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सुजीत सरकार की नायिकाएं

सुजीत सरकार की फ़िल्में कई मायनों में एक ताजगी लिए होती हैं| उनकी फिल्मों की पटकथाओं के साथ ही, उनके किरदार भी लम्बे समय...

Poetries & Ghazals

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यह कैसी सज़ा ?

"आह! पानी...पानी...कोई पानी पिला दो।" कराहते हुए दीपू ने अपनी अधमुँदी आँखें खोलकर इधर- उधर देखा। पपड़ाए सूजे हुए होठों पर ,जीभ फिराकर उन्हें गीला...

ये मोह मोह के धागे

"अरे! बेटा रूही इतना घबराओ मत, कल तुम्हें हमारे घर बहू बन कर आना है कोई गुलाम बन कर नहीं"। यह बोल कर सुमन...

फैमिली ट्रिप

  बाण गंगा को पीछे छोड़े अभी आधा घण्टा ही हुआ था कि माताजी ने ऐलान किया कि भईया उनसे न हो पाएगा। बहुत विचार...

एक सुबह

 चंद्रकांत जी आज सुबह उठे ही थे की बगल का बिस्तर खाली देखकर उनका मन खिन्न हो गया था। जनाब पैंतीस सालों में ऐसा...

जुलाई लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

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Ghazals

ख़ामोशी अच्छी नहीं

गर शोर है दिल में भरा, तो ख़ामोशी अच्छी नहीं जो ग़ैर हाथों में फँसी वो ज़िंदगी अच्छी नहीं इक बार की ही हार है, इस...

दीद जगमगाई है रोशनी तुम्हारी है

दीद जगमगाई है रोशनी तुम्हारी है चांद और सितारों की ज़िदगी तुम्हारी है रंग से भरी दुनिया रूप से भरी दुनिया कल भी ये तुम्हारी थी आज...

अब रूबरू अपने मुझे पाओगे नहीं तुम

अब रूबरू अपने मुझे पाओगे नहीं तुम जब तक के मोहब्बत से बुलाओगे नहीं तुम हाँ इसलिए भी तुमसे कभी रूठा नहीं हँ मैं जानता हँ मुझको...

झूठा सच्चा है मान लेता हूँ वह जो कहता है मान लेता हूँ

झूठा सच्चा है मान लेता हूँ वह जो कहता है मान लेता हूँ मिलते जुलते नहीं हैं फिर भी चलो तुमसे रिश्ता है मान लेता हुं इसज़लीए दश्त...

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मील के पत्थर

सुनो.... ए मील के पत्थर। अब मुझे तुम्हारी दरकार नहीं। नहीं देखती अब मैं तुम्हारे माथे पे अंकित वो अंकगणितीय छाप के.... अब मुझे नहीं फ़र्क़ पड़ता क्या है रास्ते...

कोई मेरे जैसी …

उस पार, कोई मेरे जैसी, आँख मिचौली खेलती अपने आप से, खुद को समझाती, सपनों को पूछती क्या तुम कभी सच होते हो या बाकी सब की तरह तुम...

हो जाता है प्यार तो होने दे इसे

किस बात पे तू हैरान  है ? किस बात पे तू परेशान है ? हो रहा है प्यार जो तो हो जाने दे इसे। प्यार ही तो है; कोई...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

GHAZALS

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झूठा सच्चा है मान लेता हूँ वह जो कहता है मान लेता हूँ

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गीतिका अपने कमरे के झरोखे से बाहर के नजारों को निहार रही थी। शादी के बाद उसे पहली बार राजीव के साथ अकेले में...

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  बीती रात बड़ी भयंकर आँधी आई और वैशाख के महीने में आषाढ़ सा पानी बरसा। राधा बहू को यह सौंधी खुशबु वाली भोर बड़ी...

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