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Sushma Tiwari

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माई की कत्थई साड़ी

  हवाई जहाज की खिड़की से बाहर सब कुछ धुला हुआ सा लग रहा था। अगर मौका कोई और होता तो शायद मान्यता पचपन की...

मेरे प्रिय रेडियो

मेरे प्रिय रेडियो, तेज हवाओं ने खिड़की के पल्ले को आपस में टकराने पर मजबूर कर दिया है। मैं भी बिस्तर से उठ कर अलसाई...

झुठलाते सच

नीरसता बढ़ती ही जा रही थी। उसकी जिंदगी में कम, उसके ऑफिस में ज्यादा। आज फिर आहना का काम करने का मन ही नहीं...

तुम जो आए जिंदगी में

अलसाई आंखों को मलते हुए पूर्वी ने बिस्तर से उठकर आईने में एक बार खुद को देखा फिर बेतरबी से बाल एक जूड़े में...

वो दौर और प्यार

वो दौर ही कुछ और था। फिजाओं में प्रेम खुशबु की तरह यूँ फैलता था कि बिन बताये चेहरे की चमक देख दोस्त जान...

मेरी खुशी

उसका आना मेरे लिए जिंदगी की एक नई शुरुआत थी। "खुशी".. खुशी नाम दिया था मैंने उसे, पता नहीं उसका असली नाम क्या था। जब...

एक सुदृढ़ फैसला

राशि के कानो में सबकी बाते हथौड़े की तरह लग रही थी। फिर भी जाने क्यों कुछ कहने की हिम्मत वो जुटा नहीं पा...

तुम लौट आओ ना

"मुझे एक और मौका दोगी क्या? प्लीज!" अर्जुन ने हिम्मत जुटा कर अंजना को आवाज़ दी। कैफे में टेबल से अपना बैग उठा कर अंजना...

भोर की किरण

  वो रात कुछ लंबी हो आई थी । बाहर का अंधेरा मन को और अंधेरे से घेर रहा था। चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा...

मैं ना भूलूंगी

उमा आज सालों बाद अपने घर वापस आई थी। उसने सोचा भी नहीं था जिस आवाज से पीछा छुड़ाने के लिए उसने घर छोड़...

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अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...