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नारी – संयम और शक्ति

  कभी कभी ईश्वर कुछ लोगों को तराश कर फ़ुर्सत में बनाते हैं परंतु हाथों की लकीरों में सुख-चैन लिखना भूल जाते हैं। एक ऐसी...

रूढ़ियों को तोड़ती बेटियाँ

  वो जिसे मेरा दामन कहते हो ना उसके आगे मेरा पूरा आसमान है। चूड़ी, पाजेब के आगे पूरा मेरा जहान है। वो लम्हें कैसे गिनाऊँ यारों मेरा जीवन ही...

आधी किताब की पूरी विवेचना – सोशल मिडिया में साहित्य

  इंस्टेंट के नाम पर हमे इंस्टेंट खाना , इंस्टेंट मनोरंजन , इंस्टेंट फेम और इंस्टेंट नेम सब चहिये। और अक्सर इंस्टैंट का चक्रव्यूह हमे...

कवि महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘ निराला’

  वर दे, वीणावादिनी , वर दे! प्रिय स्वतंत्र- रव अमृत-मंत्र तव भारत में भर दे! काट अंध- उर के बंधन स्तर बहा जननी ज्योतिर्मय निर्झर कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर, जगमग...

बांझाकरी की प्रेमिल कविता

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका प्रियंका गहलोत द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

मेरे प्रिय रेडियो

मेरे प्रिय रेडियो, तेज हवाओं ने खिड़की के पल्ले को आपस में टकराने पर मजबूर कर दिया है। मैं भी बिस्तर से उठ कर अलसाई...

आशिक-ए-वतन

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका रागिनी प्रीत द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

ताज की मोहब्बत

  ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका किरण शुक्ला द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

ख़्वाब को चिठ्ठी

      ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका अपर्णा प्रधान द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

छह गज का प्रेम

ये लेख कलामंथन समूह की लेखिका मीतू वर्मा द्वारा लिखित है। आज के दौर में पत्राचार का सिलसिला थम चुका है। कलामंथन ने दिया...

समोसे के नाम – प्रेम की पाती

ये लेख कलामंथन समूह के लेखक अरबिंद कुमार पण्डे द्वारा लिखित है। आज के दौर पत्राचार का सिलसिला थम चुका है ऐसे में कलामंथन...

मजोरंजन का बदलता आयाम – कितना सही कितना गलत

हमारे मनोरंजन का हमारे जीवन शैली और हमारे विचार पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।हालिया दौर में वेब सीरीज़ का चलन और बढ़ती लोकप्रियता -...

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कठपुतली

  रविवार के दिन था । रोज़ की तरह महेन्द्र जी चाय की चुस्कियों के बीच अख़बार पढ़ने में तल्लीन थे । तभी उनकी नन्हीं...

डोमिन

भारत में गंगा नदी जीवन रेखा है।जाने कितनी ही सभ्यताएं इसके दो किनारों पर पली, आगे बढ़ी मिटी  और फिर नए सिरे से बढ़ने...

कोई मेरे जैसी …

उस पार, कोई मेरे जैसी, आँख मिचौली खेलती अपने आप से, खुद को समझाती, सपनों को पूछती क्या तुम कभी सच होते हो या बाकी सब की तरह तुम...

जून माह लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...