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Teach Your Child To Express Emotions

As a parent, we teach so many things to our children. We are eager to make them multi-talented personalities. It is very common nowadays...

वर्किंग मदर्स

जाने क्यों 'माओं ' के बीच भी ये खाई बना दी गयी। क्यों मान लिया जाता हैं की घर में रहने वाली माएँ अपना...

पितृसत्ता में पिसते पुरुष

नारीवाद या फेमिनिज्म से भी लोगों को गुरेज़ शायद इसीलिए भी है की वो प्रत्येक नारी के पुरुष को और प्रत्येक पुरुष के भीतर...

Well Being,Solace and Inward Journey

Morning Thoughts Getting up to wet roads in May/June is a perfect start of the day. A solace from the hot days of Indian Summers....

The Negative of Positive

Way past midnight as I am sitting thinking what pen down in weekly blog so many thoughts running through my mind. A lot is...

थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है

शहर की बालकनी में बैठ कर चाय पीना और उस पर कोयल की मधुर ध्वनि। ऐसा रोज़ नहीं होता न। आज की परिस्तिथि में हर कोई...

जनानखाना , बचपन और फेमिनिज़्म

आज कल का वक़्त हर कोई अलग अलग तरह से गुज़ारने की कोशिश में हैं। साडी से ले कर खाने का चैलेंज चला और...

World After Quarantine

  While we are sitting on the 3rd Sunday of the complete lockdown of our country many thoughts are floating in my mind. This is...

#Saree_Challenge

  The Delhi born Sacred Games famed actor "Jatin Sarna" made an amazingly interesting post on Instagram https://www.instagram.com/thejatinsarna/ on Tuesday! The correct Trend of #sareechallenge was...

Most Read

अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...