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कवि महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘ निराला’

  वर दे, वीणावादिनी , वर दे! प्रिय स्वतंत्र- रव अमृत-मंत्र तव भारत में भर दे! काट अंध- उर के बंधन स्तर बहा जननी ज्योतिर्मय निर्झर कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर, जगमग...

Poetries & Ghazals

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बांझाकरी की प्रेमिल कविता

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका प्रियंका गहलोत द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

मेरे प्रिय रेडियो

मेरे प्रिय रेडियो, तेज हवाओं ने खिड़की के पल्ले को आपस में टकराने पर मजबूर कर दिया है। मैं भी बिस्तर से उठ कर अलसाई...

आशिक-ए-वतन

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका रागिनी प्रीत द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

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  ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका किरण शुक्ला द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

ख़्वाब को चिठ्ठी

      ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका अपर्णा प्रधान द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

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Ghazals

ख़ामोशी अच्छी नहीं

गर शोर है दिल में भरा, तो ख़ामोशी अच्छी नहीं जो ग़ैर हाथों में फँसी वो ज़िंदगी अच्छी नहीं इक बार की ही हार है, इस...

दीद जगमगाई है रोशनी तुम्हारी है

दीद जगमगाई है रोशनी तुम्हारी है चांद और सितारों की ज़िदगी तुम्हारी है रंग से भरी दुनिया रूप से भरी दुनिया कल भी ये तुम्हारी थी आज...

अब रूबरू अपने मुझे पाओगे नहीं तुम

अब रूबरू अपने मुझे पाओगे नहीं तुम जब तक के मोहब्बत से बुलाओगे नहीं तुम हाँ इसलिए भी तुमसे कभी रूठा नहीं हँ मैं जानता हँ मुझको...

झूठा सच्चा है मान लेता हूँ वह जो कहता है मान लेता हूँ

झूठा सच्चा है मान लेता हूँ वह जो कहता है मान लेता हूँ मिलते जुलते नहीं हैं फिर भी चलो तुमसे रिश्ता है मान लेता हुं इसज़लीए दश्त...

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POETRIES

प्रेम

प्रेम, प्रणय क्रीड़ा से.. प्रस्तुत नहीं होता.. प्रेम, अंग प्रत्यंग की लालसा से गहरा नहीं होता.. प्रेम,, दो देह से गुजर कर भी पूरा नहीं होता.. ..... प्रेम,, ह्रदय पीड़ा से, प्रशस्ति...

Missing myself

Humming “Khaali hai jo tere bina, mai wo ghar hu tera..”, She lies on her bean bag, sipping coffee and doodling in air, Sunrays sprinkling through...

याद जब घर की आती है , तो आंखें भर ही आती है

याद जब घर की आती है , तो आंखें भर ही आती है उनके मकतूब बैचैनी , ना जाने क्यों सताती है! अब मेरी आखों को...

दोस्ती

कभी चाय की प्यालियों से छलकती है दोस्ती कभी कांफी की खुशबू बन जाती है लस्सी की गिलासों में चीनी बन घुलती है बारिश में भीगी महक...

GHAZALS

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"मुझे मर जाना चाहिए, तुम मेरा गला दबा दो| प्लीज मुझ पर रहम करो| तुम खुद बच्चों को संभाल लेना| मुझे बहुत घबराहट हो...

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महिका सोच में डूबी थी, ये लाल गुलाब किसने भिजवाए! बिना नाम पते का छोटा-सा कार्ड इश्क की महक से सुवासित हो रहा था,...

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