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Home Blog Contest एक कप चाय बनी गर्व की वजह !

एक कप चाय बनी गर्व की वजह !

रात की नीरवता में फ़ोन की घंटी की ट्रिंग ट्रिंग, ने मेरी नींद से बोझिल पलकों ने बड़ी मुश्किल से अपना आलस्य छोड़ा। फ़ोन उठाया, पता चला हमारे एक मित्र की पत्नी को ब्लड चाहिए था। हम लोग टाउनशिप में रहते थे| सब एक दूसरे को जानते थे।सभी एक दूसरे के लिए खड़े रहते थे।
मित्र की पत्नी चार माह की गर्भवती थी।और उनका फेलोपीयन ट्यूब फट गया गया था। जिससे बच्चें को नहीं बचाया जा सका और मित्र की पत्नी का जीवन खतरे में हो गया था |
छोटा अस्पताल था, ब्लड बैंक नहीं था| मित्र की पत्नी को भी ब्लड की जरूरत थी।रात ज्यादा होने से ये जानकारी नहीं मिल पा रही थी की, उनके ब्लड ग्रुप वाले कौन हैं, फिर भी जितना लोगों को जानते थे बुलाया गया।
हम पति -पत्नी अस्पताल पहुंचे। पता चला चार लोग ब्लड दे चुके, हम दोनों को भी देना हैं.पति के देने के बाद, मैंने भी ब्लड दिया।फिर मै घर आ गई, घर में बच्चें अकेले थे। रात भी बीत गई थी। सुबह के चार बज रहे थे।
मैंने पति को बोला,मै अस्पताल में लोगों के लिए चाय बना देतीं हूँ क्योंकि डॉक्टर्स रात से मित्र की पत्नी को बचाने में लगे हुए थे।इस समय सबको चाय और कुछ खाने की जरूरत होंगी|छोटा अस्पताल होने से रात में कैंटीन बन्द रहता था।
अगले दिन मै अस्पताल गई, तो डॉक्टर्स ने भी मुझे धन्यवाद दिया। ब्लड के लिए तो सभी आभारी थे,…क्योंकि ब्लड देने वाली मै अकेली महिला थी! पर साथ ही समय पर चाय, बिस्कुट मिलने से सबने ने ऊर्जा महसूस की..।
मुझे उस दिन अपने नारी होने पर गर्व हो आया| क्योंकि हाउसवाइफ होते हुए भी मैंने घर और बाहर दोनों ही अच्छे से संभाला।आज एक कप सादी सी चाय उनके चहरे पर मुस्कराहट ले आयी जिन्हे हम धरती पर भगवन मानते हैं।
जरूरत के समय की गई मदद,भले ही छोटी हो,पर समय पर की जाने से उसका महत्व बढ़ जाता हैं। समय ने यहीं सीख दी।

 

 

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Sangita Tripathi
पढ़ना लिखना... ज्ञान का स्रोत हैं... किताबें सबसे अच्छी दोस्त हैं.... जो कभी दगा नहीं देतीं

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