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Alka Nigam

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घरौंदा

"घर हवा में नहीं बनते।" आयुष ने कटाक्ष करते हुए कहा, "और हाँ तुम्हारी इस दो कौड़ी की टीचर की नौकरी और इन फालतू कविताओं...

अम्मा का विमान

बालपन में घटित एक दुःखद घटनकाल की सुखद अनुभूतियाँ, ये मेरे बालपन का संस्मरण है,जब मासूमियत दिल पे हावी होती है और ज़ुबाँ पे...

इच्छा

"दी अपने अंदर के सच को बाहर आने दो,वर्ना ये जलकुंभी बन तुम्हारे मन के जलाशय को दूषित कर देगा।" "तुम कहना क्या चाहती हो...

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कठपुतली

  रविवार के दिन था । रोज़ की तरह महेन्द्र जी चाय की चुस्कियों के बीच अख़बार पढ़ने में तल्लीन थे । तभी उनकी नन्हीं...

डोमिन

भारत में गंगा नदी जीवन रेखा है।जाने कितनी ही सभ्यताएं इसके दो किनारों पर पली, आगे बढ़ी मिटी  और फिर नए सिरे से बढ़ने...

कोई मेरे जैसी …

उस पार, कोई मेरे जैसी, आँख मिचौली खेलती अपने आप से, खुद को समझाती, सपनों को पूछती क्या तुम कभी सच होते हो या बाकी सब की तरह तुम...

जून माह लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...