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Hindi Story

प्रारंभ से अंत तक

  पूज्य बाबू जी, सादर चरण स्पर्श. . . नहीं जानता कि, आप मेरा ये प्रणाम स्वीकार भी करेंगे या नहीं, पर सुना है कि बच्चे कैसे...

कबूल कर लो

सचिन मेज पर औंधे मुँह पड़ा था। मन का अंधकार कमरे में जल रही ट्यूबलाइट की रोशनी पर जोर जमा रहा था। वह और...

वागदत्ता का सातवां फेरा

ये कहानी है तन्वी की... मेरी सखी जिसे प्यार से हम सब तनु कहते थे। किशोरावस्था से नए नए यौवन की दहलीज़ में हमने...

महक….!

"अरे वाह! मनोरमा आज तो तुम्हारी रसोई में बहुत समय बाद ऐसी खुशबू आई।बेटे की पसंद का खाना बनाया जा रहा है।" नवीन जी...

संजोग

मुसाफिर हूँ यारों ना घर है ना ठिकाना, मुझे चलते जाना है ना जाने क्यों आज जितेंद्र का ये पुराना गाना बहुत याद आ रहा...

नेकी

सुनीता एक बहुत ही छोटे परिवार में जन्मी थी। बारह वर्ष की उम्र में ही उसकी माँ ने उसे बर्तन मांजने के काम में...

पछतावा

सुनिए ये एड्रेस बता सकेंगी। एक अजनबी की आवाज़ आयी और गेट खोलते हुए ही उसने पीछे मुड़ कर देखा, ये तो सुबोध ही...

इंसानियत का धर्म

स्टेशन से महेंद्र सीधे राजीव के दफ्तर पहुँचा, और जाता भी कहाँ? घर का अता-पता तो था नहीं, हाँ राजीव इस मल्टीनेशनल कम्पनी में...

काश…

गुड़िया रानी, बिटिया रानी पारियों की नगरी से एक दिन राजकुवर जी आयेंगे, महलों में ले जायेंगे। मेरी पत्नी मेरी पांच साल की नातिन को सुलाने की...

अत्याचार के ख़िलाफ़ कदम

सीमा एक बहुत ही सीधी,प्रतिभाशाली और सुंदर लड़की थी।उसके पिता जी रमेश शहर के किसी ऑफ़िस में गार्ड की नौकरी करते थे।सीमा तीन भाई...

ममता की आस

  चंदा है तू , मेरा सूरज है तू बंगले के बगल के मोड़पर पान की दुकान पर रेडियों पर गाना बज रहा था।यूँ तो श्यामा...

तुम जो आए जिंदगी में

अलसाई आंखों को मलते हुए पूर्वी ने बिस्तर से उठकर आईने में एक बार खुद को देखा फिर बेतरबी से बाल एक जूड़े में...

Most Read

अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...