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Kiran Shukla

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मैं किरण शुक्ला एक गृहणी हूं। मैं नवाबों के शहर लखनऊ की रहनेवाली हूं। थोड़ा बहुत लिखने का शौक पहले से था लेकिन जिंदगी की व्यस्तताओं मे ये शौक ज़रा पीछे छूट सा गया था। कला मंथन मंच की आभारी हूं जिसकी वजह से मैंने नए सिरे से अपने शौक को वक्त देना शुरू किया है। सही मायने मे नवलेखिका हूँ जो शायद आजकल की पीढ़ी के लिए लिखने का प्रयास कर रही हूं। उम्मीद करती पढ़ने वालों की अपेक्षा पर खरी उतरूं।

जश्न

पाखि अपने माता पिता की एक मात्र संतान थी।शहर मे उसके पिता जाने माने रेडीमेड कपड़ों के व्यापारी थे। "पाखि गारमेंट्स" के शोरुम शहर...

संजोग

मुसाफिर हूँ यारों ना घर है ना ठिकाना, मुझे चलते जाना है ना जाने क्यों आज जितेंद्र का ये पुराना गाना बहुत याद आ रहा...

काश…

गुड़िया रानी, बिटिया रानी पारियों की नगरी से एक दिन राजकुवर जी आयेंगे, महलों में ले जायेंगे। मेरी पत्नी मेरी पांच साल की नातिन को सुलाने की...

ममता की आस

  चंदा है तू , मेरा सूरज है तू बंगले के बगल के मोड़पर पान की दुकान पर रेडियों पर गाना बज रहा था।यूँ तो श्यामा...

ठहरा हुआ पतझड़

 रैना बीती जाऐ, श्याम ना आये निन्दिया ना आये....... एक सुरीली आवाज ने मेरी निद्रा भङ्ग कर दी लेकिन बुरा नही लगा, वो आवाज थी इतनी...

वो बारिश।

        इवनिंग शिफ्ट होने की वजह से डॉक्टर अजय दोपहर में अपने अस्पताल के लिए निकले थे।शहर की लाइब्रेरी की लाला बत्ती...

बातचीत पर टिकी सम्बन्धों की डोर

बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाय सौंह करे भौंहन हंसे देते कहें नटि जाय। हिंदी साहित्य जगत में उच्च कोटि के कवि बिहारी जी का...

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सवालों पर बेड़ियाँ – पितृसत्ता की तिलमिलाहट

अक्सर सोचती हूँ की न लिखूं। ये रोज़मर्रा की बातें हैं और घटियापन ,ओछेपन और बीमार मानसिकता पर तो जी ही रहें हैं हम। अपने काम...

अंतरज्वाला

इधर कुछ दिनों से अंजलि बैंक से काफ़ी देर से लौटने लगी थी। अंजलि और अजय दोनों कामकाजी थे। अंजलि बैंक में और अजय...

दो दिल मिले चुपके-चुपके

  "निलेश आज जो हुआ वो ठीक नहीं था" " हां सीमा इस बात का मुझे भी एहसास है कि हमसे अन्जाने में बहुत बड़ी गल्ती...

अब बस

  रूपा सुबह सुबह हाँथ में चाय का कप लिए हॉल में बैठकर टीवी देखते हुए चाय पी रही थी कि तभी उसको डोरबेल की...