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Meena Singh

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मैं कोई लेखिका नही हूँ बस लिखना चाहती हूँ ज़िन्दगी की हर शय को अपने शब्दों में बांधना चाहती हूँ। उड़ना चाहती हूँ अपनी कलम की उड़ान से, अपनी कल्पना और वास्तविकता को साथ लेकर।

मुलाकात इक अजनबी से

  उस दिन सुनहरी धूप खिली थी| मैं हर सुबह की तरह पार्क में टहलने गयी थी| थोड़ी देर टहलने के बाद मैं थक कर...

बहनों के लिए माँ

  जीवन में  कुछ खास पल होते हैं जब एक स्त्री को उसके स्त्रीत्व पर गर्व की अनुभूति होती है| वो पल जब वो छोटी...

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है

"मुझे मर जाना चाहिए, तुम मेरा गला दबा दो| प्लीज मुझ पर रहम करो| तुम खुद बच्चों को संभाल लेना| मुझे बहुत घबराहट हो...

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अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...