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Home Writing Contest Hindi Story तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है

“मुझे मर जाना चाहिए, तुम मेरा गला दबा दो| प्लीज मुझ पर रहम करो| तुम खुद बच्चों को संभाल लेना| मुझे बहुत घबराहट हो रही है| पूनम प्लीज मुझे मार दो| नहीं तो मैं ऐसा करता हूँ वो नींद की सारी गोलियां खा लेता हूँ| हाँ मैं ऐसे नहीं जी सकता पूनम तुम सब संभाल लेना| रोता हुआ मनीष अपनी पत्नी पूनम से बार-बार सिर्फ यही कह रहा था कि मुझे मर जाना चाहिए|”
पूनम- भी रो रही थी उसकी आँखों से भी लगातार आँसू बह रहे थे क्योंकि मनीष को इतना कमजोर उसने कभी नहीं देखा था| वो मनीष को समझाती है और कहती है कि कुछ नहीं हुआ है तुम्हें| तुम बिलकुल ठीक हो और फिर मैं तुम्हारे साथ हूँ| तुम्हें घबराने की कोई जरुरत नहीं है| सब ठीक हो जायेगा, तुम सो जाओ| प्लीज सोने की कोशिश करो| पूनम मनीष को उसकी दवाइयाँ देती है और वो पूनम की गोद में सिर रखकर लेट जाता है| मनीष अब भी सिसक रहा था|
पूनम उसके सर पे प्यार से हाथ फेर रही थी और गुनगुना रही थी:-
तेरा साथ है तो, मुझे क्या कमी है
तेरा साथ है तो, मुझे क्या कमी है
अंधेरो से भी मिल रही रोशनी है

बाहों में भरकर, चाँद और तारे
बाहों में भरकर, चाँद और तारे
गगन का कलेजा, ज़मीं को पुकारे
साँसों से थोड़ी उमर मांगनी है
अच्छी बुरी हर घड़ी बांटनी है

तेरा साथ है तो, मुझे क्या कमी हैं
अंधेरों से भी मिल रही रोशनी हैं

थोड़ी देर बाद मनीष गहरी नींद में सो जाता है| लेकिन पूनम उसकी आँखों में तो न जाने कब से ढंग से नींद नहीं आई थी| अपने मनीष की ऐसी हालत देख वो बहुत परेशान थी| डॉक्टर को दिखाया था तो उन्होंने मनीष को डिप्रेशन से पीड़ित बताया था| लेकिन मनीष डिप्रेशन में कैसे जा सकता है| आखिर सब कुछ तो है उसके पास अपना घर-परिवार, अपना नाम और बिज़नेस, 2 प्यारे बच्चे फिर उसे डिप्रेशन कैसे हो सकता है?
अगले दिन पूनम मनीष को फिर डॉक्टर के पास लेकर जाती है| डॉक्टर को जब मनीष की इस हालत का पता लगता है तो वो कहते हैं कि ये बहुत खतरनाक अवस्था है कि जब कोई डिप्रेशन से जूझ रहा हो तो उसके मन में आत्महत्या के विचार आने लगते हैं| कुछ केसेस में तो मैंने देखा है कि लोग खुद को ख़तम करने में कामयाब भी हो जाते हैं| आपको मनीष के साथ ही रहना होगा ताकि वो कोई गलत कदम नहीं उठा सके|
पूनम के पैरों तले से जैसे जमीन निकल जाती है| वो कहती है लेकिन डॉक्टर कोई तो वजह होगी इसकी अभी कुछ महीनों पहले तो ये बिलकुल ठीक था फिर अचानक से किसी को डिप्रेशन कैसे हो सकता है|
डॉक्टर- देखिये पूनम जी इसकी कोई खास वजह नहीं होती| कुछ भी छोटी सी बात से भी इन्सान में ये डिप्रेशन की प्रॉब्लम हो जाती है| जो कभी-कभी इतनी बड़ी हो जाती है कि इंसान खुद को ख़तम करने में ही अपनी भलाई समझता है|
पूनम- लेकिन डॉक्टर अब मैं क्या करूँ| इसका कोई तो इलाज होगा?
डॉक्टर- मैं मनीष की दवाइयाँ बदल रहा हूँ| आपको ध्यान रखना है कि किसी भी समय की दवाई मिस नहीं होनी चाहिए| इसके अलावा आप मनीष के साथ ही रहे| उससे अच्छे लम्हों के बारे में बातें करें| आप दोनों की शादी और बच्चों के होने पर जो ख़ुशी हुई थी उसे सब याद दिलाएं| उसमें जीने की उम्मीद बढायें| डिप्रेशन से जूझते हुए इन्सान का इलाज सिर्फ उसका परिवार है जो उसे हिम्मत दे और हमेशा उसके साथ रहे| आपको भी बस यही करना है|
पूनम- जी डॉक्टर, मैं अपनी पूरी कोशिश करुँगी| मैं उसे ऐसे हारने नहीं दूंगी| पूनम मनीष को लेकर घर जाती है| मनीष बिलकुल चुपचाप बैठा था गाड़ी में, और पूनम जैसे किसी स्वप्न में खो जाती है| जब मनीष उसे पहली बार उसके ऑफिस की सीढ़ियों पर टकराया था|
मनीष- वो अपने माथे पर हाथ रखे बस पूनम को देखता ही रह गया था और उसके मुँह से इतना ही निकला था सॉरी मिस आपको चोट तो नहीं लगी?
पूनम- भी अपने माथे को सहलाते हुए बोल पड़ी थी, ये कोई पार्क नहीं है जो आप भागते चले आ रहे हैं| ये ऑफिस है और आइन्दा जरा ध्यान से चलें| पूनम गुस्से में बडबडाती हुई अपने केबिन की तरफ बढ़ गयी थी| उसे इतना गुस्से में देख उसके ऑफिस की एक सहकर्मी कहती है अरे किस पर गुर्रा कर आ रही है मेरी शेरनी?
पूनम कहती है यार सीढ़ियों पर एक लड़का इतनी तेज टकराया| मेरा तो दिमाग ही हिल गया लग रहा है| पता नहीं अंधों की तरह चलते हैं| जैसे ऑफिस नहीं पार्क में जॉगिंग कर रहे हो?
ललिता- हँसते हुए कहती है शुक्र कर बस सिर ही टकराया है वरना फिल्मों में तो अक्सर ऐसी सिचुएशन में नज़रें टकराया करती हैं और फिर दिल खो जाया करते हैं|
पूनम- ललिता की तरफ गुस्से में घूरती है और ललिता चुप हो जाती है| ललिता लेकिन 1 मिनट बाद ही फिर से हँसने लग जाती है| और उसके साथ-साथ अब पूनम भी हँस पड़ती है|
तभी बॉस पूरे स्टाफ को अपने केबिन में बुलाते हैं| सभी एक-दूसरे से बात कर रहे थे कि बॉस ने यूँ अचानक क्यों बुलाया है?
तभी ऑफिस का चपरासी श्यामलाल कहता है कि आज साहब के बेटे अमेरिका से अपनी पढ़ाई करके लौटे हैं और अब वही साहब की कुर्सी संभालेंगे| इसीलिए साहब आप सबको नए बॉस से मिलवाने के लिए बुला रहे हैं| सभी बॉस के केबिन में पहुँचते हैं|
पंकज गुप्ता- (कंपनी के मालिक) सभी उन्हें गुड मॉर्निंग कहते हैं और वो भी मुस्कुरा कर सभी को गुड मॉर्निंग कहते हैं| वो सभी से अपने बेटे मनीष गुप्ता का परिचय करवाते हुए कहते हैं कि अब से बल्कि आज से यही आपके नए बॉस है| सभी तालियाँ बजाकर मनीष का स्वागत करते हैं| पंकज जी स्टाफ के एक-एक बन्दे का मनीष से परिचय करवा रहे थे और स्टाफ के लोग उनसे हाथ मिला कर उनका स्वागत कर रहे थे|
तभी मनीष की नज़र पूनम पर पड़ती है जो अपनी सहकर्मी ललिता के पीछे छुपकर खड़ी थी| मनीष ललिता से हाथ मिलाता है और फिर उसके पीछे छुपकर खड़ी पूनम से कहता है हेलो मिस……………………
ललिता- पूनम सर, पूनम नाम है इनका|
मनीष- तो आप क्यों बता रही हैं ये क्या बोल नहीं सकती? आई मीन गूंगी हैं क्या?
पूनम- तभी अचानक से बोल पड़ती है नहीं मैं गूंगी नहीं हूँ| हेलो आई एम पूनम गर्ग| अभी जिस से वो सीढ़ियों पर टकराई थी और जाने क्या-क्या बोल दिया था उसे ये तो वही लड़का है सोचकर पूनम के तोते उड़े हुए थे कि ये उसके बॉस का बेटा है और इसी वजह से वो ललिता के पीछे खड़ी थी|
मनीष- मुस्कुराकर कहता है हेलो मिस पूनम| पूनम अब भी उसकी तरफ ठीक से नहीं देख रही थी, लेकिन मनीष उसकी नज़रें तो पूनम पर से हट ही नहीं रही थी|
सिलसिला मोहोब्बत का शुरू हो चुका था लेकिन ये तो एकतरफा प्यार था जिसमें सिर्फ मनीष पड़ चुका था| पूनम को तो कानों कान खबर तक नहीं थी कि उसके बॉस का बेटा उसके प्यार में है| पूनम कोशिश करती थी कि उसे मनीष के सामने न जाना पड़े| लेकिन मनीष तो बस हर काम के लिए उसे ही आवाज देता था| आखिर उसकी बेचैनियों को करार पूनम के दीदार से ही तो आता था|
आज पूनम ने जल्दबाजी में कोई गलत फाइल ले जाकर मनीष की टेबल पर रख दी थी| ये काम उसने मनीष के आने से पहले ही कर दिया था ताकि उसे उसके सामने न जाना पड़े| मनीष ऑफिस में आने के बाद वो फाइल देखता है और गुस्से में चिल्लाने लग जाता है कि ये गलत फाइल किसने रखी है मेरी टेबल पर?
पूनम- बहुत घबरा जाती है और मनीष के केबिन में जाकर कहती है सॉरी सर वो मैंने जल्दबाजी में रख दी| मैं आपके लिए सही फाइल लेकर आती हूँ|
मनीष- कहता है मिस पूनम आप यहाँ काम करने आती है या फिर जल्दबाजी?
पूनम- को अब कुछ नहीं सूझता, वो तो पहले से ही घबरायी हुई थी कि मैंने बॉस के बेटे उस दिन सीढ़ियों पर टकराने की वजह से जाने क्या-क्या बोल दिया था? कहीं ये मुझे नौकरी से न निकाल दे? ये सब सोचकर वो रोना शुरू कर देती है|
मनीष- उसे रोता देखकर मुस्कुरा देता है और कहता है मिस पूनम मैं तो बस मजाक कर रहा था| वो अपनी जेब से रुमाल निकाल कर उसके आगे बढ़ा देता है|
पूनम- उसकी तरफ देखती है और रुमाल लेते हुए कहती है आप सच में मजाक कर रहे थे? कहीं आप मेरी उस दिन की गलती की वजह से मुझे नौकरी से तो नहीं निकल देंगे?
मनीष- यस, मिस पूनम मैं तो बस मजाक कर रहा था| और इस नौकरी से तो मैं आपको निकाल रहा हूँ| मैं चाहता हूँ कि आप दूसरी नौकरी कर लो|
पूनम- हैरानी से उसकी तरफ देखती है, और कहती है दूसरी नौकरी मतलब?
मनीष- मुस्कुराकर कहता है मिस पूनम तुम मेरी ज़िन्दगी में आ जाओ और मुझसे प्यार करने की नौकरी कर लो|
पूनम- चौंक जाती है ये सुनकर और मनीष की तरफ देखने लगती है|
मनीष- कहता है क्या तुम मेरी जीवनसाथी बनोगी मिस पूनम! तुम्हें पहली बार मिलते ही, नहीं वो पहली बार टकराते ही मुझे तुमसे प्यार हो गया था| पहले सोचा शायद आकर्षण है लेकिन अब मैं जान चुका हूँ ये प्यार है| मैं हमेशा सिर्फ तुमसे ही टकराना चाहता हूँ, और इसके लिए तुम्हे हमेशा मेरे साथ रहना होगा| तो बोलो दूसरी नौकरी मंजूर है? मुझे कोई जल्दी नहीं है तुम आराम से सोच कर बता देना| मैं इंतजार करूँगा|
पूनम- जो अभी थोड़ी देर पहले तक डरी हुई थी, वो अब अपनी नज़रें नीचे किये मुस्कुरा रही थी| वो शरमा कर केबिन से बाहर भाग जाती है|
धीरे-धीरे वो मनीष को पसंद करने लगती है| अब वो खुद हर काम के लिए मनीष के केबिन में जाने लगती है| और फिर एक दिन जब मनीष ऑफिस से घर जा रहा था तो उसे पूनम बस स्टैंड पर बस का इंतजार करती हुई दिखाई देती है| वो पूनम को आवाज देकर बुलाता है| पूनम आकर उसकी गाड़ी में बैठ जाती है|
मनीष- पूनम क्या तुमने कुछ सोचा दूसरी नौकरी के बारे में?
पूनम- मुस्कुरा देती है और कहती है मुझे मंजूर है लेकिन मेरे पापा से बात करनी पड़ेगी आपको, अगर वो हाँ करेंगे मैं तभी आपकी दूसरी नौकरी कर सकूँगी|
दोनों एक-दूसरे की तरफ देखते हैं और बिना शब्दों के ही अपने प्यार का इजहार कर देते हैं| घरवालों की रजामंदी से दोनों की शादी हो जाती है और देखते ही देखते कुछ समय में उनके 2 बच्चे भी हो जाते हैं| मनीष पूनम को बहुत प्यार करता है और ये बात किसी से छुपी नहीं थी| पूनम वो तो अपने आप को इतना खुशकिस्मत समझती है तो सिर्फ मनीष की वजह से|
सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन बिज़नेस में हुए एक घाटे ने जैसे सब कुछ बदल दिया था| उसे बिज़नेस में करोड़ों का घाटा हुआ था| मनीष उस सदमें को बर्दाश्त नहीं कर पाया और वो धीरे-धीरे डिप्रेशन में जाने लगा| पूनम को पहले इसका पता नहीं चला था वो तो सोचती थी कि शायद घाटे की वजह से उदास रहते हैं|
लेकिन जब मनीष एकदम चुप रहने लगा तो पूनम ने डॉक्टर से कंसल्ट किया और उन्होंने उसे मनोविश्लेषक को दिखाने की सलाह दी| तब पूनम को पता लगा कि मनीष किस परेशानी से जूझ रहा था| तभी अचानक ड्राईवर की आवाज से वो जैसे होश में आती है| उनका घर आ चुका था| पूनम मनीष को लेकर उसके कमरे में जाती है|
पूनम जी जान लगाकर मनीष को खुश रखने की कोशिश करने लगती है| वो बच्चो को भी पापा के पास ही रहने के लिए कहती है| कभी अपनी शादी की एल्बम मनीष के सामने खोल कर बैठ जाया करती थी और उस समय के कुछ किस्से याद कर के मनीष को सुनाया करती थी| लेकिन मनीष चुप रहता था अब वो खुद को ख़तम करने की बात नहीं करता था लेकिन वो हँसता अब भी नहीं था|
लेकिन पूनम ने अपनी कोशिश को जारी रखा और मनीष को अपना ज्यादा से ज्यादा समय देने लगी थी| आज टीवी पर सलमान खान की एक फिल्म आ रही थी “सुल्तान”| पूनम मनीष और बच्चो के साथ वो फिल्म देखने लगती है| फिल्म में ऐसे कई डायलॉग है जो बहुत प्रेरक हैं| पूनम ने नोटिस किया कि मनीष भी उस फिल्म को देखते हुए उत्साहित दिख रहा था| आज उसके होठों पर मुस्कराहट दिखी|
वो अपने बेटे संकल्प और बेटी मान्या के साथ बैठा हुआ था| फिल्म के आखिरी सीन में सुल्तान फिल्म का वो आखिरी डायलॉग कि ” सुल्तान को कोई तब तक नहीं हरा सकता जब तक वो खुद न हारना चाहे|”  मनीष उसे बहुत ध्यान से सुन रहा था और शायद समझ भी रहा था क्योंकि उसके बाद मनीष की हालत में जो सुधार हुआ था उसे तो खुद डॉक्टर भी हैरान थे|
5 महीने बाद:
मनीष बहुत खुश है क्योंकि अब सब ठीक है उसकी ज़िन्दगी में और आज उसकी शादी की 10 वीं सालगिरह थी| वो अपने पूरे स्टाफ को घर पर पार्टी के लिए इनवाइट करता है| पूनम तैयार होकर जैसे ही नीचे पार्टी में आती है, मनीष पियानो में एक धुन बजाने लगता है-
️️“तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है अंधेरों में भी मिल रही रौशनी है |”️️

 

 

 

 

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं। लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

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Meena Singh
मैं कोई लेखिका नही हूँ बस लिखना चाहती हूँ ज़िन्दगी की हर शय को अपने शब्दों में बांधना चाहती हूँ। उड़ना चाहती हूँ अपनी कलम की उड़ान से, अपनी कल्पना और वास्तविकता को साथ लेकर।

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