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Writing Contest

संबंध

बाहर नये साल का जश्न पूरे शबाब पर था और भीतर,, मेरे अंतर्मन में स्मृतियों की आतिशबाज़ी शुरू हो गयी!! कल ही की तो बात...

जश्न

पाखि अपने माता पिता की एक मात्र संतान थी।शहर मे उसके पिता जाने माने रेडीमेड कपड़ों के व्यापारी थे। "पाखि गारमेंट्स" के शोरुम शहर...

एक तरफा इश्क

कल ही तो पूरा परिवार खुशी- खुशी रचना की डिलीवरी कराने अस्पताल गए थे और आज बेटी को जन्म देते ही रचना चल बसी।...

चंदा के रथ पर सवार, परियों का राजकुमार

राजस्थान के छोटे से कस्बें राजसमंद के 'इरिगेशन डिपार्टमेंट' में 'जूनियर इंजीनियर' के पद पर काम करते थे मोहन बाबू। छोटा सा सुखी परिवार...

संजोग

मुसाफिर हूँ यारों ना घर है ना ठिकाना, मुझे चलते जाना है ना जाने क्यों आज जितेंद्र का ये पुराना गाना बहुत याद आ रहा...

नेकी

सुनीता एक बहुत ही छोटे परिवार में जन्मी थी। बारह वर्ष की उम्र में ही उसकी माँ ने उसे बर्तन मांजने के काम में...

पछतावा

सुनिए ये एड्रेस बता सकेंगी। एक अजनबी की आवाज़ आयी और गेट खोलते हुए ही उसने पीछे मुड़ कर देखा, ये तो सुबोध ही...

इंसानियत का धर्म

स्टेशन से महेंद्र सीधे राजीव के दफ्तर पहुँचा, और जाता भी कहाँ? घर का अता-पता तो था नहीं, हाँ राजीव इस मल्टीनेशनल कम्पनी में...

मृगतृष्णा

रिया को चलते - चलते शाम हो गई थी। सूरज के डूब जाने से आसमान थोड़ा नारंगी, थोड़ा गुलाबी हो गया था। वह रुक...

अधूरे सपने

मैली कुचली साड़ी पहनने, आज फिर नैना पहुंची थी पासपोर्ट ऑफिस में "जी नटवरलाल जी से मिलना है" देखिए मैडम मैं इस अनजान शहर में महीनों...

काश…

गुड़िया रानी, बिटिया रानी पारियों की नगरी से एक दिन राजकुवर जी आयेंगे, महलों में ले जायेंगे। मेरी पत्नी मेरी पांच साल की नातिन को सुलाने की...

अत्याचार के ख़िलाफ़ कदम

सीमा एक बहुत ही सीधी,प्रतिभाशाली और सुंदर लड़की थी।उसके पिता जी रमेश शहर के किसी ऑफ़िस में गार्ड की नौकरी करते थे।सीमा तीन भाई...

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सवालों पर बेड़ियाँ – पितृसत्ता की तिलमिलाहट

अक्सर सोचती हूँ की न लिखूं। ये रोज़मर्रा की बातें हैं और घटियापन ,ओछेपन और बीमार मानसिकता पर तो जी ही रहें हैं हम। अपने काम...

अंतरज्वाला

इधर कुछ दिनों से अंजलि बैंक से काफ़ी देर से लौटने लगी थी। अंजलि और अजय दोनों कामकाजी थे। अंजलि बैंक में और अजय...

दो दिल मिले चुपके-चुपके

  "निलेश आज जो हुआ वो ठीक नहीं था" " हां सीमा इस बात का मुझे भी एहसास है कि हमसे अन्जाने में बहुत बड़ी गल्ती...

अब बस

  रूपा सुबह सुबह हाँथ में चाय का कप लिए हॉल में बैठकर टीवी देखते हुए चाय पी रही थी कि तभी उसको डोरबेल की...