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Social issues

सवालों पर बेड़ियाँ – पितृसत्ता की तिलमिलाहट

अक्सर सोचती हूँ की न लिखूं। ये रोज़मर्रा की बातें हैं और घटियापन ,ओछेपन और बीमार मानसिकता पर तो जी ही रहें हैं हम। अपने काम...

“आधुनिक सोच”

  शादी की शहनाई का शोर थम गया मानसी के मन में मखमली रोमांच ने जगह ले ली। संकेत का हाथ थामें ज़िंदगी के नये...

काश…

गुड़िया रानी, बिटिया रानी पारियों की नगरी से एक दिन राजकुवर जी आयेंगे, महलों में ले जायेंगे। मेरी पत्नी मेरी पांच साल की नातिन को सुलाने की...

मेरा अपना खुद का घर

मैं....मैं हूँ, यह मेरा वजूद है!किसने दिया तुमको यह हक, कि तुम खुद को मेरा भगवान समझ बैठे। रिश्ते में बंधी थी जीवनसंगिनी थी, बराबर का...

ये कैसी मानसिकता?

        नारी जीवन का सबसे सुंदर रूप माँ का माना जाता है और वह माँ तभी बनती है जब उसका शारीरिक विकास पूर्ण हो।एक...

मौन विदुर

कहो विदुर कब तक मौन रहोगे कब तक यूँ धीर धरोगे कहो विदुर कब तक मौन रहोगे कब तक तुम हर स्त्रियों में बैठी पांचाली को सभा में यूँ...

थम जाती कलम भी आज

थम जाती कलम भी आज ठहर जाती उंगलियां भी आज मैं लिखना चाहती हूं ' प्रेम ' लिख डालती हूं ' क्षोभ ' लिखना चाहती हूं ' वीरता...

बातचीत पर टिकी सम्बन्धों की डोर

बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाय सौंह करे भौंहन हंसे देते कहें नटि जाय। हिंदी साहित्य जगत में उच्च कोटि के कवि बिहारी जी का...

पितृसत्ता में पिसते पुरुष

नारीवाद या फेमिनिज्म से भी लोगों को गुरेज़ शायद इसीलिए भी है की वो प्रत्येक नारी के पुरुष को और प्रत्येक पुरुष के भीतर...

लड़की लवली तो होनी ही चहिये।

संस्कारो का, यूँ कहिए की एडिटिंग का डर है वरना शुद्ध हिंदी में कुछ परोसने को जी चाहता उनको, जो फेयर मतलब ग्लो के...

लॉकडाउन में बदलते रिश्ते

आज मै यह लेख अपने अपराध बोध को कुछ कम करने की मंशा से,और अपनी गलत धारणा को स्वीकार करने हेतु कलमबद्ध कर रही...

Get up! Dress up!! Show up!!! Never give up

The most used word apart from other obvious ones is 'work from home'. We are surviving on this concept and doing pretty good. Few...

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अम्मा का इंतकाल

बालपन में घटित एक दुःखद घटनकाल की सुखद अनुभूतियाँ, ये मेरे बालपन का संस्मरण है,जब मासूमियत दिल पे हावी होती है और ज़ुबाँ पे...

अनुराधा

रात का अंधेरा और गहरा होता जा रहा था साथ ही मेरे भीतर की जदोजहद भी गहरी होती जा रही थी | बीते कुछ...

आज़ादी की क़ीमत

  रानी के पड़ोसी दूसरे शहर शिफ्ट हो रहे थे, जाते हुए उन्होंने अपना तोता रानी को दे दिया। पहले रानी को यह ज़िम्मेदारी कुछ...

मेरा अपना भी अस्तित्व हैं

“सुबह पांच बजे के करीब नींद खुली, फ़िल्टर कॉफ़ी माइक्रो कर जब बालकनी में आई, अद्भुत नज़ारा था..सामने वाले पार्क से आता कलरव आस...