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Poetries

दोस्ती

कभी चाय की प्यालियों से छलकती है दोस्ती कभी कांफी की खुशबू बन जाती है लस्सी की गिलासों में चीनी बन घुलती है बारिश में भीगी महक...

किसान

जिस देश में अन्नदाता का अपमान हो, ड्रग्स की पुड़िया की चर्चा पर घमासान हो, अन्नदाता के संघर्ष पर किसी का ना ध्यान हो, बेवजह की खबरों...

Raising Successful Children – Part 2

Raising successful children is what every parent aspires for and this series is just a checklist to be reminded to all of us as...

मेरा अपना खुद का घर

मैं....मैं हूँ, यह मेरा वजूद है!किसने दिया तुमको यह हक, कि तुम खुद को मेरा भगवान समझ बैठे। रिश्ते में बंधी थी जीवनसंगिनी थी, बराबर का...

औरत के सपने

एक औरत के सपने जो औरत ने कभी देखे ही नहीं अपने लिए, विरासत में मिले सपने मुझे मां से मां को अपनी मां से बचपन से बताया...

Who Am I ??

Am I just a face with a name, playing many roles in life’s game Child, friend, parent, lover; the roles which people admire Or a soul...

मौन विदुर

कहो विदुर कब तक मौन रहोगे कब तक यूँ धीर धरोगे कहो विदुर कब तक मौन रहोगे कब तक तुम हर स्त्रियों में बैठी पांचाली को सभा में यूँ...

थम जाती कलम भी आज

थम जाती कलम भी आज ठहर जाती उंगलियां भी आज मैं लिखना चाहती हूं ' प्रेम ' लिख डालती हूं ' क्षोभ ' लिखना चाहती हूं ' वीरता...

No God In A Temple

There is no god in a temple, for I see a rock there. I find him in the blazing hot light And under the breezy moonlit...

लॉक डाउन में तो कमाल हो गया

लॉक डाउन में तो कमाल हो गया जहाँ परिवार में न होती थी आपस में बातें , जोड़ दिया उन सब टूटे ख्याबों को , समय दिया...

हौसला हो यदि बुलंद तो मुश्किल नहीं करेगी तंग

सफलता प्राप्त करने हेतु अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। राह में अनगिनत बाधाएं आती हैं। मुश्किलें हिम्मत तोड़ना चाहती हैं। मुश्किलों से भयभीत होने की...

नगरवधू

  कमल नयन कटोरे भरे जल की बदली, जाने कितने हाथों से बँधी वो कठपुतली... रखकर दाँव पर अपने आत्मसम्मान को, नगरवधू बन वो मासूम चली इक नगर...

Most Read

अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...