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ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में कब आयेगा

 

ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में कब आयेगा
यादों के भूले बिसरे हुऐ हुजरे ,तू कब वापस लायेगा!
अब इंतिहा हो गई ,
आंखो में अशुओ का पुलिंदा लिए
मेरे यार को ,कब्र से न जानें अब कौन लायेगा !!१!!
ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में कब आयेगा
ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में कब आयेगा
मेरी पलकों की जुबां पर ,
फूलो सी चहक अब कौन लायेगा!
अब इंतिहा हो गई ,
उस मां की आंखो को रास्ता तकते तकते
ना जाने अब उसके लाल को
उस आसमाँ से अब कौन लायेगा !!२!!
ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में कब आयेगा
ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में कब आयेगा
यादों के भूले बिसरे हुऐ हुजरे ,तू कब वापस लायेगा!
अब इंतिहा हो गई ,यू सरहदे बनते संवारते
इन इंशानो में इंसानियत की लहक अब कौन लायेगा!!३!!
ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी मै कब आयेगा!

 

 

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