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मजोरंजन का बदलता आयाम – कितना सही कितना गलत

हमारे मनोरंजन का हमारे जीवन शैली और हमारे विचार पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।हालिया दौर में वेब सीरीज़ का चलन और बढ़ती लोकप्रियता – इस नए दौर के मनोरंजन पर पढ़े एक विशेष लेख !

वेब सीरीज आज के मनोरंजन की दुनिया का सबसे प्रख्यात और सशक्त साधन है। दुनिया भर में इसके नाम की शोहरत है। एंटरटेनमेंट का यह नौनिहाल ज़रिया जो फिल्मों के जितनी या कई बार उससे अधिक सुर्खियां बटोरने में कामयाब रहा है, आख़िर वह है क्या?
वेब सीरीज वीडियो एपिसोड की एक श्रृंखला है, जिसे इंटरनेट पर प्रसारित किया जाता है। इसके सभी एपिसोड एक साथ रिलीज होते हैं या कई बार साप्ताहिक एपिसोड भी दिखाया जाता है। एक वेब सीरीज में कई एपिसोड हो सकते है और इसके एक से ज्यादा सीजन भी प्रसारित होते हैं। Netflix, Amazon Prime Video, YouTube और इस तरह के बहुत से OTT Platform वेब सीरीज के लिए लोकप्रिय है । इन प्लेटफॉर्मों पर हिंदी सहित अन्य भाषाओं में भी वेब सीरीज देखी जा सकती है ।
वेब सीरीज मनोरंजन की एक ऐसी दुनिया है जो बरबस हमें अपनी ओर खींचती है। जिसने बहुत कम समय में न केवल अपना विशाल दर्शक वर्ग तैयार किया है, बल्कि दर्शकों के दिलों में अपनी गहरी पैठ बनाने में भी कामयाब हुआ है।

किसी जमाने में बाज़ीगर कि उँगली से बँधी डोर से नाचती कठपुतलियाँ हमारा मनोरंजन करती थी। लेकिन आज हम सब बाज़ीगर बन कर अपना मनोरंजन अपनी उँगली के इशारे से नियंत्रित करने में उस्ताद हो चुके हैं।

टीवी, लैपटॉप, टैबलेट, मोबाईल हर जगह वेब सीरीज की पैठ है। इस लॉक डाउन में लूडो और पाक कला के अलावे किसी ने हमारे अधीर मन के मनोरंजन का बीड़ा उठाया था तो वो ये वेव सीरीज की दुनिया ही थी। सर्वविदित है कि जब से इंटरनेट का आगमन हुआ है, समाज की दशा में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। बदलाव का व्यापक असर हमारे रोजमर्रा के जीवन पर और हमारे मनोरंजन पर भी हुआ।
1987-88 टेलीविजन की दुनिया में एक क्रांति सी आई थी। रामानंद सागर ने रामायण धारावाहिक का निर्माण क्या किया, प्रत्येक सप्ताहांत एक महाकुंभ सा हो गया, टेलीविजन के आस-पास का स्थान पूजा स्थल सा पावन बन जाता था।
“मंगल भवन अमंगल हारी….” इस ध्वनि के गूँजने के पहले पूरा मोहल्ला एक साथ टी.वी. के सामने इकठ्ठा हो जाता, धूप दीप के महक से भक्तिमय हुए माहौल में जब स्क्रीन पर पात्रों का आगमन होता तो दर्शक उनमें वास्तविक चरित्रों को पाकर तृप्त होते। बच्चे, बूढ़े, स्त्री सभी एक साथ इकठ्ठे होकर रामायण धारावाहिक के अमृत कुंड में गोते लगाते थे।
उसके बाद नुक्कड़, रंगोली, चित्रहार, महाभारत, चंद्रकांता, मोगली, शक्तिमान जैसे कार्यक्रमों में हम भारतीय परिवार की सामूहिक रुचि बनी रही। फिर 21 वीं सदी के आगमन के साथ ही निजी चैनलों का आगमन हुआ और धीरे-धीरे दर्शकों के प्रत्येक वर्ग को उनके अलग-अलग कार्यक्रमों का स्लॉट मिलने लगा। विविधता का भंडार बढ़ने लगा। कार्यक्रम निर्माता अपने-अपने वर्ग विशेष के मनोरंजन पर इतना अधिक ध्यान केंद्रित करने लग गए कि दूरसे वर्ग पर उनकी पकड़ न केवल ढीली होती गई, बल्कि बिग बॉस के आगमन के बाद ऐसे कार्यक्रमों का चलन बढ़ने लगा जिसे परिवार समेत देखना मुनासिब नहीं है।
अब मनोरंजन जगत इन सबसे आगे निकल कर वेब सीरीज के युग में प्रवेश कर चुका है। जाहिर है कि हमारे मनोरंजन का हमारे जीवन शैली और हमारे विचार पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

हम क्या देखना पसंद करते हैं, इससे यह निर्धारित किया जा सकता है कि हम कैसे समाज की परिकल्पना करते हैं।

इसलिए जब वेब सीरीज हमारे जीवन में धुल मिल कर एक हमारी एक महत्वपूर्ण जरूरत का रूप लेती जा रही है, तो आवश्यक है कि हम इसके विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा करें। जिसके आगामी सीरीज के इंतज़ार में बच्चे, युवा और अब तो बुजुर्ग भी दीवाने होने लगे हैं, उसके समाज पर पड़ने वाले सत्प्रभाव और दुष्प्रभाव दोनों का विश्लेषण अनिवार्य है। इसके पहले जरूरी है कि हम समझें की आखिर क्यों वेब सीरीज जन मानस को इतना लुभा रहा है?

○वेब सीरीज के लोकप्रियता के कारण

याद करती हूँ उस दौड़ को जब मनोरंजन केलिए अपने प्रिय धारावाहिकों के आगामी एपिसोड केलिए बेसब्री से इंतजार करना पड़ता था, और उनकी बिना सिर पैर की कहानी मात्र टी आर पी की हवा भाँप कर उसी दिशा में अंतहीन मुड़ती जाती थी। लेकिन वेब सीरीजों के आगमन ने इस विवशता को विराम दिया।

अब दर्शक मात्र कैमरा मैन और म्यूजिक डायरेक्टर की कारीगरी ही नहीं देखते बल्कि कहानी और अदाकारी देखने का संतोष भी पाते हैं। वेब सीरीज पहले से चलती आ रही टीवी सीरियल और फिल्मों के ढर्रे से अलग है। इसने मनोरंजन के प्रति हमारे नजरिये को और विस्तार दिया है।

वेब सीरीज की जब शुरुआत हुई थी तब हमें इसे देखने के लिए कोई अतिरिक्त पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होती थी अपने इंटरनेट प्लान के डाटा से ही हम इन वेब सीरीजों का आनंद ले सकते थे। जिससे दर्शक इस कड़ी से सहज जुड़ते चले गए।
वेब सीरीज का बेबाक अंदाज़ इसकी लोकप्रियता को और तेजी से बढ़ता है। सेंसरशिप के कारण सिनेमा समाज के जिस रूप को नहीं दिखा पाती, वेब सीरीज उसे बेझिझक सामने लाता है। इसके बोल्ड और आक्रामक दृश्य भी दर्शकों को खूब रिझाते हैं।
वेब सीरीज की अथाह लोकप्रियता के बावजूद इसे विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। समाज पर इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए इसे भारतीय सभ्यता और संसकृति पर प्रहार के रूप में भी माना जा रहा है। आइए जानते हैं इसके समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के विषय में….

○ वेब सिरीज़ के हमारे समाज पर दुष्प्रभाव

1. किशोर अवस्था में बच्चों में नई चीजों के प्रति आकर्षण बढ़ने लगता है। ऐसे में उन्हें सही मार्गदर्शन की नितांत आवश्यकता होती है। लेकिन वेब सीरीज का खुलापन, उसकी आक्रामकता, उसकी चमक उन्हें बरबस अपनी ओर आकर्षित करती है। आज के किशोरों में इसके प्रति उत्साह बहुत ज्यादा है। खेल-कूद और पढ़ाई सब छोड़ कर वेब सीरीज के सभी एपिसोड को देखने को होड़ बढ़ती जा रही है।
2. इसमें खुले आम दिखाए जाने वाले अपशब्द, नशा और अश्लीलता उनके अविकसित मन को विकारों के खाई की और खींचता है।
3. वेब सीरीज बच्चों केलिए लत बनता जा रहा है जो उनमें चिड़चिड़ापन, गुस्सा, मानसिक तनाव, भूख न लगने जैसे विकारों को विकसित कर उनके बचपन को लील रहा है।
4. युवाओं पर भी इनका प्रतिकूल असर हो रहा है। वेब सीरीज में दिखाए जाने वाला नशा व रंगीन जीवनशैली का आकर्षण युवाओं की पसंद बन जाती है। और उन्हें पथ भ्रमित करती है।
ऐसे में एक अभिभावक के तौर पर हमारी जिम्मेदारी कई गुणा बढ़ जाती है। बच्चों के साथ अपने संबंध को हमें मैत्रीपूर्ण रखते हुए इतना विकसित कराना होगा कि बच्चे अपनी प्रत्येक मनः दशा हमसे साझा कर सके। इंटरनेट पर उनकी गतिविधि पर बारीक नजर रखना जरूरी है। बच्चों में बातचीत और मैत्रीपूर्ण व्यवहार से यह समझ विकसित करनी होगी कि उनके लिए क्या सही है और क्या ग़लत। चयन की प्रक्रिया का महत्व बताना और सिखाना अनिवार्य हो गया है। मनोरंजन के इस अति प्रभावशाली साधन के भिन्न-भिन्न पहलुओं की व्यापक समीक्षा हम सबकी जिम्मेदारी हो गई है।
5. वेब सीरीज एक ओर बचपन को भ्रमित कर रहा है तो दूसरी ओर पूरे समाज केलिए भी मीठा ज़हर के बनता जा रहा है। सेंसर बोर्ड की पकड़ से दूर होने के कारण वेब सीरीज समाज का सच ज्यादा पुख़्ता तरीके से दिखने के नाम पर जो अश्लीलता और क्रूरता परोसते हैं, वह हमारे समाज के सेहत केलिए कतई उचित नहीं है। गालियों की अविरल धारा जो यथार्थ के नाम पर उड़ेलते हैं, उसे सुनते हुए हर बार हमारी ही नज़र झुक जाती है। ये कैसी दिशा है जो बेबाकी के नाम पर समाज को असभ्य होने की राह पर ले जा रही है?
वेब सीरीज के तमाम दुष्प्रभावों के बावजूद एक पक्ष इसके सत्प्रभावों को भी सामने रखता हैै।

○ वेब सीरीज के हमारे समाज पर सत्प्रभाव

1. यह मनोरंजन का उम्दा साधन बनकर उभरा है जो हमारे घर, दफ्तर, गाड़ी और यात्रा के समय भी सहज उपलब्ध है। इसने मनोरंजन को समय और सीमित साधन के दायरे से मुक्त किया है।
2. इसमें समाज की छिपी हुई सच्चाई सबके सामने लाई जाती है। समाज का वह पक्ष जिसे दिखाते हुए सिनेमा को सेंसर बोर्ड की कैंची का सामना करना पड़ता है, वेब सीरीज उसे बेखौफ सामने लाता है। इसने हमारे सोच के दायरे को नया विस्तार दिया है। यह हमें सच के सामना केलिए भी उकसाता है।
3. OTT प्लैटफॉर्म के जरिए दर्शकों को निजता मिली है और उन्हें बिना संशय अपने पसंद के कार्यक्रम देखने की सुविधा मिलती है। पहले टीवी पर निर्धारित समय पर आने वाले कार्यक्रम यदि परिवार के साथ देखना मुनासिब न हो तो उसे देखना परेशानी का सबब बन जाता था, लेकिन अब हम अपने समय पर अपनी निजता के साथ कार्यक्रम देख पाते हैं। दर्शकों को चयन करने की सुविधा मिली है कि वह कब और क्या देखना चाहते हैं।
4. नौकरी केलिए घर से बाहर गए युवा नए शहर में परिवार और स्वजनों से दूर स्वयं को अकेला पाते हैं, ऐसे में वेब सीरीज उनके अकेलेपन को कम करता है और उनके मनोरंजन का अच्छा साधन बनकर सामने आता है।
5. इसने हमारे मनोरंजन को सहज कर इस पर होने वाले व्यय को भी कुछ कम ही किया है। सिनेमा हॉल में जाकर सिनेमा देखना और उसके साथ खाने-पीने का ताम-झाम यह सब हमारे पॉकेट पर भरी पड़ता था, लेकिन अब वेब सीरीज के रूप में हमें अपने घर पर आसानी से अपनी मनपसंद फिल्म, धारावाहिक और अन्य कार्यक्रम अपने समयानुकूल देखने का अवसर मिलने लगा है जो हमारा समय और पैसा दोनों बचाता है।
अंत में बस इतना कहना चाहूँगी कि गुण और दोष यह दोनों तो हर निर्माण के साथ सदैव जुड़े हैं। परमाणु का आविष्कार जहाँ हमें ऊर्जा संपन्न बनने का सामर्थ देता है, वहीं विश्व विनाश के कोहराम के लिए भी सचेत करता है। वेब सीरीज भी अपने तमाम उलब्धियों और विशेषताओं के साथ कुछ चुनौतियाँ और विकार साथ लेकर आया है।
आवश्यक यह है कि हम उसे देख कर क्या ग्रहण कर पाते हैं, नई दिशा या जीवन का ग्रहण। दर्शक विवेकशील रहें, सजग रहें और चयन को लेकर सतर्क रहें। निर्माता सच्चाई के नाम पर मात्र आकर्षक उत्तेजना मात्र न पेश करें। गुल्लक, पंचायत, कोटा फैक्ट्री आदि कुछ ऐसे वेब सीरीज हैं जो अश्लीलता, क्रूरता और असभ्य भाषा से दूर रहकर भी हमारा मनोरंजन भी करते हैं और समाज केलिए उचित संदेश भी देते हैं। तो
आइए हम सब अपनी दिमागी तकनीक का उपयोग कर इन मानवनिर्मित आधुनिक तकनीक और सुविधाओं का आनंद लें। खुश रहें, नेक रहें और उन्मुक्त रहें।

 

 

 

 

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं। लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

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5 COMMENTS

  1. Very nice purvi, we always have to balance everything in a life….if webseries show the episode related to present society…it should also shows the good things of the society….so that a perspective mind accept the things according to their mind.
    Very nice article u wrote the good as well as bad impacts of web series to our society. Its upto us what we observe, we should guide our kids too.

  2. बहुत अच्छे तरीके से पक्ष विपक्ष दोनों प्रस्तुत किया है। टेक्नोलॉजी का विकास काफी तेजी से हो रहा है और अब इसके विकास और बदलाव की गति काफी तेजी से बढ़ रही है। हमारे सामने विकल्प हैं और अच्छे बुरे का चुनाव करना हमारे हाथ में है।

  3. बहुत सुन्दर वर्णन। OTT ने सकारात्मक प्रतिष्ठा बनाया है। मनोरञ्जन क्षेत्र में।

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