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#अप्रेल-लेखन-प्रतियोगिता

पूरब की खिड़की

गायत्री की आँखों से नींद कोसो दूर थी या शायद वह सोना ही नहीं चाह रही थी। बिस्तर के इस कोने से उस कोने...

गेंद

 रवि अपने यादों के किरणों को समेटने की अथक कोशिश कर रहा था परन्तु ,"क्या समेटने की भी कोई सीमा होती है ,क्या सोचने...

खूबसूरत कर्ज़ 

  "मां! मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकता, मैं उस आदमी को माफ नही कर सकता जिसने तुम्हारी ज़िंद्गी बेरंग कर दी हो। कम से...

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अम्मा का इंतकाल

बालपन में घटित एक दुःखद घटनकाल की सुखद अनुभूतियाँ, ये मेरे बालपन का संस्मरण है,जब मासूमियत दिल पे हावी होती है और ज़ुबाँ पे...

अनुराधा

रात का अंधेरा और गहरा होता जा रहा था साथ ही मेरे भीतर की जदोजहद भी गहरी होती जा रही थी | बीते कुछ...

आज़ादी की क़ीमत

  रानी के पड़ोसी दूसरे शहर शिफ्ट हो रहे थे, जाते हुए उन्होंने अपना तोता रानी को दे दिया। पहले रानी को यह ज़िम्मेदारी कुछ...

मेरा अपना भी अस्तित्व हैं

“सुबह पांच बजे के करीब नींद खुली, फ़िल्टर कॉफ़ी माइक्रो कर जब बालकनी में आई, अद्भुत नज़ारा था..सामने वाले पार्क से आता कलरव आस...