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गुलमोहर के फूल

  आज पाँच साल बाद निकिता ने अपनी स्कूटी उसी पार्क के सामने रोकी,जहाँ वह और अनुज अक्सर मिला करते थे।पार्क की उसी बेंच पर...

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है

"मुझे मर जाना चाहिए, तुम मेरा गला दबा दो| प्लीज मुझ पर रहम करो| तुम खुद बच्चों को संभाल लेना| मुझे बहुत घबराहट हो...

लाल गुलाब

महिका सोच में डूबी थी, ये लाल गुलाब किसने भिजवाए! बिना नाम पते का छोटा-सा कार्ड इश्क की महक से सुवासित हो रहा था,...

महक….!

"अरे वाह! मनोरमा आज तो तुम्हारी रसोई में बहुत समय बाद ऐसी खुशबू आई।बेटे की पसंद का खाना बनाया जा रहा है।" नवीन जी...

अंतरज्वाला

इधर कुछ दिनों से अंजलि बैंक से काफ़ी देर से लौटने लगी थी। अंजलि और अजय दोनों कामकाजी थे। अंजलि बैंक में और अजय...

अब बस

  रूपा सुबह सुबह हाँथ में चाय का कप लिए हॉल में बैठकर टीवी देखते हुए चाय पी रही थी कि तभी उसको डोरबेल की...

संबंध

बाहर नये साल का जश्न पूरे शबाब पर था और भीतर,, मेरे अंतर्मन में स्मृतियों की आतिशबाज़ी शुरू हो गयी!! कल ही की तो बात...

जश्न

पाखि अपने माता पिता की एक मात्र संतान थी।शहर मे उसके पिता जाने माने रेडीमेड कपड़ों के व्यापारी थे। "पाखि गारमेंट्स" के शोरुम शहर...

फैसला

"माँ ! मुझे अनिल ने बताया कि लाल आप का पसंदीदा रंग है। " रश्मि ने अपने पति के द्वारा बतायी गयी बात का...

संजोग

मुसाफिर हूँ यारों ना घर है ना ठिकाना, मुझे चलते जाना है ना जाने क्यों आज जितेंद्र का ये पुराना गाना बहुत याद आ रहा...

पछतावा

सुनिए ये एड्रेस बता सकेंगी। एक अजनबी की आवाज़ आयी और गेट खोलते हुए ही उसने पीछे मुड़ कर देखा, ये तो सुबोध ही...

PUPPET

  Sam came out of the consulting room almost dead. The words of the oncologist kept echoing in his ears as he walked towards his...

Most Read

अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...