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Anchal Ashish

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मृगतृष्णा

रिया को चलते - चलते शाम हो गई थी। सूरज के डूब जाने से आसमान थोड़ा नारंगी, थोड़ा गुलाबी हो गया था। वह रुक...

थम जाती कलम भी आज

थम जाती कलम भी आज ठहर जाती उंगलियां भी आज मैं लिखना चाहती हूं ' प्रेम ' लिख डालती हूं ' क्षोभ ' लिखना चाहती हूं ' वीरता...

अब लौट आओ

रात गहरी थी, सड़क बिल्कुल सुनसान थी, कुछ कुत्ते थोड़ी - थोड़ी देर पर भौंक कर रात को और भयानक बना रहे थे। सड़क...

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कवि महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘ निराला’

  वर दे, वीणावादिनी , वर दे! प्रिय स्वतंत्र- रव अमृत-मंत्र तव भारत में भर दे! काट अंध- उर के बंधन स्तर बहा जननी ज्योतिर्मय निर्झर कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर, जगमग...

बांझाकरी की प्रेमिल कविता

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका प्रियंका गहलोत द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

मेरे प्रिय रेडियो

मेरे प्रिय रेडियो, तेज हवाओं ने खिड़की के पल्ले को आपस में टकराने पर मजबूर कर दिया है। मैं भी बिस्तर से उठ कर अलसाई...

आशिक-ए-वतन

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका रागिनी प्रीत द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...