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इज़हार

वंदना खलिलाबाद जैसे एक छोटे शहर मे रहती थी। उसके पड़ोस में राहुल नाम का लड़का रह्ता था ,जो करीब करीब वंदना के उम्र का ही था। पड़ोसी होने की वजह से दोनों परिवारों में अक्सर वार्तालाप हो जाया करती थी। छोटा शहर होने की वजह से वंदना और राहुल के स्कूल पास पास ही थे।
स्कूल जातेऔर लौटते समय उन दोनों की मुलाकात हो जाती और धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो गई। बाल्य अवस्था होने के कारण दोनों बच्चो का आपस में खेलना, बात बात में खिलखिलाना स्वाभाविक था।वे एक-दूसरे के घर जाकर कभी लूडो कभी छुपा छुपाई खेलते। समय के साथ साथ बड़ते हुए दोनों  कक्षा चार पाँच में पहुंच गये।
 वंदना और राहुल जब भी एक साथ होते तो दोनों बहुत खुश होते और दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगता, पर तभी दो महीने बाद वंदना के पापा का तबादला हो गया और वे लोग दूसरे शहर चले गए। उस समय मोबाइल का जमाना नही था और न ही हर घरों में बेसिक टेलीफोन होते थे। वंदना और राहुल के यहाँ भी टेलीफोन की सुविधा नही थी।कुछ महीनो के अन्तराल के बाद राहुल के पिता जी का भी तबादला हो गया। दोनों के पापा सरकारी कार्यालय में कार्यरत थे।अब दोनों ही परिवारों में एक दूसरे के हाल चाल की कोई जानकारी नहीं थी।
समय अपनी रफ्तार से बढ़ रहा था ।दोनों परिवार एक दूसरे को भूल चुके थे, लेकिन वंदना के मानस पटल पर आज भी राहुल की छवि अंकित थी। वंदना ने ग्रेजुऐशन कर HR में एम बी ए ( MBA)राजस्थान-जयपुर से किया और नोयडा में   एक कम्पनी मे उसकी नौकरी लग गई ।अब वंदना के माता पिता को उसकी शादी की चिंता होने लगी। घर में जब भी शादी के विषय पर चर्चा होती तो वंदना के मन में कुलबुलाहट सी होती,  दिल की धडकनें तेज हो जाती क्योकि बाल्य अवस्था में राहुल के साथ  उसकी दोस्ती ने बढ़ती उम्र के साथ ने वंदना के ह्रदय में प्रेम का बीज बो दिया था।
वह दिल ही दिल में राहुल के बारे मे सोचती वह जवान होकर कैसा दिखता होगा, उसने पढ़ाई क्या की होगी पर वह इस बारे मे किसी से यहां तक कि अपनी सहेलियों यह से भी बात नहीं करती उसे लगता कि सब उसकी हंसी उड़ायेगी, यहाँ तक कि उसने खलिलाबाद में उसके बारे में पता लगवाने की कोशिश की लेकिन अब जो लोग वहाँ रह रहे थे वे इस नाम से बिल्कुल अनभिज्ञ थे। वंदना का दिल राहुल को ढूंढने के लिए बेचैन रहता।
तभी उसकी कम्पनी में राहुल नाम के एक लड़के की भर्ती हुई जैसे ही वंदना को इसकी जानकारी हुई उसने तुरन्त उसका बायोडाटा निकाला और उसकी पूरी जानकारी हासिल की जिसमें उसे यह भी पता चल गया की वह अविवाहित है यह और कोई नही वंदना का बचपन का दोस्त राहुल ही था !
उसके खुशी का ठिकाना नहीं था लेकिन वंदना के मन में झिझक और संकोच था कि वह राहुल से क्या कहे। एक दिन राहुल कैंटिन में बैठा चाय पी रहा था तो वंदना उसके पास गई और उसके साथ कुछ पुरानी बातें की जिसे सुनते ही वह कूद पड़ा और वंदना को गले लगा लिया। वंदना उसके इस आलिंगन से हतप्रभ सी थी लेकिन उस आलिंगन में उसे अपार सन्तोष की अनुभूति हो रही थी ।
अब दोनों ही आफिस रोज मिलते कुछ काम की बातें करते कुछ बचपन की बातें करते लेकिन वंदना राहुल के निजी जीवन के बारे में पूछने की हिम्मत नही जुटा पाती पर उसका दिल राहुल से प्रेम करने को विवश रहता लेकिन वह अपने प्यार का इज़हार नही कर पा रही थी तभी एक दिन राहुल नेअपनी शादी तय होने की बात बताई जिसे सुन वंदना एक दम जड़वत हो गई और उसके मुँह से कोई बोल न फूटे। राहुल ने शादी की बात जानबूझ कर की क्योकि उसे भी वंदना की तरह ही प्यार था लेकिन दोनों ही अपने दिल की सच्चाई बताने का साहस नहीं कर पा रहे थे ।तभी राहुल के मस्तक मे बिट्रिश लेखिका के उन शब्दों ने झकझोर कर रख दिया ।
“यदि आपके पास खुद को सच बताने की हिम्मत नहीं है, तो निश्चित रूप से आप अपने बारे में किसी को भी सच नही बता सकते।वर्जिनिया वुल्फ के इन्ही शब्दों ने राहुल को ताकत दी कि वह अपने दिली जज्बातो को वंदना के सामने रख अपने प्यार का इज़हार कर सके और राहुल ने बिना झिझक बिना संकोच के वंदना से पूछा क्या तुम मुझसे शादी करोगी इतना सुनते ही वंदना का चेहरा गुलाब सा खिल उठा और पलकें झुक गई जिस खुशी की उसे तलाश थी जिसकी यादों को वह वर्षो से अपने दिल में संजोये हुए थी आज वह अमूल्य निधि उसे मिल गई थी।

 

 

 

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