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Hindi Story

अत्याचार के ख़िलाफ़ कदम

सीमा एक बहुत ही सीधी,प्रतिभाशाली और सुंदर लड़की थी।उसके पिता जी रमेश शहर के किसी ऑफ़िस में गार्ड की नौकरी करते थे।सीमा तीन भाई...

ममता की आस

  चंदा है तू , मेरा सूरज है तू बंगले के बगल के मोड़पर पान की दुकान पर रेडियों पर गाना बज रहा था।यूँ तो श्यामा...

तुम जो आए जिंदगी में

अलसाई आंखों को मलते हुए पूर्वी ने बिस्तर से उठकर आईने में एक बार खुद को देखा फिर बेतरबी से बाल एक जूड़े में...

अक्टूबर कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? अगर हाँ तो हम आपके लिए शुरू कर...

मंजरी सदन

  22/6 म.... म...मंजरी .... मंजरी सदन...!! रवि स्तब्ध था, दिल मानने से इंकार कर रहा था कि ये वही घर है जहाँ उसकी बेटी...

तू तो पैदा ही मनहूस हुई थी

"मीनी मीनी कहां हैं तू" -अपने बेडरूम से चाची ने आवाज लगाई। "चाची मैं खाना खा रही हूं, कहते हुए मीनी चाची के कमरे के...

खामोश लफ्ज

बारिश और साथ मे हो गर्मागर्म चाय ... फिर तो मौसम और भी सुहाना लगने लगता हैं ... कुछ ऐसी ही एक कहानी हैं...

ठहरा हुआ पतझड़

 रैना बीती जाऐ, श्याम ना आये निन्दिया ना आये....... एक सुरीली आवाज ने मेरी निद्रा भङ्ग कर दी लेकिन बुरा नही लगा, वो आवाज थी इतनी...

इत्तफाक

आज उसका दाखिला विश्वविद्यालय में एक शोधकर्ता के रूप में हुआ।सारी औपचारिकताएं पूरी कर थोड़ी बहुत सीनियर्स की खिंचाई भी झेला फिर थक कर...

फरेबी इश्क

"नगीना अरे ओ नगीना पता नहीं ये लड़की कहां है दिन चढ़ आया है और अभी तो कॉलेज के लिए देर भी हो रही...

तेरे बिना जिया जाए ना

शाम होने को आई थी, घर और बच्चों के लिए कुछ जरूरी सामान खरीदकर मोना तेज कदमों से घर जा रही थी तभी पीछे...

सितंबर – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? अगर हाँ तो हम आपके लिए शुरू कर...

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सवालों पर बेड़ियाँ – पितृसत्ता की तिलमिलाहट

अक्सर सोचती हूँ की न लिखूं। ये रोज़मर्रा की बातें हैं और घटियापन ,ओछेपन और बीमार मानसिकता पर तो जी ही रहें हैं हम। अपने काम...

अंतरज्वाला

इधर कुछ दिनों से अंजलि बैंक से काफ़ी देर से लौटने लगी थी। अंजलि और अजय दोनों कामकाजी थे। अंजलि बैंक में और अजय...

दो दिल मिले चुपके-चुपके

  "निलेश आज जो हुआ वो ठीक नहीं था" " हां सीमा इस बात का मुझे भी एहसास है कि हमसे अन्जाने में बहुत बड़ी गल्ती...

अब बस

  रूपा सुबह सुबह हाँथ में चाय का कप लिए हॉल में बैठकर टीवी देखते हुए चाय पी रही थी कि तभी उसको डोरबेल की...