे थोड़ी देर के लिए सन्न हो गया और उसकी आंखें गुस्से से लाल रूपा को घूरे जा रही थी।
आज रूपा ने डरने की बजाए हिम्मत से काम लिया। हमेशा पीछे हटने  वाले उसके  दो कदम आज निडर होकर अमर की तरफ आगे आत्मविश्वास बढे। अमर ने गुस्से में बोलना चाहा तो रूपा ने मुँह पर ऊँगली रखकर चुप रहने का इशारा करते हुए बोली ! तुम बहुत बोल चुके मिस्टर अमर……आज तक सिर्फ मैं सुनती रही और तुम बोलते रहे अब आज मेरी बारी बोलने की और तुम्हारी सुनने की है।
“मैं कोई कोई खिलौना नहीं हूं| जिससे तुम जब चाहे, जैसा चाहे, खेलोगे ,समझे| आज के बाद अगर मुझ पर हाथ उठाया या कोशिश भी कि तो वो  हाल करूंगी कि जिंदगी भर याद रहेगा। समझ आयी बात मिस्टर सो कॉल्ड अमर सिन्हा…..अगर चाहते हो कि पार्टी में कोई तमाशा ना हो और सबके सामने तुम्हारी इज्जत बनी रहे तो चुपचाप पार्टी में चलो।
दरवाजे पर खड़ी शांति जी रूपा के पास आई और बोली “”तेरी इतनी हिम्मत की तू मेरे बेटे को मारे , तू होती कौन है मेरे बेटे को धमकी देने वाली,तु शायद भूल गयी कि मैं कौन हूँ?
“अगर हम तुझे छोड़ दे, तो तू वापिस रास्ते पर आ जायेगी।किस के दम पर इतना कूद रही है ये फ़िल्म नहीं असल जिंदगी है यहाँ तलाकशुदा या ससुराल से निकाली गई औरत की कोई इज्जत नहीं करता। तुझे पता नहीं किससे दुश्मनी मोल ले रही है। “
“आदरणीय सासु मां,आज आप भी चुप ही रहे तो बेहतर होगा। अपने अय्याश शराबी अमीर बेटे की शादी मुझसे इसलिए करायी कि अनाथ गरीब लड़की चुपचाप आप लोगों के सब जुर्म बर्दाश्त करेगी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब चुप रहने की बारी आपकी| वरना जिस समाज और मीडिया में लोग आप को देवी मानते है। जो औरते शांति देवी को न्याय और महानता की मूर्ति समझती है।”
वही औरते ,समाज, मीडिया जब देवी समझी जाने वाली शांति जी को खुद उसी जुर्म की सजा भुगतते देखेगी तो कितनी इज्जत रह जाएगी। जरा सोचकर देखिये जब शांतिदेवी की बहू मीडिया के सामने बोलेगी घरेलू हिंसा की बात तो क्या होगा? जंगल मे आग की तरह ये खबर हर मीडिया चैनल के ब्रेकिंग न्यूज़ में फैली होगी। उम्मीद करती हूं अब आपकी समझ में आ गयी होगी मेरी बात….
और क्या कहा आपने की मुझे अगर आप लोग छोड़ देंगी या तलाक दे देंगी तो। तो वो गाना सुना आपने”””इसमें तेरा घाटा “”” इसलिए बेहतर होगा मुझे आप ये धमकी ना दे। क्योंकि मेरे पास कानून है जहाँ मैं न्याय मांग सकती हूं। सही कह रही हूँ ना मैं?
मेरी चुप्पी को आप दोनों ने मेरी कमजोरी समझ रखा था,पर अब और नहीं| अब बस, मैं पढ़ी-लिखी आज की नारी हूं अपने सभी सामाजिक और कानूनी अधिकार भी जानती हूं। मुझे आपकी दया की जरूरत नही।आप दोनों यहाँ आराम से बैठकर सोच लो कि क्या करना है? मैं  पार्टी में जा रही हूं।
बाहर नए साल का जश्न पूरे शबाब पर था और भीतर आज रूपा ने अपने जीवन मे अपने आत्मसम्मान को बचाने की नए साल से नयी शुरुआत कर दी थी।
ये पूर्णतया काल्पनिक कहानी है। किसी भी त्रुटी के लिए माफ करे। कहानी का सार सिर्फ इतना है कि हर महिला को खुद को हर परिस्थिति में निडर, मजबूत और सकारात्मक बनाये रखना चाहिए। जिससे विपरीत परिस्थितियों में भी अपने समस्याओं का समाधान सोचने से मिल ही जाता है।

 

 

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कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं। लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

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Ragini Pathak
मैं एक गृहणी हुँ, लेखन मेरे जीवन मे मेरी सांसों की तरह है। कलम के सहयोग से समाज मे व्याप्त महिलाओं की समस्याओं को सामने लाने की एक कोशिश है मेरी। क्योंकि कलम तलवार से भी ताकतवर होती है। लेखनी मेरे लिए सिर्फ कुछ शब्द नही इसमे मेरी भावनाएं सपने जुड़े हैं। बस उन्हीं सपनों को पंख देने की एक छोटी सी कोशिश है मेरी। बहुत से मंचो पर लेखन विजेता भी रही हूं। सफर सपनो का तो अभी शुरू हुआ है, दूर तक जाना है सुनहरे अक्षरों सा इतिहास बनाना है। हम रहे ना रहे हमारा वजूद रहे।

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