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बेटियों वाले वंश !

एक ऐसी परम्परा कहूँ या कुरीति जिसको बहुत नज़दीक से जिया है वही कुछ आपबीती सुनाने जा रही हूँ। ये केवल उस समय की ही...

मै नारी हूँ!

लक्ष्मी दुर्गा शारदा, सब नारी के रूप  देवी सी गरिमा मिले, नारी जन्म अनूप। हमारे साहित्य में ऐसी खूबसूरत पंक्तियाँ आपको पढ़ने के लिये ढेरों मिल...

“स्त्री होना मेरी पहचान”

  स्त्री,नारी,कन्या,कांता ,परिणिता नारी का हर एक संबोधन कितना प्रभावित और आकर्षित है। नारी की उपमा पा मैं स्वयं को असीम भाग्यशाली समझती हूँ।"मेरी जननी...

नारी – संयम और शक्ति

  कभी कभी ईश्वर कुछ लोगों को तराश कर फ़ुर्सत में बनाते हैं परंतु हाथों की लकीरों में सुख-चैन लिखना भूल जाते हैं। एक ऐसी...

रूढ़ियों को तोड़ती बेटियाँ

  वो जिसे मेरा दामन कहते हो ना उसके आगे मेरा पूरा आसमान है। चूड़ी, पाजेब के आगे पूरा मेरा जहान है। वो लम्हें कैसे गिनाऊँ यारों मेरा जीवन ही...

आधी किताब की पूरी विवेचना – सोशल मिडिया में साहित्य

  इंस्टेंट के नाम पर हमे इंस्टेंट खाना , इंस्टेंट मनोरंजन , इंस्टेंट फेम और इंस्टेंट नेम सब चहिये। और अक्सर इंस्टैंट का चक्रव्यूह हमे...

कवि महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘ निराला’

  वर दे, वीणावादिनी , वर दे! प्रिय स्वतंत्र- रव अमृत-मंत्र तव भारत में भर दे! काट अंध- उर के बंधन स्तर बहा जननी ज्योतिर्मय निर्झर कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर, जगमग...

बांझाकरी की प्रेमिल कविता

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका प्रियंका गहलोत द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

मेरे प्रिय रेडियो

मेरे प्रिय रेडियो, तेज हवाओं ने खिड़की के पल्ले को आपस में टकराने पर मजबूर कर दिया है। मैं भी बिस्तर से उठ कर अलसाई...

आशिक-ए-वतन

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका रागिनी प्रीत द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

ताज की मोहब्बत

  ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका किरण शुक्ला द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

ख़्वाब को चिठ्ठी

      ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका अपर्णा प्रधान द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

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अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...