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अम्मा का इंतकाल

बालपन में घटित एक दुःखद घटनकाल की सुखद अनुभूतियाँ, ये मेरे बालपन का संस्मरण है,जब मासूमियत दिल पे हावी होती है और ज़ुबाँ पे...

Poetries & Ghazals

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अनुराधा

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भाभी माँ

कभी-कभी जिंदगी आपको बहुत बड़े धर्म संकट में डाल देती है पर आपको कोई ना कोई ना कोई निर्णय लेना ही होता है।मैंने भी...

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अब रूबरू अपने मुझे पाओगे नहीं तुम

अब रूबरू अपने मुझे पाओगे नहीं तुम जब तक के मोहब्बत से बुलाओगे नहीं तुम हाँ इसलिए भी तुमसे कभी रूठा नहीं हँ मैं जानता हँ मुझको...

झूठा सच्चा है मान लेता हूँ वह जो कहता है मान लेता हूँ

झूठा सच्चा है मान लेता हूँ वह जो कहता है मान लेता हूँ मिलते जुलते नहीं हैं फिर भी चलो तुमसे रिश्ता है मान लेता हुं इसज़लीए दश्त...

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हो जाता है प्यार तो होने दे इसे

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कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में कब आयेगा

  ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में कब आयेगा यादों के भूले बिसरे हुऐ हुजरे ,तू कब वापस लायेगा! अब इंतिहा हो गई , आंखो में अशुओ का पुलिंदा...

प्रेम

प्रेम, प्रणय क्रीड़ा से.. प्रस्तुत नहीं होता.. प्रेम, अंग प्रत्यंग की लालसा से गहरा नहीं होता.. प्रेम,, दो देह से गुजर कर भी पूरा नहीं होता.. ..... प्रेम,, ह्रदय पीड़ा से, प्रशस्ति...

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 रवि अपने यादों के किरणों को समेटने की अथक कोशिश कर रहा था परन्तु ,"क्या समेटने की भी कोई सीमा होती है ,क्या सोचने...

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  "मां! मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकता, मैं उस आदमी को माफ नही कर सकता जिसने तुम्हारी ज़िंद्गी बेरंग कर दी हो। कम से...

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