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Ekta Rishabh

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एक कोशिश अपनी कल्पना को पंख देने की... एक कोशिश अपने सपने खुद सजाने की... !

गृह प्रवेश

बाज़ार में घूमते घूमते मेरी नज़र साड़ियों की दुकान पे जा टिकी कांच की खिड़की से झांकते उस पुतले पे सजी गुलाबी साड़ी सुन्दर...

अनुराधा

रात का अंधेरा और गहरा होता जा रहा था साथ ही मेरे भीतर की जदोजहद भी गहरी होती जा रही थी | बीते कुछ...

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कठपुतली

  रविवार के दिन था । रोज़ की तरह महेन्द्र जी चाय की चुस्कियों के बीच अख़बार पढ़ने में तल्लीन थे । तभी उनकी नन्हीं...

डोमिन

भारत में गंगा नदी जीवन रेखा है।जाने कितनी ही सभ्यताएं इसके दो किनारों पर पली, आगे बढ़ी मिटी  और फिर नए सिरे से बढ़ने...

कोई मेरे जैसी …

उस पार, कोई मेरे जैसी, आँख मिचौली खेलती अपने आप से, खुद को समझाती, सपनों को पूछती क्या तुम कभी सच होते हो या बाकी सब की तरह तुम...

जून माह लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...