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आशियाना

           पटना के जाने-माने डॉक्टर थे मिस्टर कपूर जिनका घर शहर की खूबसूरत रिहायशी इलाके में बना था घर क्या था एक हवेली या महल...

घर

"आपकी संस्था 'घर' को सरकारी फण्ड मिलने का ऐलान हुआ है, अब आगे की क्या प्लानिंग है? क्या आप अपने बेटे को वापस बुलायेंगी।"...

कीचड़

    बनारस एक शहर ही नहीं है बल्कि यों कहिये भगवान भोलेनाथ और मां अन्नपूर्णा की प्राचीनतम नगरी है यह नगर हमेशा से एक विलक्षण...

सूर्यबाला जी – सहज भाषा, सरल कहानियाँ

 अत्यंत शांत व सौम्य व्यक्तित्व की स्वामिनी परम आदरणीया सूर्यबाला जी का जन्म एक कायस्थ परिवार में 25 अक्टूबर 1944 को वाराणसी में हुआ।...

गृह प्रवेश

बाज़ार में घूमते घूमते मेरी नज़र साड़ियों की दुकान पे जा टिकी कांच की खिड़की से झांकते उस पुतले पे सजी गुलाबी साड़ी सुन्दर...

आश्वासन

गरिमा को जब से पता चला था कि वो माँ बनने वाली है उसकी खुशी का ठिकाना न था | वो इस बात पर...

गुरुदेव : एक बहुआयामी व्यक्तित्व

  "जोदि तोर डाक शुने केऊ ना आशे  तोबे ऐकला चोलो रे  ऐकला चोलो, ऐकला चोलो ऐकला चोलो रे!"   एक गाना जो बंगाल विभाजन के विरुद्ध एक मशाल...

इच्छा

"दी अपने अंदर के सच को बाहर आने दो,वर्ना ये जलकुंभी बन तुम्हारे मन के जलाशय को दूषित कर देगा।" "तुम कहना क्या चाहती हो...

अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...

कार और हाहाकार

शादी के बाद ससुराल (घर) में लंबे समय तक रहने का अवसर दो साल उपरांत मिला। तब जब नौकरी छोड़कर आगे पढ़ने की ठान...

स्त्री मेरी पहचान

  स्त्री,नारी,कन्या,कांता ,परिणिता नारी का हर एक संबोधन कितना प्रभावित और आकर्षित है। नारी की उपमा पा मैं स्वयं को असीम भाग्यशाली समझती हूँ।"मेरी जननी...

Most Read

सुजीत सरकार की नायिकाएं

सुजीत सरकार की फ़िल्में कई मायनों में एक ताजगी लिए होती हैं| उनकी फिल्मों की पटकथाओं के साथ ही, उनके किरदार भी लम्बे समय...

यह कैसी सज़ा ?

"आह! पानी...पानी...कोई पानी पिला दो।" कराहते हुए दीपू ने अपनी अधमुँदी आँखें खोलकर इधर- उधर देखा। पपड़ाए सूजे हुए होठों पर ,जीभ फिराकर उन्हें गीला...

ये मोह मोह के धागे

"अरे! बेटा रूही इतना घबराओ मत, कल तुम्हें हमारे घर बहू बन कर आना है कोई गुलाम बन कर नहीं"। यह बोल कर सुमन...

फैमिली ट्रिप

  बाण गंगा को पीछे छोड़े अभी आधा घण्टा ही हुआ था कि माताजी ने ऐलान किया कि भईया उनसे न हो पाएगा। बहुत विचार...