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Writing Contest

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है

"मुझे मर जाना चाहिए, तुम मेरा गला दबा दो| प्लीज मुझ पर रहम करो| तुम खुद बच्चों को संभाल लेना| मुझे बहुत घबराहट हो...

ज़ंजीर

फेयरी लाईट्स के झालर से चाँद अचंभित था, पृथ्वी पर तारों की महफिल का सजना उसे भरमाने लगा। तारे के एक टुकड़े को तेज़ी...

खुद को एक मौका तो दो |

चेहरे पे लाल बिंदी दोनों भौंवों के बीच लगाते हुए, नारायणी की पलकें कापने लगीं, आईना अनजाना सा लगने लगा, सवाल करने लगा।ये साज...

मर्दानगी का मोंह

गोरे रंग की काली -काली व बड़ी- बड़ी आंखों वाली कविता एक साधारण भारतीय नारी थी। वैसे ही सीधे साधे गेहुए रंग के कन्हैया...

इज़हार

वंदना खलिलाबाद जैसे एक छोटे शहर मे रहती थी। उसके पड़ोस में राहुल नाम का लड़का रह्ता था ,जो करीब करीब वंदना के उम्र...

प्रारंभ से अंत तक

  पूज्य बाबू जी, सादर चरण स्पर्श. . . नहीं जानता कि, आप मेरा ये प्रणाम स्वीकार भी करेंगे या नहीं, पर सुना है कि बच्चे कैसे...

कबूल कर लो

सचिन मेज पर औंधे मुँह पड़ा था। मन का अंधकार कमरे में जल रही ट्यूबलाइट की रोशनी पर जोर जमा रहा था। वह और...

वागदत्ता का सातवां फेरा

ये कहानी है तन्वी की... मेरी सखी जिसे प्यार से हम सब तनु कहते थे। किशोरावस्था से नए नए यौवन की दहलीज़ में हमने...

महक….!

"अरे वाह! मनोरमा आज तो तुम्हारी रसोई में बहुत समय बाद ऐसी खुशबू आई।बेटे की पसंद का खाना बनाया जा रहा है।" नवीन जी...

दो दिल मिले चुपके-चुपके

  "निलेश आज जो हुआ वो ठीक नहीं था" " हां सीमा इस बात का मुझे भी एहसास है कि हमसे अन्जाने में बहुत बड़ी गल्ती...

अब बस

  रूपा सुबह सुबह हाँथ में चाय का कप लिए हॉल में बैठकर टीवी देखते हुए चाय पी रही थी कि तभी उसको डोरबेल की...

क्षमा

"बाहर नए साल का जश्न पूरे शबाब पर था और भीतर मंजरी अपने ज़ख्मों को दवा लगाती हुई, अपने दिल को घायल कर रही...

Most Read

अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...