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समोसे के नाम – प्रेम की पाती

ये लेख कलामंथन समूह के लेखक अरबिंद कुमार पण्डे द्वारा लिखित है। आज के दौर पत्राचार का सिलसिला थम चुका है ऐसे में कलामंथन ने दिया प्रेमपत्र लिखने का न्योता और हमे मिले कुछ खूबसूरत पत्र। अरबिंद जी का प्रेम पत्र “प्रिय समोसे के नाम ” ज़रूर पढ़िए !
मेरे प्यारे मित्र समोसा ,
   आज तुम्हारी बहुत याद आ रही है दोस्त।तुम्हारे बारे में सोच कर ना केवल मेरे मुंह में पानी आ रहा है अपितु  मेरी आंखें भी भीग गई हैं । मित्र तुम्हें छूने की बात तो छोड़ो देखे हुए ही 2 महीने से अधिक समय बीत गया है । हम दोनों के प्यार के बीच यह करोना ऐसा खलनायक बनकर खड़ा हो गया है कि ऐसा लगता है हम दोनों का मिलन एक आध वर्ष बाद ही हो पाएगा।
  यह नासपीटा कोरोना पूरे विश्व को बर्बाद किए हुए है। कुछ लोग इसके कारण बीमार हो रहे हैं तो ज्यादातर लोग इसके बारे में सुनकर ही  मरने के कगार पर खड़े हो गए हैं। बी पी बढ़ना,शुगर बढ़ना,हार्ट मे दिक्कत होना इस समय आम बात हो गयी है।
मित्र, समझो इस समय यदि किसी को छींक भी आ जा रही है तो वह यह मान ले रहा है कि अब मौत दूर नहीं रह गई है। गर्मी में भी लगातार गर्म पानी पीने के कारण अंतडिया सूखने के कगार पर खड़ी हो गई हैं। जीने के लिए नींबू, संतरा,अदरक,तुलसी और न जाने क्या-क्या खाना पड़ रहा है।  इस समय लोग अपने घरों में ऐसे दुबक गए हैं जैसे सांप हाइबरनेशन में चले गये हों।
 मित्र ना पूछो की क्या-क्या हो रहा है इस समय इस दुख से भरे  संसार में। नौकर आ नहीं रहे जिसके कारण मेरे जैसे आलसी को भी काम करना पड़ रहा है। बीबी के  मधुर बोल कड़वे हो गये हैं और बच्चों का पूछो ही मत।
     खैर! छोड़ो इन बातों को। तुम्हारी सुंदरता हमें हर क्षण लुभाती है।
तुम्हें बनते और घंटों लगातार खड़े रहकर छनते देखना तुम्हारे प्रति मेरी दीवानगी को दर्शाता है।
तम्हारी प्यारी नुकीली नाक,सुंदर से दो कान और परतों में सिमटा पीला बदन किसी गोरी खूबसूरत नवयौवना जैसा लगता है। तुम्हारे पीले रंग पर जब थोड़ी लालिमा आ जाती है तो ऐसा लगता है मानो एकाएक प्रेमी के दिख जाने पर प्रियतमा के गाल शर्म से लाल हो गए हों।
क्या अद्भुत सौंदर्य है तुम्हारा । तुम अप्रतिम हो  मेरे दोस्त । तुम्हें खाने के बाद जो तृप्ति का भाव मन में उत्पन्न होता है वह जीवन के कुछ विशेष क्षणों में ही उत्पन्न हो पाता है ।
   क्या कहूं मेरे दोस्त अब कुछ कहा नहीं जा रहा है। तुम्हारी जुदाई सहन करना कठिन हो रहा है।  बस दुआ करो कि यह कोरोना खत्म हो, लॉकडाउन हटे और हम , तुम जल्दी से एकाकार हों।  चलो तब तक  दिल पर पत्थर रखकर  बाय-बाय करते हैं मित्र ।
    तुम्हारा चाहने वाला
   अरविन्द कुमार पांडेय

 

 

 

 

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं। लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

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