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लाल गुलाब

महिका सोच में डूबी थी, ये लाल गुलाब किसने भिजवाए! बिना नाम पते का छोटा-सा कार्ड इश्क की महक से सुवासित हो रहा था, लेकिन…….।
एक अनजानी कशिश से महिका का दिल बंध गया। बाहर बसंत की मंद बयार चल रही थी, सबकुछ बेहद सुहावना लग रहा था, शायद यहीं प्यार होता है। बसंती बयार की ये पुरुवईया जनमानस के चित को मतवला कर देती थी।
दिमाग पर बहुत जोर देने पर भी वो कोई अक्स नहीं ढूढ़ पा रही थी। प्यार का पैगाम तो आया है, पर भेजने वाला क्यों अदृश्य है?
रात मोबाइल पर अज्ञात नंबर से मैसेज फ़्लैश हुआ – “हे, महिका लाल गुलाब कैसे लगे।”
“बहुत सुन्दर पर आप हो कौन?”
“खुद सोचो कौन हो सकता है!” कह मैसेज बन्द कर दिया।
महिका को हर दूसरे दिन लाल गुलाब मिलने लगे। उसने कोरियर वाले से पूछा – कौन भेजता है, उसने बताने से इंकार कर दिया।
आज आखिर ये राज खुलने वाला है। लाल गुलाब भेजनें वाले ने कॉफी पर बुलाया है। महिका ने गुलाबी रँग का शरारा -कुरता निकाला पहनने को, जिसकी चुन्नी में कुंदन टंके थे। तैयार हो बेसब्री से पांच बजने का इंतजार करने लगी। कैब ले कॉफी शॉप पहुंची। पहले ही तय तो गया था, कि जिस टेबल पर लाल गुलाब का गुलदस्तां रखा होगा वहीँ वो बैठेगी, गुलाब भेजने वाला खुद ही आ जाएगा।
कुछ मिनटों का इंतजार उसे बहुत लम्बा लग रहा था। तभी सामने जो शख्स खड़ा दिखा, “आप” कह आश्चर्यचकित महिका उठ खड़ी हुई, उसकी पक्की सहेली निक्की का वही खड़ूस भाई निखिल सामने खड़ा था, जिससे उसकी कभी बनती नहीं थी। जब भी निक्की के घर जाती थी तो निखिल बुरा सा मुँह बना, उठ कर वहां से चला जाता था।
“बहुत शर्मीला है भाई” कह निक्की भाई को कवर कर देती।
“काश तू मेरी भाभी बन मेरे घर आ जाती, तो हमारी दोस्ती रिश्ते में बदल जाती”, निक्की के ये कहने पर, महिका मुस्कुरा के रह जाती। सोचती इतने कठोर व्यक्ति से शादी क्यों करुँगी मैं, जिसके चेहरे पर हँसी नहीं आती।
“तुम ठीक हो?” आवाज सुन महिका वर्तमान में लौट आई। निखिल ने दो कप कॉफी का आर्डर दे उसकी घबराहट को दूर करने कि कोशिश की। थोड़ा सहज़ होने के बाद, निखिल ने उसे प्रपोज किया।
“तुम बाध्य नहीं हो हाँ कहने को, जो भी निर्णय लोगी बता देना, क्योंकि मेरा ये मानना है की मोहब्बत के मायने सबके लिए अलग हैं। कौन कब किसकी और कैसी मोहब्बत में पड़ जाये इसका पता खुद मोहब्बत को भी नहीं होता।”
महिका को घर ड्राप कर निखिल चला गया। पर आज महिका ने निखिल को अलग दृष्टिकोण से देखा। रात भर महिका सो नहीं पाई, सुबह की सुनहरी रश्मियाँ एक खूबसूरत सन्देश ले कर आई, मंदिर में घंटी बज रही थी और महिका जी, हाँ महिका के दिल में भी प्यार की घंटी बज उठी निखिल के नाम की। हार्ट बना मैसेज कर दिया निखिल को।

 

 

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Sangita Tripathi
पढ़ना लिखना... ज्ञान का स्रोत हैं... किताबें सबसे अच्छी दोस्त हैं.... जो कभी दगा नहीं देतीं

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