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दो दिल मिले चुपके-चुपके

 

“निलेश आज जो हुआ वो ठीक नहीं था”
” हां सीमा इस बात का मुझे भी एहसास है कि हमसे अन्जाने में बहुत बड़ी गल्ती हो गई , लेकिन यकीन मानो मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था,शायद वक्त ने आज हमें ये एहसास दिलाया कि हम दोनों के दिल एक दूजे को चाहते हैं, हम बेशक अपनी ज़िम्मेदारियों से, अपने परिवारों से, अपनी मज़बुरियों से बंधे हैं ,लेकिन दिल तो आज़ाद हैं ये किसी के बांधे कभी बंधे हैं, हमारे ❤️चुपके से कब एक -दूजे के हो गए, कब ये मिल गए हमें पता ही नहीं चला”!
“सच कह रहे हो निलेश कब ये ❤️ तुम्हारे दिल से चुपके से बतियाने लगा मैं तो जान भी नहीं पाई, शायद इसी को ही प्यार का नाम देते हैं लोग, शादी शुदा होते हुए भी मैं प्यार का अर्थ नहीं जानती थी, कभी प्यार मिला ही नहीं, बस बिस्तर की ज़रूरत और घर में काम की मशीन, और एक ए. टी. एम. बन कर रह गई थी”!
” सीमा फिर तुम अपने पति से तलाक क्यों नहीं ले लेती ??”
” हूंहह , ये नहीं हो सकता आकाश मुझे तलाक नहीं देते, मैंने कहा था एक बार, जब से तलाक की बात हुई है तब से ज़्यादा मार-पीट और गाली -गलौच करने लगे हैं!
सीमा का पति आकाश अक्सर शराब पी कर आता था सीमा पर हाथ उठाता, उस पर गन्दे इल्ज़ाम लगाता, वो चुपचाप सह रही थी, बस उसे अगर कहीं सुकून मिलता तो आफिस में! यहां आकर सब दूं:ख भूल जाती थी |उसे निलेश का साथ अच्छा लगता | निलेश को भी सीमा का साथ अच्छा लगता, अक्सर काम में उसकी मदद करता, लंच-टाईम में दोनों एक साथ लंच करते और अपने-अपने दूं:ख-सुख सांझा करते, निलेश उसके पति की हरकतें जानकर बड़ा दूं:खी होता सीमा को सांत्वना देता था | देखा जाए तो दोनों ही अपने जीवन साथी से बहुत परेशान थे , निलेश की पत्नी भी मुंहफट और झगड़ालू किस्म की थी इसलिए दोनों को आफिस में एक दूजे का साथ अच्छा लगता।
दो दिन का आफिस मिटिंग टूर था और साथ में ने साल की पार्टी भी थी आफिस की तरफ से मुम्बई में! और निलेश के बैंक से निलेश और सीमा को चुना गया, दोनों वहां मिटिंग से फारिग हो कर होटल वापिस आ रहे थे टैक्सी से तो सीमा के पति आकाश का फोन आया जो बहुत बूरी तरह से सीमा को गाली दे रहा था, सीमा की आंखें भीग गई , टैक्सी से उतरते ही सीमा सीधी अपने कमरे में गई और फूट-फूट कर रोने लगी।
थोड़ी देर बाद उन्हें नीचे होटल में नए साल की पार्टी में भी पहुंचना था, मगर सीमा के आंसू नहीं थम रहे थे! निलेश उसकी हालात देखकर अपने कमरे में ना जाकर सीमा के रूम में चला गया उसे ढांढस बंधाने, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था| जैसे ही निलेश ने उसके आंसू पोंछने चाहे सीमा का बांध टूट गया और वो निलेश के गले लग कर खूब रोई, निलेश ने उसे बाहों में भर लिया!
 बाहर नए साल का जश्न पूरे शबाब पर था और भीतर एक ज्वारभाटा आया और दोनों को एक करके चला गया ।
“हां सीमा मैं भी प्यार की तपिश को आज महसूस कर पाया हूं,”
दोनों के चेहरों पर एक सुकून भी था , दोनों तृप्त हो चुके थे ।
“सीमा तुम घबराओ मत मानता हूं जो हुआ नहीं होना चाहिए था, अब एक ही रास्ता है मैं वापिस जाते ही अपना तबादला करा दूंगा, ताकि फिर कभी ऐसा ना हो”!
और निलेश ने आते ही दो दिनों में अपना तबादला करा लिया। दोनों एक -दूजे से दूर हो गए लेकिन एक -दूजे को दिल से ना निकाल सके, उनके ❤️ तो चुपके से एक-दूजे से बातें करते थे, एक -दूजे से मिलते थे। दो दिल चुपके-चुपके एक – दूजे के ख्यालों में मिल कर ही तृप्त हो जाया करते थे।

 

 

Pic Credit Canva

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Prem Bajaj
मैं एक रचनाकार , लिखने , पढ़ने का शौंक , बहुत से पत्थर - पत्रिकाओं में लिखती हूं , बहुत से सम्मान पत्र मिल चूके हैं । पिंकिश फाऊंडेशन द्वारा अवार्ड मिला ।

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