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आशिक-ए-वतन

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका रागिनी प्रीत द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया प्रेमपत्र लिखने का न्योता और हमे मिले कुछ खूबसूरत पत्र। किरण शुक्ला का प्रेम पत्र “आशिक-ए-मोहब्बत ” ज़रूर पढ़िए !
मेरे प्यार!
समर्पित करती हूंँ तुम्हें सिर्फ प्यार, प्यार और प्यार…।
कब से कहना चाहती थी, लेकिन जाने क्यों कभी कह न पाई। शायद यह सोचकर कि प्यार ही तो है, दिल की बात दिल समझ ही लेगा। लेकिन आज जब इश्क़ महोत्सव चल रहा है, प्यार कि ख़ुमारी सब पर चढ़ गई है, तो मैं भी ख़ुद को रोक न सकी। आज मैं अपना प्यार बायांँ करती हूंँ, क्या हो तुम मेरे जीवन में तुम्हारी अहमियत मैं तुम्हें बताती हूंँ।
मेरे प्रिय, प्यार में अक्सर लोग बावले हो जाते हैं, अपना तन मन सर्वस्व निःस्वार्थ समर्पित कर देते हैं। समर्पण का यह भाव अक्सर मैंने अपने भीतर भी महसूस किया है। लेकिन जाने क्यों अब तक हमेशा तुमसे बस पाया है, कुछ दे पाने की चाह मन में ही रह गई। मेरी सांँसे, मेरे सपने, मेरा जीवन सब तुम्हीं से तो है। तुम प्रेम की विशाल भूमि हो और मैं उसपर पनपी एक फूल का पौधा। अपनी खुशबू के सिवाय और तुम्हें क्या से सकती हूंँ!

क्या अपनी ये महक मैं तुम्हें समर्पित कर दूंँ? लेकिन यह महक भी अभी बहुत मद्धिम है जो तुम्हें पूर्णतः सुवासित करने में समर्थ नहीं। तो और संचय करती हूंँ अपनी खुशबू और जिस दिन यह इत्र तुम्हें भिगोने लायक इकठ्ठा हो जाय, मैं वह सब तुम पर उड़ेल दूंँगी।

वह एक दिन नहीं जब मैं खुद को तुम्हारे प्यार से अछूता पाऊंँ। हवा के ठंडे झोंके, बारिश की बूंँदे, चिड़ियों की चहचह, पानी का कलकल…. सब मुझ पर तुम्हारा प्यार उड़ेलते हैं। तुम्हारा ऊंँचा कद, उन्नत मस्तक, विशाल हृदय, विविध रंगों के इंद्रधनुषी आभा से दमकता व्यक्तित्व, कहो भला कौन तुम्हारा कायल हुए बिना रह सकता है?
जैसे कृष्ण की अनेक गोपियांँ थी और कृष्ण एक, वैसे ही तुम्हारे प्रेम का असर जब सब ओर सब पर देखती हूंँ तो तुम्हें उसी छबीले कृष्ण सा पाती हूंँ। बताओ तो भला, वह कौन है जो तुमसे एक बार मिलकर, तुम्हें देखकर और तुमको जानकर तुम्हारा दीवाना न हुआ हो! यह सब देख कर मेरा अभिमान और बढ़ जाता है, लेकिन कुछ कंटीली निगाहें हैं, जिनकी चुभन मुझे तनिक भी रास नहीं आती। प्यार करती हूंँ तुमसे, तो वादा है कि उन कांँटों के झुरमुट से तुम्हें कभी आहत न होने दूंँगी। तुम्हारे प्रेमिकाओं में मेरा स्थान राधा, मीरा, सूर या रखसान होने के निकट भी नहीं, लेकिन एक गोपी के ओहदे को पाकर ही धन्य हुई जाती हूंँ।

बस एक सपना है कि किसी दिन अपना सब वार जाऊंँ तुम पर, और तेरी सांँसों में घुल मिल जाऊंँ। कि जो जीवन तुम्हारे प्यार को समर्पित किया है उसे बस तुम्हारे ऊपर निसार जाऊंँ मैं।

सुनो! तुम तक मेरे प्रेम की महक तो जाती होगी, तुम्हारे पास पसरे प्रेम के तमाम दिव्य सुगंधों में मेरे इश्क़ की भीनी महक पहचान तो लेते हो ना तुम! जरूर पहचानते होगे, तभी तो तुमसे लिपट कर लौटी हवाएंँ मुझे अपने आगोश में कुछ देर तक थामे रहती हैं। उनमें तुम्हारे आलिंगन की गर्माहट मिलती है मुझे।
देखो ना, चारों ओर कैसा प्रेममय माहौल है। बस प्यार की बातें, प्यार के किस्से। वसंत में प्रेम की पंखुड़ियांँ स्वतः खुलने लगी है। प्यार के इज़हार और इक़रार के इस दौर में मैं भी तुम्हें यह प्रेम पत्र लिख रही हूंँ। जब मेरे शब्द तुम्हारे लबों को छुएंँगे ना… मैं भी तब तुम्हारे स्पर्श के रूमानियत को महसूस कर सकूंँगी।
तुमने इतना कुछ तो दिया है अपनी इस अनाम प्रेमिका को, लेकिन जब प्रेमी प्रेमिकाओं को प्रेम की अविस्मरणीय यादों को समेटे  उपहार का आदन-प्रदान करते देखती हूंँ, तो मेरा मन भी तुमसे उस यादगार उपहार को पाने को मचल जाता है जो तुम अपने सबसे अज़ीज़ चाहने वालों को देते हो। तुम समझ गए ना क्या? वही “बसंती चोला” जिसे तुमने अपने तमाम दीवाने प्रेमियों को दिया। भगत सिंह ने पाया, लक्ष्मी बाई ने पाया, चंद्रशेखर और बिस्मिल्ला खान ने पाया, सरोजिनी नायडू, महात्मा गांधी और रानी चेनम्मा ने भी पाया, और तुम पर दिल-ओ-जाना लुटाने की चाह रखने वाले प्रत्येक मतवाले ने पाया।
जानती हूंँ तुम अपना सब कुछ अपने प्रेमियों पर सहज वार देते हो, लेकिन इस चोले का हकदार होना सबके बस की बात भी तो नहीं। वह निश्छल प्रेम और समर्पण सबमें कहांँ मिल पाता है। लेकिन उस निश्छलता को पाने की कोशिश करना मेरे बस में है। मेरे देश…मेरे भारत….मेरे प्यार….!!! मुझे भी एक दिन तुमसे उसी चोले की चाह है जिसे ओढ़ कर प्रेम अमर हो जाता है।
अंत में बस इतना ही कहना चाहूंँगी कि दिन-ब-दिन तुम्हारे आशिकों की तादात बढ़ती रहे, तुम्हारा नाम सबके दिलों में प्रेम की ज्योत की तरह जले, तुम्हारा, क़द और तुम्हारा गौरव मिसाल बना रहे। मेरे भारत! मुझे हर जनम बस तुम्हारा ही आलिंगन चाहिए, मुझे हर घड़ी बस तुम्हारी ही आरज़ू चाहिए….आमीन…!!!
तुम्हारे प्रेम में डूबी
रागिनी प्रीत

 

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं। लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।

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