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कोई मेरे जैसी …

उस पार,
कोई मेरे जैसी,
आँख मिचौली खेलती अपने आप से,
खुद को समझाती, सपनों को पूछती
क्या तुम कभी सच होते हो
या बाकी सब की तरह तुम भी बस दिलासा ही देते हो ||
मैंने अम्मा से कहा कल तुम्हारे बारे में
वो बोली हट पगली ये भी क्या लड़कियों के करने की चीज हैं,
पूछा था मैंने भैया से भी कुछ दिन पहले
तब जवाब आया था ये लड़कियों बाली बातें मुझसे ना किया करो ||
अब कोई तो समझाये मुझे मेरा दायरा,
कोई कहे लड़की है ये ना कर
कोई कहे लड़की है ये किया कर
बस इसी में घसती ये मेरी नन्ही ख्वाहिशें,
कुछ टूटे सपने, और कुछ कभी ना सच होने वाले ख्वाब
मैंने पूछा सपनों से
क्या तुम कभी सच होते हो
या बाकी सब की तरह तुम भी बस दिलासा ही देते हो

 

 

कलामंथन भाषा प्रेमियों के लिए एक अनूठा मंच जो लेखक द्वारा लिखे ब्लॉग ,कहानियों और कविताओं को एक खूबसूरत मंच देता हैं। लेख में लिखे विचार लेखक के निजी हैं और ज़रूरी नहीं की कलामंथन के विचारों की अभिव्यक्ति हो।हमें फोलो करे Facebook

Anushree Dash
Freethinker,Experimentalist, 1 Part Entrepreneur ,2 Parts Blogger ,3 Parts photographer ,4 Parts poetess, Too many Parts. A free-spirited,non-conformist,independent,adventurous,boho soul and an admirer of life.Loves my Indian roots, Culture, Aesthetic Living, Saree, Poetry …

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